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(GMT+08:00) 2005-03-04 14:52:29    
बहुजातीय चीन के एकीकरण को सुदृढ बनाना

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छिङ राजवंश के प्रारम्भिक काल में ऐसे मुद्रागृह पहली बार कायम किए गए जो अपने ग्राहकों को पैसा जमा करने व निकालने और ऋण लेने की सुविधा प्रदान करते थे। लेकिन इस सब के बावजूद सामन्ती व्यवस्था पूंजीवाद के विकास को रोके हुए थी। छिङ सरकार अपनी वाणिज्य विरोधी नीति पर हठपूर्वक कायम थी। उस ने बारम्बार आदेश जारी कर नागरिकों द्वारा खान खुदाई पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। और तो और , उस ने निजी कारखानों में करघों की संख्या भी सीमित कर दी थी।

व्यापारियों पर लगाए गए टैक्सों का बोझ इतना ज्यादा था कि बहुत से व्यापारियों को दिवालिया हो जाने के कारण अपनी दुकानें बन्द कर देनी पड़ीं। जाहिर है, इन परिस्थितियों में पूंजीवाद का विकास नहीं हो सकता था। सारे देश में अब भी आत्मनिर्भर और प्राकृतिक अर्थव्यवस्था की ही प्रधानता थी।

चीन की धरती पर बस ने वाली तमाम जातियों के लोगों ने अपनी मातृभूमि की महान संस्कृति का सृजन और विकास किया। छिङ राजवंशकाल में चीन की सीमा के अन्दर 50 से अधिक जातियां, जिनमें हान जाति के लोगों की संख्या अन्य जातियों से कहीं अधिक थी, साथ साथ रहने लगी थीं और उन के आपसी सम्बन्ध पहले से कहीं ज्यादा घनिष्ठ हो गए थे।

छिङ सरकार ने राजोधानी में अल्पसंख्यक जातियों के मामलों की समिति की स्थापना की, जो विशेष रूप से उन सीमावर्ती इलाकों के प्रशासन के लिए जिम्मेदार थी जहां अल्पसंख्यक जातियां सघन रूप से बसी हुई थीं। इन इलाकों के सैनिक और प्रशासनिक मामलों को निपटाने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा समय समय पर वहां सैन्य अधिकारी व मंत्री भी भेजे जाते थे।

17 वीं सदी के अन्त में छिङ सरकार ने मंगोलिया पठार की मरूभूमि के पश्चिम में चुङकार मंगोल जाति के इलाके में तीन बार अपनी फौजें भेजकर वहां के विद्रोह को शान्त कर दिया। सम्राट छ्येनलुङ के शासनकाल में उसने उइगूर जाति के प्रतिक्रियावादी अभिजात वर्ग के विरोध का भी सफलतापूर्वक अन्त कर दिया और शिनच्याङ के इलाके का एकीकरण किया।

ईली में सैन्य जनरल का दफ्तर कायम किया गया और उस के अधिकार क्षेत्र में थ्येनशान पर्वतश्रंखला के उत्तर और दक्षिण के सारे इलाकें सौंप दिए गए। छिङ सरकार ने शिनच्याङ के विभिन्न स्थानों में भी अपनी सेना तैनात कर दी और इस प्रकार चीन की उत्तरपश्चिमी सीमा सुरक्षा को मजबूत कर दिया।

छिङ सरकार का क्षेत्राधिकार तिब्बत पर भी था, जिसे उसने मिङ राजवंश से उत्तराधिकार में प्राप्त किया था। छिङ राजवंश की स्थापना के थोड़े ही समय बाद छिङ सरकार ने तिब्बत के शासकों दलाई लामा और पंचन लामा से छिङ सम्राट के प्रति निष्ठा का वचन प्राप्त कर लिया। बाद में छिङ सरकार ने तिब्बत में अपना एक आवासी मंत्री नियुक्त किया, जो केन्द्रीय सरकार का प्रतिनिधित्व करता था और दोनों लामाओं के साथ मिलकर तिब्बत के मामलों की देखभाल तथा स्थानीय अफसरों की नियुक्ति करता था। छिङ सरकार ने तिब्बत में तैनात अपने सैनिकों की संख्या भी बढ़ी दी।