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पहली अगस्त, चीनी जन मुक्ति सेना की 77वीं वर्षगांठ है । चीनी जन मुक्ति सेना की स्थापना वर्ष 1927 में हुई । वर्ष 1927 की पहली अगस्त को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाले सशस्त्र दल ने क्व मिंग पार्टी के क्रूर शासन के विरुद्ध नान छांग शहर में विद्रोह शुरू किया। इस के साथ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाले सशस्त्र दल ने क्रांति के एक नये युग में प्रवेश किया और चीन में नयी किस्म की सेना ने जन्म लिया। वर्ष 1933 के जुलाई माह में चीनी सोवियत गणराज्य की अंतरिम सरकार ने तय किया कि हर वर्ष की पहली अगस्त को चीनी लाल सेना की स्थापना की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाये। तभी से यह दिन चीनी जन मुक्ति सेना का स्थापना दिवस बन गया ।
सुनिए चीनी सैन्य गायक ल्यू बिंग द्वारा गाए गए कई सैन्य गीत । "हम जवान सैनिक हैं" उन में से एक है ।
गीत का भावार्थ कुछ इस प्रकार है।
हम जवान सैनिक हैं, नहीं हैं दूसरों की तरह
हम हैं जवान सैनिक, पहनते हैं सादी वर्दी
हम जवान सैनिक हैं दूसरों की तरह नहीं
हम जवान सैनिक हैं अपने जन्मस्थान,माता-पिता से दूर
हम जवान सैनिक दूसरों की तरह नहीं
हम अपनी जवानी मातृभूमि की रक्षा पर गुजारते हैं
हम जवान सैनिक देश की सीमा पर गश्त लगाते हैं
मातृभूमि की शांति और जनता के सुख के लिए
हम हथियार पकड़कर ख़ड़े रहते हैं सीमा-चौकी पर
हम जवान सैनिक दूसरों की तरह नहीं हैं
चीनी मुक्ति सेना की गुणगान करने वाले गायकों की इधर एक पूरी पांत उभरी । ल्यू बिंग उन्हीं में से एक हैं । अभी आप ने जो गीत सुना, ल्यू बिंग ने उसे सबसे पहली बार गाया ही नहीं, उस की धुन भी खुद रची। यह गीत देश के सभी टी.वी. स्टेशनों से प्रसारित किए जाने के बाद खासा लोकप्रिय हुआ है और इसके साथ ल्यू बिंग भी चीन भर में मशहूर हो गये । अब सुनिए एक और गीत। नाम है "आड़ू का फूल खिलने की जगह " । गीत में चीनी सैनिक अपने जन्मस्थान की याद करता उस का गुणगान कर रहा है।
गीत का भावार्थ कुछ इस प्रकार है
आड़ू का फूल खिलने की जगह है
मेरी प्यारी जन्मभूमि
आड़ू की छाया लहराती है स्वच्छ पानी में
मेरा गांव है आड़ू के जंगल के बीच
ओ मेरी जन्मभूमि
जहां मैं पल-बढ़ा
मैं गश्त लगा रहा होऊं कहीं भी
तुम्हारी याद सताती है मुझे
आड़ू का फूल खिलने की जगह है
मेरी मनमोहक जन्मभूमि
आड़ू के बगीचे में है बच्चों की मुस्कराहट
आड़ू के फूलों से होता है लड़की का चेहरा लाल
ओ, मेरी जन्मभूमि ,
कितनी यादगार जगह है
मैं सीमा-चौकी पर गश्त लगाता हूँ
तुम्हारी सुन्दरता की रक्षा के लिए
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