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(GMT+08:00) 2005-01-04 16:03:28    
पेइचिंग की ह्वी जातीय आबादी बस्ती

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देश की राजधानी होने के कारण पेइचिंग शहर में हान जाति के अलावा लगभग सभी अल्प जातियों के लोग रहते हैं । पेइचिंग में आबाद ह्वी जाति के लोग काफी बड़ी संख्या में पाये जाते हैं , पेइचिंग में मुस्लिम सड़क नाम का एक मोहल्ला भी है , जहां मुस्लिम संप्रदाय का मस्जिद है और आसपास ह्वी जाति के निवासी बसे हुए हैं । इस के अलावा पेइचिंग के पश्चिमी भाग में स्थित शानलिह मोहल्ले में भी दो सौ से अधिक ह्वी परिवार रहते हैं , जिन के परिवारजन पीढियों से यहां बसे हुए हैं , उन के पड़ोस में हान और मान जातियों के लोग भी रहते हैं । लम्बे अरसे से ह्वी जाति के लोग हान और मान जातियों के लोगों के साथ मेलमिलाप के साथ रहते हैं , वे एक दूसरे का सम्मान करते हैं , एक दूसरे की मदद करते हैं और एक दूसरे से सीखते हैं । ह्वी जाति के इस मोहल्ले में जातीय एकता का माहौल व्याप्त हो रहा है । आप को कौतुहट हुई होगी कि हान और मान जातियों के लोगों के बीच ह्वी जाति के लोगों का जीवन किस तरह चल रहा है ।

सुबह का समय है , शानलिह मोहल्ले में स्थित शहर के मशहूर पार्क य्ये तान उद्यान में पेइचिंग वासी सुबह का व्यायाम करते दिखाई देते हैं , कोई नाच कर रहे है , कोई चीनी परम्परागत शैली की तलवारबाजी का अभ्यास कर रहा है , कोई चीनी परम्परागत छायामुक्केबाजी का आनंद उठा रहा है , जिस से व्यायाम का एक सुन्दर चित्र सा बन जाता है । अभी आप ने जो धुन सुनी है , इस के ताल पर प्रौढ़ और बुजुर्ग महिलाओं का एक दल थिरकते हुए नाच कर रहा है । वे सभी लाल रंग के टीशर्ट पहने हुए हैं , जो सुन्दर शैली के सामुहिक नाच में बड़े आनंद के साथ झूम रही हैं । असल में इन महिलाओं का एक नृत्य दल गठित हुआ है , जिस की नेत्री श्रीमती मा शुलिन है । इस साल 56 वर्षीय मा शुलिन रिटायर हुई मजदूर है , वह सरकार से हर महीने एक हजार से अधिक य्वान का पेंशन पाती है और उस का जीवनयापन इतमीनान से चल रहा है । रिटायर होने के बाद वह रोजाना परिश्रम से तो मुक्त हुई , पर उसे रोज बिना कुछ किए जीवन बिताने की आदत भी नहीं है , तो वह रोज घर से बाहर घूमने और कसरत करने आती । शुरू शुरू में वह अकेली व्यायाम करती थी , इस से ज्यादा आनंद नहीं आया था , तो उसे आसपास की सभी रिटायर हुई महिलाओं को सामुहिक नाच का अभ्यास करने एकजुट करने की सूझ आई । श्रीमती मा की एक सखी नृत्य की कलाकार है , उसे लोगों को नाच सिखाने के लिए भी आमंत्रित किया गया । उस की इस कोशिश को पड़ोसी की महिलाओं से बड़ा समर्थन मिला । इस तरह तीस से अधिक लोगों का एक नृत्य दल गठित हो गया । वो रोज सुबह सात बजे पार्क में आती हैं और टेपरिकार्ड में बजायी गई धुन पर नाच करती हैं । श्रीमती मा शुलिन खुद ह्वी जाति की निवासी है , उस के दल में अनेक जातियों की महिलाएं शामिल हुई हैं । उस ने हमारे संवाददाता से कहाः

हमारे नृत्य दल में ह्वी जाति की महिलाओं के अलावा हान और मान जातियों की महिलाएं भी हैं , हम स्वास्थ्य लाभ के लिए नाच का अभ्यास करती हैं , हमारे नाचों में प्रौढ व वृद्ध लोगों के लिए लाभदायक डिस्को भी शामिल है और अल्प संख्यक जातियों के नाच भी है । इस गतिविधि से हमारा स्वास्थ्य लाभदायी होता है और हमारा जीवन भी रंगारंग और विविधतापूर्ण हो जाता है।

पेइचिंग के शानलिह मोहल्ले में रिहाइशी इमारतें कतारों में खड़ी नजर आती है । ऊंची ऊंची इमारतों के बीच खुली जमीन पर पेड़ पौधे और रंगबिरंगे फुल खिले हुए हैं । खुली जगहों पर सरकार द्वारा शहरी निवासियों के व्यायाम के लिए निर्मित खेल साजो सामान उपलब्ध होता है । यहां मोहल्ला निवासी कसरत कर सकते हैं और मनोरंजन भी कर सकते हैं । मोहल्ला केन्द्र में विशाल सार्वजनिक कार्यवाही स्थल भी खोला गया है , जिस में निवासियों की बैठक होती है , फिल्म दिखाई दी जाती है और प्रदर्शनी लगती है ।