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(GMT+08:00) 2004-12-09 16:28:41    
बच्चों का दुर्घटना और क्षति से बचाव

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इधर कुछ सालों से चीन में बच्चों के दुर्घटनाओं के शिकार होने और शारीरिक क्षति उठाने की खबरें सुनाई पड़ रही हैं। एक नवीनतम रिपोर्ट है कि प्राइमरी स्कूल का एक विद्यार्थी अमेरिकी फिल्म स्पाइडर मैन देखने के बाद इस फिल्म के पात्र अनुसरण करता एक इमारत से नीचे कूद पड़ा। बेशक उसे गंभीर क्षति पहुंची और उसके मां-बाप बहुत भयभीत और चिन्तित हुए। हाल के वर्षों में चीन में आर्थिक व सामाजिक विकास के चलते चीनी नागरिकों के स्वास्थ्य का स्तर बहुत उन्नत हुआ है। इस से चीनी बच्चों को होने वाले पोलियो जैसे खतरनाक संक्रामक रोगों को नियंत्रित किया जा चुका है। लेकिन आकस्मिक दुर्घटनाएं बच्चों की सब से बड़ी दुश्मन बन गई हैं। चीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के रोग नियंत्रण ब्यूरो की उप प्रधान सुश्री फंग य्वेच्वई का कहना है कि चीन में बच्चों को आकस्मिक दुर्घटनाओं से क्षति होने के मामलों में वृद्धि हो रही है, जिस पर सभी का ध्यान आकर्षित हुआ है। ऐसी दुर्घटनाओं से उनके शिकार बच्चों और उन के परिवारों को भारी नुकसान पहुंचता है। आंकड़े बताते हैं कि इस समय ऐसी आकस्मिक दुर्घटनाएं चीन में चौदह वर्ष से कम उम्र वाले बच्चों की मृत्यु का प्रथम कारण बन गई हैं और इन घटनाओं में बहुत तेज़ी से वृद्धि हो रही है। चीनी विद्वानों का पहले मानना रहा था कि बच्चों के आकस्मिक घटनाओं में फंसने का पूर्वानुमान करना कठिन है और ऐसी घटनाओं को नियंत्रित करना भी असंभव है। लेकिन आज वे मानते हैं कि ऐसी घटनाओं की समय पूर्व रोकथाम की जा सकती है और उनका नियंत्रण भी किया जा सकता है। चीनी राजधानी पेइचिंग शहर के संबंधित विभाग ने संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के समर्थन से बच्चों से जुड़ी आकस्मिक दुर्घटनाओं की जांच की। तीस परिवारों की जांच पर आधारित इस जांच की रिपोर्ट के अनुसार चीन में बच्चे जिन आकस्मिक दुर्घटनाओं के आम तौर पर शिकार होते हैं उनमें यातायात और पानी में डूबने, ऊंचाई से गिरने और पशुओं के काटने से जुड़ी घटनाएं प्रमुख हैं। इस जांच रिपोर्ट के अनुसार आज घरों में ही बच्चों के लिए कई खतरे मौजूद हैं। इन में रासायनिक पदार्थ, विषैली चीज़ें , उबला पानी, बिना जंगले की सीढ़ियां आदि शामिल हैं। खुले निर्माण स्थल, हद से ज्यादा भीड़ तथा खतरनाक खेलकूद भी उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं। जांच रिपोर्ट ने संबंधित विभागों को सजग भी किया है। पेइचिंग की महिला बाल कार्य समिति की उप प्रधान सुश्री रूंह्वा के अनुसार पेइचिंग नगरपालिका ने बच्चों को आकस्मिक दुर्घटनाओं से बचाने के लिए विशेष योजना लागू की है। इधर के वर्षों में चीनी कालेज़ों में छात्रों को आकस्मिक दुर्घटनाओं से बचाने संबंधी उपायों के प्रचार पर जोर दिया गया है। सरकार तथा शिक्षा विभागों ने भी छात्रों के अभिभावकों को अपने बच्चों की रक्षा के लिए सजग रहने को प्रोत्साहित किया है। सुश्री रूं के अनुसार ऐसी घटनाएं न केवल बच्चों की हरकतों, बल्कि उन के घरों, स्कूलों तथा उनके द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली चीज़ों से भी पैदा हो सकती हैं । इसलिये इन्हें रोकने के लिए सरकार बहुपक्षीय सहयोग संस्था स्थापित कर रही है। इसके साथ ही सरकार बच्चों को इन घटनाओं से बचाने से संबंधित कानून व नियम बनाएगी। इससे बच्चों के ऐसी आकस्मिक दुर्घटनाओं के शिकार होने पर उन्हें वैधानिक सहायता प्रदान की जा सकेगी। चीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के रोग नियंत्रण ब्यूरो की उप प्रधान सुश्री फंग य्वे च्वे के अनुसार चीन सरकार ने बच्चों को आकस्मिक घटनाओं से बचाये रखने के काम को अपनी दीर्घकालिक कार्यसूची में शामिल किया है। उन्हों ने कहा कि चीन के वर्ष 2001 से 2010 तक के लिए तय बाल विकास कार्यक्रम में बच्चों को इन घटनाओं से बचाने की धाराएं शामिल हैं। इस के लिए सिलसिलेवार अनुसंधान की ठोस कार्यवाही भी चलायी जा रही है। विश्वास है कि विभिन्न पक्षों के समान प्रयासों के जरिए चीन में बच्चों को ऐसी घटनाओं से दूर रखने में स्पष्ट उपलब्धि प्राप्त की जा सकेगी। चीन एक विकासशील देश है। बच्चों के आकस्मिक दुर्घटनाओं से बचाव से संबंधित अनुसंधान व्यवस्था का चीन में अभाव है। इसलिए इस क्षेत्र में चीन को दूसरे देशों से सीख लेनी चाहिये। इस उद्देश्य में चीन सरकार ने कुछ देशों व अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग करना शुरू किया है। चीन और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के सहयोग से कई उल्लेखनीय उपलब्धियां भी प्राप्त हुई हैं। चीन ने संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के साथ मिल कर चीन में बच्चों के आकस्मिक घटनाओं के शिकार होने के दायरे की संयुक्त जांच की। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के चीन स्थित प्रतिनिधि श्री वूमार्ड के अनुसार दूसरे देशों के अनुभवों से यही साबित हुआ है कि बच्चों को अपना शिकार बनाने वाली आकस्मिक दुर्घटनाओं की रोकथाम की जा सकती है। बीते पचास सालों में विकसित देशों में बच्चों के ऐसी घटनाओं के शिकार होने के मामले कम हुए हैं । पर यह कमी उनके आर्थिक विकास का स्वाभाविक परिणाम नहीं रही है,बल्कि विभिन्न पक्षों के संयुक्त प्रयासों से ऐसी प्रगति प्राप्त की जा सकी। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष, बच्चों को आकस्मिक दुर्घटनाओं से दूर रखने में चीन सरकार को मदद देना जारी रखेगा। नीचे आप पढ़ पाते चीन में बाल बच्चों की गुणवत्ता को उन्नत करने के बारे में कुछ जानकारियां । एक ताजा सर्वेक्षण कहता है कि चीन के 3 से 18 वर्ष की उम्र वाले बच्चों में से आधे , या तो दूसरों के साथ सहयोग करने में असमर्थ हैं , या श्रम से प्रेम नहीं करते हैं , या मनोवैज्ञानिक तौर पर हद से ज्यादा कमजोर हैं । इसी स्थिति को देखते हुए चीन के राष्टीय महिला संघ और चीनी शिक्षा मंत्रालय ने देश के बच्चों के नैतिक बल को उन्नत करने के लिये गत फरवरी से चीनी लघु नागरिक नैतिकता निर्माण योजना शुरू की । चीन में एक परिवार में एक ही बच्चा होने की व्यवस्था है । इसलिये वर्तमान में भी चीनी शहरों के अधिकांश परिवार इकलौती संतान वाले नजर आते हैं । ऐसे इक्लौते बच्चों को अपने माता पिता के अतिरिक्त , दादा दादी , नाना नानी भी हैं , यानी सब परिवार के सभी सदस्य इस अकेले बच्चे को प्रेम करते हैं । लेकिन हद से ज्यादा प्रेम से बच्चों के प्रशिक्षण के लिये बाथक बन जाता है , कारण यह है कि वे ये स्वयं को दुनिया का केंद्र मानने लगते हैं , और दूसरों पर ध्यान नहीं देते । इस नैतिक मनोवैज्ञानिक समस्या के समाधान के लिये चीन के प्राइमरी स्कूलों में नैतिक कक्षाएं खोली गयीं , और अब लघु नागरिक नैतिकता निर्माण जैसी योजना लागू की गयी । इन सब का लक्ष्य चीनी बच्चों को बुनियादी सामाजिक मल्यों में दीक्षित करना व जिम्मेदारी का भाव पैदा करना है । चीनी महिला संघ की उपाध्यक्षा सुश्री गू श्यू ल्यैन ने कहा कि चीन की लघु नागरिक नैतिकता निर्माण योजना का देश जनता से बहुत लोकप्रिय है , और इस का लक्ष्य चीनी बच्चों की नैतिक गुणवता को उन्नत करना और उन्हें उदार विचारधारा कायम करना है । इस योजना का नारा है - घर में माता पिता के लघु सहायक बनें , स्कूल में सहपाठियों के मित्र बनें , समाज में दूसरों की मदद करने वाले हों तथा जीवन में पर्यावरण के लघु रक्षक । चीन की लघु नागरिक नैतिकता निर्माण योजना ने अनेक बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के विचार को भी जन्म दिया है । और अब वे अपने आप पास के बूजुर्गों तक यह विचार पहुंचा रहे हैं । दस वर्षीय ली छंग युवन इस से ही अपने पिता को यह सुझा पाया कि वे अपने रेस्ट्रां के ग्राहकों को एक बार इस्तेमाल लाये जा चुके चोप्सटिक्स का प्रयोग न करने दें । इस साल पहली जून को अंतर्राष्टीय बाल दिवस पर पेइजिंग के प्राइमरी स्कूल के विद्यार्थियों ने सड़कों पर सौ से अधिक स्टेशन रखे और लोगों को लघु नागरिक नैतिकता निर्माण योजना का प्रसार किया ।

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