• हिन्दी सेवा• चाइना रेडियो इंटरनेशनल
China Radio International
चीन की खबरें
विश्व समाचार
  आर्थिक समाचार
  संस्कृति
  विज्ञान व तकनीक
  खेल
  समाज

कारोबार-व्यापार

खेल और खिलाडी

चीन की अल्पसंख्यक जाति

विज्ञान, शिक्षा व स्वास्थ्य

सांस्कृतिक जीवन
(GMT+08:00) 2005-03-21 12:02:25    
चीन विश्व की विरासतों के संरक्षण को महत्व देता है

cri
चीन एक विशाल देश है।इस का इतिहास बहुत पुराना है। इसलिए यहां अनेक मूल्यवान विरासतें व सुन्दर प्राकृतिक स्थल हैं। चीन के प्राचीन शहर कगाओ गो ली और उसके वास्तुओं के 28वें विश्व विरासत सम्मेलन में विश्व विरासत सूची में शामिल होने के बाद चीन की विश्व विरासतों की संख्या 30 तक पहुंच गयी है। इस दृष्टि से चीन विश्व में तीसरे स्थान पर आ गया है। इन विरासतों प्रबंधन व संरक्षण लोगों को आकर्षित करता है ।

पेइचिंग के प्राचीन प्रासाद जैसी चीन की विश्व विरासतों की रक्षा के काम को भी इधर मजबूती दी जा रही है। संरक्षण पर ज्यादा पूंजी लगाने और संबंधित कानून के निर्माण को गति देने के साथ नयी तकनीक का भी विश्व विरासतों के संरक्षण व जीर्णोद्धार में प्रयोग किया जा रहा है । विश्व विख्यात प्राचीन प्रासाद की हर काष्ठ सामग्री और सांस्कृतिक अवशेष की संबंधित सूचनाओं को नवीनतम फोटो तकनीक से रिकॉर्ड करने के बाद एक पूर्ण सूचना व्यवस्था में शामिल किया गया है।

प्राचीन प्रासाद के अलावा, चीन में अन्य कई विश्व विरासतों के संरक्षण में आधुनिक तकनीक का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग किया जा रहा है। दक्षिण-पश्चिमी चीन के सी छ्वुआन प्रांत में स्थित ल शान पर्वत की महाबुद्ध मूर्ति विश्व की सब से बड़ी बुद्ध मूर्ति मानी जाती है। इस की ऊंचाई कोई 71 मीटर है । सैकड़ों वर्षों से हवा-वर्षा से इसे खासी क्षति पहुंची है । इस के कई बार के जीर्णोद्धार के भी नतीजे अच्छे नहीं निकले हैं। इधर के वर्षों में विशेषज्ञों ने पराध्वनि किरणों के जरिए इसका सूक्ष्म विश्लेषण करने और अन्य वैज्ञानिक व तकनीकी तरीकों से इस मूर्ति की जांच की और इस के जीर्णोद्धार के लिए पर्याप्त सूचना जुटाई।

विश्व विख्यात तुन ह्वांग की मो गाओ गुफ़ा के लिए डिजिटल तुन ह्वांग की विचार धारा पेश की गयी, जिसमें प्रगतिशील कम्प्यूटर चित्रों की तकनीक के जरिए हर कोने से मो गाओ गुफ़ा की सारी स्थिति का अनुसंधान कर संरक्षण किया जा सकता है ।

उत्तर-पश्चिमी चीन के शान शी प्रांत की विश्व विरासत छिन राजवंश की सैन्य मृदामूर्ति की रक्षा में विशेषज्ञों ने सैन्य मूर्तियों के रंग का विश्लेषण किया और संबंधित संरक्षण सुझाव पेश किया , जिसे कारगर उपलब्बधि हासिल हुई।

इधर के वर्षों में चीन ने विश्व विरासतों की संबंधित जानकारी व महत्व के प्रसार-प्रचार को मजबूती दी। इस से आम नागरिकों की सांस्कृतिक विरासतों की रक्षा के विचार पर ज़ोर दिया गया। पश्चिमी शान शी प्रांत की मेई श्येन कांउंटी में कई किसानों ने खेती का काम करते समय जमीन में तीन हज़ार वर्ष पुराने मूल्यवान अवशेष प्राप्त किये और शीघ्र ही उन्हें स्थानीय सांस्कृतिक अवशेष ब्यूरो को सौंप दिया। इससे चीनी नागरिकों का सांस्कृतिक अवशेषों की रक्षा का विचार जाहिर होता है।

विश्व विरासत सूची में चीन की विरासतों के साल ब साल ज्यादा होते जाने के चलते चीनी सांस्कृतिक अवशेष जगत ने यह सहमति प्राप्त की है कि विश्व विरासत परियोजनाओं को विश्व विरासत सूची में शामिल किया जाना विरासतों और सांस्कृतिक दृश्यों की रक्षा तथा प्राकृतिक दृश्यो की रक्षा संबंधी कार्यों को एक प्रकार की प्रेरणा देता है। हमें इन सांस्कृतिक व प्राकृतिक विरासतों की अच्छी तरह रक्षा करनी चाहिए। चीनी राष्ट्रीय सांस्कृतिक अवेशष ब्यूरो के विश्व विरासत प्रबंधन विभाग के निदेशक श्री क्वो जान ने कहा

"विश्व विरासत सूची में शामिल चीनी विरासतों की संख्या कम होने से एक हद तक हमारे संबंधित रक्षा कार्य में बाधा पड़ी । लेकिन हमारा ध्यान अब विश्व विरासत सूची में अपनी विरासतों की संख्या की वृद्धि पर नहीं जाना चाहिए, बल्कि अब हमें विश्व विरासत की तैयारी की सूची तैयार करते हुए विश्व विरासतों की रक्षा व प्रबंधन के स्तर को उन्नत करने की कोशिश करनी चाहिए । हमारा विचार है कि विश्व विरासत की विचारधारा व उपाय से प्रेरित शक्ति के आधार पर चीन का विश्व विरासतों की रक्षा का कार्य और आगे बढ़ेगा।"

श्री क्वो जान के अनुसार,देश के सांस्कृतिक अवशेषों और प्राकृतिक दृश्यों का विश्व विरासत सूची में शामिल होना गौरव की बात है । लेकिन हमारा मूल उद्देश्य अपनी विरासतों के संरक्षण कार्य को अच्छी तरह करना होना चाहिए।