• हिन्दी सेवा• चाइना रेडियो इंटरनेशनल
China Radio International Thursday   Apr 3th   2025  
चीन की खबरें
विश्व समाचार
  आर्थिक समाचार
  संस्कृति
  विज्ञान व तकनीक
  खेल
  समाज

कारोबार-व्यापार

खेल और खिलाडी

चीन की अल्पसंख्यक जाति

विज्ञान, शिक्षा व स्वास्थ्य

सांस्कृतिक जीवन
(GMT+08:00) 2005-03-18 14:31:26    
मिङ छिङ काल की संस्कृति

cri

मिङ और छिङ राजवंशों के काल में विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्रों में अनेकानेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां देखने को मिलीं। महान औषध वैज्ञानिक ली शिचन ने पन छाओ काड़ मू ( औषधकोष ) लिखा, जिस में 1800 से अधिक प्रकार की जड़ी बूटियों और 11000 से अधिक नुसखों की जानकारी दी गई थी। बाद में इस का चीनी से अंग्रेजी , फ्रांसीसी, जर्मन , जापानी, लैटिन, कोरियाई और अन्य भाषाओं में अनुवाद किया गया।

मिङ राजवंश के अन्तिम काल के वैज्ञानिक सुङ इङशिङ ने चीन के कृषि और दस्तकारी के अनुभवों का निचोङ निकालते हुए थ्येन कुङ खाए ऊ नामक पुस्तक लिखी, जो उस जमाने के विज्ञान और तकनालीजी के स्तर को प्रतिबिम्बित करती है।

 लगभग इसी काल में श्वी हुङचू नामक एक भूगोलज्ञ ने पहाड़ों व नदियों का सर्वेक्षण करने के लिए पूरे देश की यात्रा की और श्वी श्याखो की यात्रा नामक एक किताब लिखी, जिस में उसने अन्य बातों के अलावा दक्षिणपश्चिमी चीन में पानी द्वारा चूनापत्थर के कटाव से बनी भूमि की रूपरेखा का सविस्तार वर्णन किया।

मिङ काल के प्रगतिशील विचारकों में से एक ली चि ने हजारों साल से चले आए सामन्ती आचार शास्त्र की तीव्र आलोचना की और महिलाओं के प्रति भेदभाव का जोरदार विरोध किया।

मिङ छिङ काल के विचारक वाङ फूचि ने यह सिद्वान्त प्रतिपादित किया कि यह विश्व भौतिक तत्वों से बना है और देवी देवताओं द्वारा उस की रचना नहीं की गई है। उन का मत था कि चेतना की उत्पत्ति भौतिक तत्व से हुई है और भौतिक तत्व के बिना चेतना का अस्तित्व असम्भव है।

 वे ऐतिहासिक प्रगतिवाद के पक्षधर और पुरातन की ओर लौटने के विरोधी थे। उसी काल में एक और प्रगतिशील विचारक ह्वाङ चुङशी हुए, जिन्होंने पतनशील व सडी गली सामन्ती तानाशाही व्यवस्था का पर्दाफाश व विरोध किया और बताया कि यह व्यवस्था ही विश्व में अशान्ति व अव्यवस्था की जड थी। इन विचारकों का न्यूनाधिक प्रभाव बाद की पूंजीवादी जनवादी क्रान्ति पर पड़ा।

साहित्य के क्षेत्र में, मिङ छिङ काल अनेक श्रेष्ठ उपन्यासों की रचना के लिए प्रसिद्ध है, जिन में ल्वो क्वानचुङ द्वारा रचित तीन राज्यों की वीरगाथा, शि नाएआन द्वारा रचित कछार के विद्रोही, ऊ छङअन द्वारा रचित पश्चिम की तीर्थयात्रा और छाओ श्वेछिन द्वारा रचित लाल भवन का स्वप्न विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

इस उपन्यास में तीन मुख्य पात्रों च्या पाओय्वी, लिन ताएय्वी और श्वे पाओछाए के प्रेम और विवाह तथा उन की त्रासदी का वर्णन करते हुए चीन के एक तत्कालीन सामन्ती अभिजात परिवार के उत्थान व पतन को दर्शाया गया है और सामन्ती समाज की सड़ांध व भ्रष्टाचारिता को अनावृत किया गया है।

इनके अलावा फू सुङलिङ द्वारा रचित ल्याओचाए सदन की विचित्र कथाएं शीर्षक लघुकथा संग्रह और ऊ चिङचि द्वारा रचित विद्वान नामक व्यंग्यपूर्ण उपन्यास को भी अपनी साहित्यिक श्रेष्ठता के लिए प्रसिद्धि प्राप्त हुई।

 नाटकों में थाङ श्येनचू द्वारा रचित चंद्रपुष्प मण्डप, हुङ शङ द्वारा रचित शाश्वत यौवन का महल और खुङ शाङरन द्वारा रचित आड़ू के फूलों वाला पंखा विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

Post Your Comments

Your Name:

E-mail:

Comments:

© China Radio International.CRI. All Rights Reserved.
16A Shijingshan Road, Beijing, China. 100040