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(GMT+08:00) 2005-04-22 14:57:27    
शाङ और पश्चिमी चओ राजवंश

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शाङ राजवंश काल की लिपि बैल की हड्डियों व कछुए के कोशों पर उत्कीर्ण भविष्यफलों तथा कांसे के बरतनों पर खुदवाए गए अभिलेखों के रूप में देखने को मिलती है।

इन भविष्यफलों से उत्पादन और घरेलू कामकाज में लगे दासों के जीवन, युद्धों और प्राकृतिक परिवर्तनों की जानकारी प्राप्त होती है। उस काल में पंचांग भी अपनाया जा चुका था, जिसके अन्तर्गत 30 या 26 दिनों वाले 12 महीनों का एक साल होता था और कुछ साल बीतने पर एक फालतू महीना जोड़कर अधिवर्ष बना दिया जाता था।

शाङ राजवंश के मकबरों की खुदाई से पता चलता है कि उस काल में दासों को अपने मालिक के मरने पर उस के साथ ही कब्र में जिन्दा दफना दिया जाता था। शाङ राजवंश का शासन लगभग 600 वर्षों तक चला था।

ईसापूर्व 11 वीं शताब्दी में, आज के शेनशी प्रान्त के आसपास के इलाकों में बसने वाली चओ राज्य की जनता ने चीफ़ा अर्थात राजा ऊ के नेतृत्व में शाङ राजवंश से सत्ता छीनकर एक नया दासप्रथा वाला राजवंश कायम किया और हाओचिङ (वर्तमान शेनशी प्रान्त के शीआन शहर के दक्षिणपश्चिम में) को अपनी राजधानी बनाया। इतिहास में यह काल पश्चिमी चओ काल (11 वीं शताब्दी – 770 ई. पू.) कहलाता है।

अपने शासन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से पश्चिमी चओ राजवंश ने शुरू में ही राजघराने के लोगों व उनके रिश्तेदारों को जागीरें दीं। नतीजे के तौर पर बहुत से छोटे-छोटे राज्य कायम हुए। ऐतिहासिक ग्रन्थों के अनुसार उस समय कुल 71 राज्य थे, जिन में लू, वेइ, छी, चिन और येन अपेक्षाकृत बड़े थे।

समूचे देश की जमीन की मिलकियत चओ राजा के हाथ में थी। दासों को मजबूर होकर चौकोर टुकड़ों वाले खेतों में सामूहिक रूप से श्रम करना पड़ता था। भूमि को अलग-अलग चौकोर टुकड़ों में बांटकर खेत बनाए जाने की यह व्यवस्था"चिङथ्येन व्यवस्था"कहलाती थी और यह शाङ और चओ राजवंशों के काल में दास-समाज की मुख्य भूमि-व्यवस्था थी।

पश्चिमी चओ काल में उत्पादक श्रम के लिए दासों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता था और पूर्ववर्ती शाङ राजवंश के मुकाबले कहीं ज्यादा अनाज पैदा किया जाता था।

कांसे के पात्रों की किस्में व उनका उत्पादन काफी बढ़ गया था, जिन में से कुछ पर लम्बे-लम्बे अभिलेख भी खुदवाए गए थे। इसी प्रकार के एक कांस्यपात्र पर खुदवाए गए अभिलेख में यह उल्लेख किया गया है कि तत्कालीन चओ राजा ने अपने राज्य के य्वी नामक एक रईस को एक ही बार में 1709 दास भेंट किए थे।

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