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(GMT+08:00) 2005-02-01 16:37:27    
चीन की ह्वी जाति के बुजुर्ग लोक कलाकार हान युनशङ की कहानी

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84 वर्षीय ह्वी लोक कलाकार हान युनशङ की आवाज में प्रस्तुत ह्वार नाम के ह्वी जातीय लोक गीत बहुत लोकप्रिय रहा है । ह्वार नामक गीत ह्वी जाति के लोक गीत श्रृंखला का अहम भाग है , जो दसियों परम्परागत किस्मों की धुनों में गाया जा सकता है । बुजुर्ग कलाकार हान युनशङ को बीस से अधिक धुन पर विभिन्न प्रकार के ह्वार गीत गाना आता है , इस से वे स्थानीय लोगों में बहुत मशहूर हैं ।

ह्वार नाम का लोक गीत चीन की ह्वी जाति के लोगों में बहुत लोकप्रिय है , आम तौर पर गायक गायिका किसी बात से प्रभावित हो कर तत्काल ही गीत बना कर गाते हैं , इस प्रकार का लोक गीत उत्तर पश्चिम चीन के श्यान सी , कानसू और छिंगहाई प्रांतों व निनशा ह्वी जातीय स्वायत्त प्रदेश में प्रचलित है । बुजुर्ग ह्वी कलाकार हान शङयुन के पूर्वज पीढ़ियों से छिंगहाई प्रांत में रहते थे , उन के दादा ही वहां के प्रसिद्ध गायक थे । बाद में उन का परिवार स्थानांतरित हो कर शिन्चांग वेवूर स्वायत्त प्रदेश में आ बसा , वहां एक भयंकर संकट से हान शङयुन का परिवार बर्बाद हुआ और वह अनाथ बन गया । इस अतीत की बात की चर्चा में श्री हान शङयुन ने कहाः

पुरानी जमाने में मेरा पिता जमीनदार के लिए खेतीबाड़ी करता था , उस की 37 साल की उम्र में लगान देने में असमर्थ होने के कारण पिता जमीनदार द्वारा बेरहमी के साथ पीट पीट कर मारा गया और फिर माता भी जला कर मारी गई , इस तरह मैं एक अनाथ बन गया । मैं आवारा जीवन बिताता रहा । एक सर्दी के दिन दयालु दादा मा ने मुझे पनाह दिया ।

दादा मा ह्वार गीत गाने में पारंगत था , हान शङयुन ने उस से ह्वार सीखना शुरू किया , दोनों दादा पोता सड़क पर गाना गाने से जीवनयापन करने लगे । हान शङयुन की आवाज अच्छी है , और वह होशियार भी है , इसलिए उस ने अल्प समय में ही दादा मा से ह्वार गाने का हुनर सीखा और गायन में भी कुशल हो गया । वे ह्वार गीत गाने के अलावा खुद गीत के बोल भी रचते है ।

ह्वार गाने के जीवन के साथ हान शङयुन का प्रेम भी जुड़ा हुआ था , अपनी युवावस्था में हान शङयुन और एक युवती के बीच प्रेम भी आया , अपनी प्रेम की कहानी ह्वार गीत से भी जुड़ी थी , यो उन के प्रेम का दुखांत हुआ , पर अपने उस समय के प्रेम जीवन की याद हमेशा हान शङयुन के दिल में बसी हुई है , इस की चर्चा छिड़ने पर वे बहुत भावुक हुआ और चेहरे पर भी सुख दुख का मिश्रित भाव व्यक्त हो गया । वे कहते हैः

मेरी आवाज अच्छी है , लोक गीत गाने में कुशल भी है , मैं स्वयं गीत के बोल तैयार करता हूं और स्वयं गाना गाता हूं । मैं ने जो देखा है , उसे गीत के बोल बना कर गाता हूं । अठारह साल की उम्र की बात थी , एक दिन मैं यांगमोकुंङ नाम के एक स्थान से गुजर रहा था , तो मार्ग के निकट खेत में एक युवती को घास की निराई करते हुए पाया , मैं ने ह्वार का एक गीत सोच कर गाया ।

इस ह्वार गीत के बोल इस प्रकार है , चट्टान पर फुल खिला , नदी के पानी में उस की परछाई पड़ी , लाल लाल सुन्दर दिखा , धान के खेत में बहन घास की निराई में झुकी हो , देख कर भाई को बड़ी दुख हो उठी ।

हान शङयुन के गाने से वह युवती प्रभावित हुई , गीत के जवाब में वह भी गाने लगीः ऊंची चट्टान पर कड़ूवा फुल खिला , चाय सछवान में उगा , सड़क को छोड़ कर पगडंडी पर आया , बहन का ह्वार सुनो ।

इस तरह हान शङयुन और उस युवती में प्रेम की कली अंकुरित हुई , दोनों अकसर ह्वार के गीत गाते रहे । लेकिन युवती धने परिवार की लड़की थी , उन दोनों के प्रेम का लड़की के परिवार वाले घोर विरोध करते थे , वे अपनी बेटी को एक गरीब युवा के हाथ में सौप देना हरगिज नहीं चाहते थे और हान शङयुन को जेल में भी डालवाया था ।

जेल से छुटकारा पाने के बाद हान शङयुन की फिर उस युवती से कभी भी मुलाकात नहीं हो पायी । कहा जाता था कि उस युवती की भी शादी नहीं हुई , दुख और वियोग के कारण वह गंभीर रूप से बीमार पड़ी और बहुत कम समय में वह इस दुनिया से चल बसी । इस दुखांत आपबीति ने हान शङयुन के दिल पर मधुर समृत्ति के साथ अथाह गम की छाप छोड़ी थी । अपनी दुख और वियोग की भावना से छुटकारा पाने के लिए वे ह्वार के गीत गाने का सहारा लेते रहे , इस तरह ह्वार के गीत गाना उन के जीवन का एक अभिन्न भाग बन गया ।

उत्तर पश्चिमी चीन के शिन्यांग वेवूर स्वायत्त प्रदेश में बसी विभिन्न जातियों के लोगों में नाच गान का बड़ा शौक है ,खास कर वहां की अल्प संख्यक जातियों के लोग गाने नाचने में पारंगत हैं । जब वहां गया , आप को हर जगह और हर वक्त स्थानीय लोगों का नाच गान देखने और सुनने को मिल सकता है । इस माहौल में छिंगहाई से वहां जा बसे हान शङयुन को बड़ा लाभ मिला । असल में वे बहुत तेज और बुद्धिमान है और दूसरों से सीखने के शौकिन है , इसलिए उन्हों ने स्थानीय जातियों के कलाकारों और नाचगान के प्रेमियों से बहुत कुछ सीखे । उन्हों ने विभिन्न जातियों के गीत संगीत सीखने , याद करने , संगृहित करने , नया गीत लिखने तथा स्वयं गाना गाने में कोई कसूर नहीं छोड़ा , इस के आधार पर उन्हों ने अपनी विशेष शैली की गायन कला भी तैयार की , एक नई शैली का ह्वार गाना उन की आवाज में प्रस्तुत हो गया , जिस में शिन्चांग की विभिन्न जातियों की कलाओं के श्रेष्ठ तत्व निहित है ।

शिन्चांग के ह्वार गायन में वेवूर जाति की गायन कला निहित है , जिस में ताल और लय बहुत उत्साहपूर्ण और जोशिला होता है , गीत के बोल में कजाख जाति के लोक गीतों का रोमांटिक और विनोदतापूर्ण विषय भी शामिल है , इस तरह शिन्चांग के ह्वार गायन में धुन तेज और लय कम लम्बा होता है और बोल प्रबल और आकर्षक होता है । सुनिए हान शङयुन की आवाज में प्रस्तुत ह्वार का गीत तुम बुर्का हटाओ , जो वेवूर भाषा में हैः

बुजुर्ग लोक कलाकार हान शङयुन वेवूर , कजाख और तातार अनेक अल्पसंख्यक जातियों की भाषा में ह्वार के गीत गा सकते हैं , वेवूर भाषा में प्रस्तुत उन के इस गीत में अपनी प्रेमिका के प्रति प्रेमी का गहरा प्यार अभिव्यक्त होता है । गीत में प्रेमी युवा का यह मनोभाव अभिव्यक्त हुआ है कि वह नहीं चाहता है कि उस की प्रेमिका बुरका पहन कर अपने मुखड़े को ढंक देती है , क्यों कि वह प्रेमिका की बड़ी बड़ी सुन्दर आंखें देखने का जी चाहता है ।