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(GMT+08:00) 2005-03-24 14:30:33    
खाई फुंग का गुप्त ड्रैगन महल

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प्रिय मित्रो , चीन का भ्रमण कार्यक्रम में हम आप के साथ मध्य चीन के प्राचीन शहर खाई फूंग के दौरे पर गये थे । वहां पर हमें यह पता चला है कि खाई फूंग चीन का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक शहर ही नहीं , वह कोई हजार वर्ष पहले चीन के उत्तरी सुंग राजवंश के नौ राजा इसी शहर में अपना शासन भी करते थे , साथ ही इस शहर के अनेक प्राचीन सांस्कृतिक अवशेष अब तक सुरक्षित हैं और इसकी तत्कालीन समृद्धि व शानदार इतिहास का परिचय देते हैं। इन में सब से अजीब व ध्यानाकर्षक ऐतिहासिक अवशेष खाई फूंग शहर की चार दीवारी की गिनती आती है ।

पुराने चीन में आम तौर पर शहर की रक्षा दीवार मजबूत ही नहीं, बहुत चौड़ी व समतल भी होती थी। शहर की रक्षा के लिए दीवार पर घोड़ों के दौड़ने लायक विशेष रास्ता भी निर्मित किया जाता था। इस तरह हमलावरों के मुकाबले के लिए घोड़ों के जरिए भारी शस्त्र दीवार तक पहुंचाये जाते थे। लेकिन खाई फूंग के राजभवन की चारदीवारी सीढ़ीनुमा है और इतनी संकरी है कि उस पर एक समय में केवल दो व्यक्ति ही साथ-साथ चल सकते हैं। सुनने में आया कि पर्यटकों के लिए इस प्रकार की दीवार विशेष तौर पर बनायी गयी, ताकि वे सुविधाजनक रूप से उस पर चढ़ सकें।

खाई फूंग की इस चारदीवारी पर आप को तलवार, बंदूक व लकड़ी के खंभा आदि नहीं दिखेंगे। इस पर प्राचीन कालीन समय मापक यंत्र और पश्चिमी भाग में बड़ा ढोल खड़े हुए हैं । दीवार के मोड़ों पर कई सुंदर मंडप भी खड़े हैं। हरेक मंडप के नीचे पत्थर की छोटी गोल मेज व बेंच है, ताकि पर्यटक वहां रुक कर आराम कर सकें।

प्रिय मित्रो , यह मजेदार दिखावा असुरक्षित दीवार देखने के बाद मेरे साथ चले इस दीवार के पूर्वी भाग में स्थित गुप्त ड्रैगन महल नामक भवन देखने । इस भवन के लिए प्रयुक्त महल शब्द को देख कर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ। जहां तक मेरी जानकारी है, प्राचीन सामंती चीन में केवल शाही परिवार का भवन ही महल कहला सकता था, इसके विपरीत चलने वाले भवन निर्माता सख्त सजा ही पाता। यहां सिर्फ एक राजकीय संस्था थी, फिर इस भवन के महल कहलाने का रहस्य क्या था। पूछने पर मालूम हुआ कि कोई एक हजार वर्ष पहले उत्तरी सुंग राजवंश काल में राजा रन चूंग व उनके बेटे चन चूंग समेत तीन राजा राजगद्दी पर बैठने से पहले इस राजभवन में काम करते रहे थे। राजा चन चूंग ने अपने शासन काल में पिता रन चूंग की याद में इस भवन को पुनर्निर्माण के बाद गुप्त ड्रैगन महल नाम दिया। इस भवन की छत के पीले रंग के खपरैल आज भी चमकते नजर आते हैं। हमारे साथ चल रही गाइड सुश्री चाओ ना ने कहा कि खाई फूंग के राजभवन में जितने छोटे-बड़े भवन दिखते हैं, उन में से सिर्फ इसी महल पर पीले खपरैल बिछे हैं। उस जमाने में पीला रंग शाही परिवार का शुभचिन्ह था और राजाधिकार का प्रतीक भी। इस का भी एक कारण है कि इस भवन में तीन राजाओं की मूर्तियां रखी हैं। भवन के नाम का निहितार्थ यह है कि यहां बेमिसाल प्रतिभाशाली व्यक्ति पैदा होते हैं।

गुप्त ड्रैगन महल के प्रमुख कक्ष के बीचोंबीच इन तीन राजाओं की मूर्तियां खड़ी हैं। दोनों ओर रंगीन भित्तिचित्र हैं, जिन में उन के नेतृत्व में बाहरी हमलावरों के खिलाफ लड़ी गई लड़ाई और उनमें विजय की खुशियां मनाने का चित्रण है। पर ऐतिहासिक तथ्य यह है कि सुंग राजवंश के राजा खासे कमजोर थे और बाहरी हमलावरों से डरते थे। राजमंत्रियों और बड़े भूतियों के समर्थन से ही वे हमलावरों को पीछे खदेड़ पाये। पर वे शस्त्र विद्या के बजाय शिक्षा को अधिक महत्व देते थे। खाई फूंग राजभवन का विशेष परीक्षाकक्ष आज भी ज्यों का त्यों खड़ा है। यह एक दुमंजिला इमारत है। इसकी दूसरी मंजिल पर परीक्षक देव की मूर्ति खड़ी है, जब कि पहली मंजिल तब परीक्षाकक्ष था। कक्ष के भित्तिचित्रों में सुंग राजवंश काल की पूरी परीक्षा व्यस्था चित्रित है। भित्तिचित्रों की श्रृंखला कुल 15 खंडों में बंटी है।इन में छात्रों के नामांकन से लेखऱ परीक्षा के तीन दौरों और उस में उत्तीर्ण व विफल होने से जुड़े विवरण हैं। कुछ भित्तिचित्रों में छात्र दिलोजान से किताब पढ़ते दिखते हैं तो कुछ परीक्षा की सोच में डूबे नजर आते हैं। इनके बीच परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर छात्रों में अपार खुशी होने और विफल होने पर परेशानी में पड़ने का दृश्य भी दिख जाता है। ये चित्र देखने में वाकई बड़ा मजा आता है।