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(GMT+08:00) 2005-04-18 14:53:39    
गायक क्वो फङ की कहानी

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क्वो फ़ङ चीन के एक बहुत मशहूर गायक हैं । वे चीन के भीतरी इलाके में पोप संगीत के प्रवर्तकों में से एक हैं। उनके द्वारा रचे और गाए गए गीतों की धुनें बहुत मधुर ही नहीं हैं, प्रभावी शक्ति से भरी हैं। क्वो फ़ङ द्वारा गाया गया परोपकार का गीत तो देश भर में लोकप्रिय है।

गीत--- "विश्व को भर दो प्यार से" 

यह है क्वो फ़ङ और उनके साथियों द्वारा गाया गया गीत "विश्व को भर दो प्यार से"। यह गीत वर्ष 1986 में क्वो फ़ङ ने विश्व शांति दिवस की स्मृति में विशेष तौर पर रचा और उसी वर्ष पेइचिंग के मज़दूर स्टेडियम में आयोजित "सौ गायकों व गायिकाओं की संयुक्त प्रस्तुति" नामक समारोह में जब गूंजा तो इस की मधुर धुन, शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों को बहुत प्रभावित किया। क्वो फ़ङ इसी गीत के जरिए गायक के रूप में सफल हुए और चीन भर में मशहूर हो गये।

गीत का भावार्थ कुछ इस प्रकार है

आते हो तुम, आता है वह

रंग-बिरंगी इस दुनिया में

हम आते हैं साथ-साथ

बहुत खुशी से

तुम आते हो, वह आता है

हम साथ-साथ आते हैं

इस सुन्दर जमीन पर

एक-दूसरे के लिए प्यार के हमारे

कोई सीमा नहीं

इस दुनिया को भर दो प्यार से

सच्ची भावना से

बदले दुनिया

जिज्ञासा नहीं बदलेगी

एक पीढ़ी के दूसरी से संबंध होंगे घनिष्ठ

एक-दूसरे से अलग नहीं होगी कभी

अगर खोया हमारा विश्वास

तो दुनिया भी गुम हो जाएगी

भर दो दुनिया को प्यार से

सच्ची भावना से

साल ब साल करें

हम कल का स्वागत

क्वो फ़ङ का जन्म एक संगीतकार के परिवार में हुआ। उन के पिता संगीतकार हैं। पिता के असर में आकर क्वो फ़ङ तीन वर्ष की उम्र से ही पियानो सीखने लगे। 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने सच्वान प्रांत के कला स्कूल के पियानो विभाग में प्रवेश पाया। इस दौरान उनकी संगीत रचना में रुचि जगी। 14 वर्ष की आयु में क्वो फ़ङ ने स्वरचित पहली धुन "चांदनी" प्रकाशित की। तब की याद करते हुए क्वो फ़ङ ने माना कि पियानो सीखने, संगीत रचने तथा गाने ने उन के जीवन पर बड़ा प्रभाव डाला। क्वो फ़ङ का कहना है

"मैं जो गीत रचता हूं , उन्हें खुद ही बजाता हूँ। पिछले कोई बीस वर्षों में संगीत क्षेत्र में मुझे प्राप्त सफलता का आधार पियानो ही है। कई साल पहले मैं ने पियानो वादन सभा और गीत सभा भी आयोजित की। इस दौरान पियानो ने मुझ पर बड़ा प्रभाव डाला।"

क्वो फ़ङ ने सछ्वान कला स्कूल से स्नातक होने के बाद कुछ समय वहां अध्यापन भी किया, लेकिन उनकी संगीत रचना की चाह कभी नहीं थमी। पोप संगीत में दिलचस्पी के चलते क्वो फ़ङ अंत में चीनी पोप संगीत मंच पर उतरे। वर्ष 1983 में उन्होंने सछ्वान कला स्कूल से विदा ली और राजधानी पेइचिंग आये। दो साल बाद वे चीनी पूर्वी नृत्य गान मंडली में प्रवेश कर गये। वहां उन्हों ने "विश्व को भर दो प्यार से", "प्यार की खोज", "धरती का बच्चा" और "तुम्हारे साथ रहेगी मेरी चाह"  आदि गीत रचे जिन का बहुत स्वागत हुआ। इसके बाद क्वो फ़ङ द्वारा गाए गए गीत देश भर में प्रसारित होने लगे।