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(GMT+08:00) 2004-08-04 18:02:43    
चीनी संगीतकार वांग लो बिंग और उन के उत्तर पश्चिमी चीन का प्यार

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चीनी संगीतकार वांग लो बिंग हालांकि कुछ समय पूर्व दुनिया से विदा ले चुके हैं तो भी चीन में उनका नाम पहले की ही तरह मशहूर हैं। उनके द्वारा रचे गए अधिकतर गीत अब भी बड़े लोकप्रिय हैं।वांग लो बिंग की अनेक रचनाएं उत्तर-पश्चिमी चीन के लोकसंगीत से प्रेरित रहीं और आज तक लोगों की जुबान पर हैं।

चीन के उत्तर-पश्चिमी भाग में वांग लो बिंग ने आधी शताब्दी गुजारी। वहां उन्होंने कोई 7 सौ से ज्यादा लोकगीतों को नया रूप दिया और उनमें से अधिकतर अब भी चीन में लोकप्रिय हैं । आप सुनेगें उन के ऐस गीतों में एक । नाम है

वांग लो बिन वर्ष 1949 में उत्तर-पश्चिमी चीन के शिंग च्यांग गये। उन्होंने वहां के अधिकांश लोकगीत इकट्ठे कर उन्हें चीनी में बदला। इस से इन गीतों को शिंग च्यांग के बाहर समूचे चीन में गाया जाने लगा।

"माईला"एक कज़ाख लोकगीत है । गीत में माईला नामक कजाख लड़की के मधुर गायन का वर्णन है।

गीत के बोल इस प्रकार हैं

माईला नाम से मैं लोगों में हूं मशहूर ,

हूं गाने की शौकीन

निपुण हूं तंबूरा बजाने में,

लोगों का प्यार हूं दिल में समाये

मैं हूं माईला ,

रूमाल पर गुलाबी फूल कढ़ा है ,

कजाख युवक हैं दीवाने मेरे ,

आतुर हैं मेरे घर आने को

माईला, ओ , माईला ,

मेरा गाना है बेजोड़

माईला, ओ, माईला ,

मेरा प्यार है अनमोल

"अलामुहान" शिंग च्यांग की उइगुर जाति का एक मशहूर लोकगीत है। इस गीत में 1940 के दशक में वांग लो बिन ने सुधार किया। अलामुहान नाम की एक लड़की के नाम पर अब सुन्दर शिंग च्यांग की एक सड़क का नाम रखा गया है। इस गीत में हल्की धुन पर आलामुहान की सुन्दरता गाई गयी है।

गीत कहता है  

कौन है आलामुहान 

है वह बहुत सुन्दर लड़की

आलामुहान है कैसी

उस की बड़ी-बड़ी भौंहें हैं

अर्धचंद्र जैसी

कमर है विलो की तरह छरहरी

होंठ हैं छोटे और मधुर

देख कर उस की आंखें धड़कता है दिल

आलामुहान रहती है कहां

तुर्फ़ान के पश्चिम में

तीन सौ 60 मील दूर

आधी शताब्दी शिंग च्यांग में बिताने वाले वांग लो बिन पर वहां की विभिन्न जातियों के रीति-रिवाज़ों, जीवन के प्रति उन की आशा भरी दृष्टि तथा उन के जोशीले नाच-गान ने बड़ा असर डाला। इसीलिए उन के गीतों में हर्ष की भावना से भरे और जोशीले हैं । उन्हें चीनी लोगों की मान्यता भी इसी के चलते हासिल हुई । सुनिए वांग लो बिंग का एक और गीत । नाम है "युवा धुन"

गीत का भावार्थ कुछ इस प्रकार है

सूरज अब डूब रहा है

कल फिर निकलेगा

इस साल मुरझाते फूल

खिलेंगे फिर अगले वर्ष

मेरी जवानी चिड़िया की तरह

उड़ कर वापस नहीं आयेगी

फिर नहीं लौटेगी कभी

सूरज डूब रहा है अब

उगेगा कल फिर