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(GMT+08:00) 2005-05-10 16:25:57    
चीनी संगीतकार चो तोंग छाओ की सुरना धुनें

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सुरना बजाने वाले संगीतकार चो तोंग छाओ चीन में मशहूर हैं ।

उत्तरी चीन के ह बेई प्रांत की दिंग श्येन कांउटी में जन्म लेने वाले श्री चो तोंग छाओ के पिता भी संगीतकार हैं । पिता को बांसुरी और सुरने से मीठे सुर फूंकने में महारत हासिल थी। इसलिए नन्हे चो तोंग छाओ की बचपन से ही इन वाद्यों में रुचि जगने लगी।

सात वर्ष की आयु से ही श्री चो तोंग छाओ ने बांसुरी बजाने का अभ्यास करना शुरू कर दिया था।कड़ी मेहनत से उन्हें प्रगति मिली। नौ वर्ष की उम्र में वे सुरना बजाना सीखने लगे और कुछ समय बाद लोगों के सामने अपनी वादन प्रतिभा का प्रदर्शन भी करने लगे। 12 वर्ष की उम्र तक वे सुरना बादन में कई उपलब्धियां हासिल कर चुके थे। दो बार वे अपनी कांउटी की ओर से प्रांत स्तर की सुरना वादन प्रतियोगिता में भी शरीक रहे और दो बार उस में पुरस्कार भी जीता। वर्ष 1975 में 15 वर्षीय चो तोंग छाओ ने ह बेई प्रांत की ओर से चीनी राजधानी पेइचिंग में हुई राष्ट्रीय सुरना वादन प्रतियोगिता में भाग लिया और इस प्रतियोगिता का पुरस्कार पाने वाले सब से युवा वादक होने का गौरव पाया। पेइचिंग की इस प्रतियोगिता के बाद उन्हें चीनी रेडियो जातीय संगीत दल की सदस्यता हासिल हुई।

चीन के मैत्री दूत के रूप में श्री चो तोंग छाओ यूरोप, एशिया तथा अफ़्रीका के बीस से अधिक देशों व क्षेत्रों की यात्रा कर चुके हैं। उन्हें देश- विदेश के कई मशहूर संगीत दलों के साथ संगीत सभाएं करने का अनुभव हासिल है और इन सभाओं की दर्शकों ने हार्दिक सराहना की है।अपनी संगीत सभाएं आयोजित करने के साथ श्री चो तोंग छाओ बहुत से विद्यार्थियों को पढ़ाते भी रहे हैं। आज उन के विद्यार्थी देश-विदेश में फैले हुए हैं। चीन के विशेष प्रशासनिक क्षेत्र हांगकांग और सिंगापुर तक से लोग उन से सुरना सीखने आते हैं और श्री चो तोंग छाओ उन्हें पूरी गंभीरता से संगीत ज्ञान देते हैं।

धुन--"विश्वासघात का दंड" 

यह है सुरने से बजने वाली मशहूर पेइचिंग ओपेरा "विश्वासघात का दंड" की एक धुन। पेइचिंग ओपेरा के संगीत में कई किस्मों के वाद्य शामिल होते हैं और सुरना की इस में भागीदारी ऑपेरा के संगीत को और विशेष बनाती है।

"विश्वासघात का दंड" ऑपेरा एक पुरानी कहानी पर आधारित है , जो लगभग नौ सौ वर्ष पूर्व घटित मानी जाती है। कहते हैं कि चीन के सोंग राजवंश के दौरान छङ शी मेई नामक एक युवा था। उस की एक पत्नी और दो बेटे थे। परिवार का जीवन बहुत कठिन था । इसलिए गरीबी से उबरने के लिए छङ शी मेई ने सोंग राजवंश की राजधानी जाकर सरकारी अधिकारी बनने की ठानी। वह अधिकारी भी बन गया।

राजा को वह पसंद आया और उस ने अपनी बेटी यानी राजकुमारी से उस की शादी करनी चाही । जब राजा ने उस के विवाहित होने की बात जाननी चाही, तो छङ शी मेई ने परिवार होने की बात छिपा दी। इस तरह उस की राजा की बेटी के साथ शादी हो गयी । उधर उस की पत्नी घर पर लम्बे समय से पति की बाट जोह रही थी , लेकिन जब वह वापस नहीं लौटा , तो वह अंत में दोनों बेटों के साथ पति की खोज में राजधानी की ओर चल पड़ी। बड़ी कोशिशों के बाद उसे पति मिला भी, तो राजा के दामाद बन बैठे छङ शी मेई ने पत्नी को अस्वीकार ही नहीं किया , उस की हत्या करने तक की कोशिश की । पत्नी ने अपने असंतोष की शिकायत तत्कालीन न्यायाधीश बाओ गोंग के सामने रखी। बाओ गोंग बहुत न्यायप्रिय थे। उन्होंने इस घटना की जांच-पड़ताल कर राजा के दामाद छङ शी मेई को गिरफ़्तार करवाया और राजा एवं राजकुमारी के दबाव की अनदेखी कर छङ शी मेई को मौत की सज़ा सुनाई।

श्री चो तोंग छाओ ने इस ओपेरा में सुरने पर न्यायाधीश बाओ गोंग की आवाज़ की कल्पना कर उन की निष्पक्षता को अभिव्यक्ति दी, जिसे लोगों ने विशेष पाया।

दोस्तो, श्री चो तोंग छाओ द्वारा सुरने पर प्रस्तुत धुनें आशा है आप को भी पसंद आयी होंगी। अच्छा आज के कार्यक्रम के अंत से पहले आप सुनेंगे उन की एक और धुन। इस धुन को श्री चो तोंग छाओ ने मध्य चीन के ह नान प्रांत के यू ज्यू ऑपेरा के आधार पर रचा है। इस में ह नानवासियों की सादगी व्यक्त हुई है।

धुन—यू ज्यू ऑपेरा की धुन