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चीनी संगीतकार वांग लो बिंग हालांकि कुछ समय पूर्व दुनिया से विदा ले चुके हैं तो भी चीन में उनका नाम पहले की ही तरह मशहूर हैं। उनके द्वारा रचे गए अधिकतर गीत अब भी बड़े लोकप्रिय हैं।वांग लो बिंग की अनेक रचनाएं उत्तर-पश्चिमी चीन के लोकसंगीत से प्रेरित रहीं और आज तक लोगों की जुबान पर हैं। आज के कार्यक्रम में मैं आप को वांग लो बिंग द्वारा रचे गए गीतों का परिचय दूंगी। आशा है आप को पसंद आयेंगे ये गीत। आइए पहले सुनिए "दूर रहती है एक लड़की" नामक यह गीत।
गीत कहता है
दूर रहती है एक लड़की
लोग गुजरते हैं उस के घर से
देखना चाहते हैं उसे
लाल सूरज की तरह
खूबसूरत उसका चेहरा
पवित्र चांदनी जैसी
उस की प्यारी आंखें
मैं रहना चाहता हूं
उस के साथ हमेशा
हर रोज़ देखना चाहता हूं
उस का हंसता चेहरा
उस के सुन्दर कपड़े
रहना चाहता हूं
उस के पास एक भेड़ बन कर
उस का कोड़ा
मेरे शरीर पर
करे कोमल वार
यही चाहत है मेरी
गीत "दूर रहती है एक लड़की"उत्तर- पश्चिमी चीन में रहने वाली उइगुर जाति का लोकगीत है । लंबे समय तक यह उत्तर- पश्चिम के लोकगीत के रूप में गाया जाता रहा और वर्ष 1993 में 20वीं सदी के क्लासिक गीतों में शामिल किया गया तो वांग लो बिंग चीन भर में प्रसिद्ध हो गये।
" दूर रहती है एक लड़की " को वांग लो बिंग का खुद का प्रेम गीत भी माना जाता है। वर्ष 1939 के वसंत में तब के मशहूर चीनी फिल्म निर्देशक जन जून ली ने एक फिल्म की शूटिंग के लिए पश्चिमी चीन के छिंग हाई प्रांत पहुंचे तो वांग लो बिंग को भी वहां आमंत्रित किया। एक स्थानीय तिब्बती युवती जो मा ने फिल्म में एक चरवाहिन का अभिनय कर रही थी और वांग लो बिंग उस के सहायक की भूमिका निभा रहे थे। शूटिंग के दौरान एक बार इस सुन्दर लड़की को कोड़े से वांग पर हल्का सा वार करना था। दोनों के बीच भाषा एक समस्या थी तो भी वांग लो बिंग इस तिब्बती लड़की का प्यार महसूस कर सकते थे। इसी घटना पर वांग लो बिंग ने बाद में उइगुर लोकधुन के आधार पर " दूर रहती है एक लड़की "नामक यह गीत रचा जो बाजार में आते ही मशहूर हो गया और अब तक गाया जाता है।
वांग लो बिंग का जन्म वर्ष 1913 में पेइचिंग में हुआ। बचपन से ही वे पश्चिमी संगीत सीखने लगे थे और पश्चिमी संगीत के अध्ययन के लिए उन्होंने यूरोप की यात्रा भी की। वर्ष 1937 में उत्तर-पश्चिमी चीन के पहाड़ी क्षेत्र निंग शा में उन्होंने एक लोकगीत सुना। "फूल"नामक यह गीत उन्हें इतना पसंद आया कि उनकी संगीत की विचारघारा ही बदल गयी। इसके बाद वे उत्तर-पश्चिमी चीन के लोकसंगीत के सागर में डूब गये।
चीन के उत्तर-पश्चिमी भाग में वांग लो बिंग ने आधी शताब्दी गुजारी। वहां उन्हों ने कोई 700 से ज्यादा लोकगीत इकट्ठे किये। उत्तर-पश्चिमी चीन के अधिकतर लोकगीतों को उनमें सुधार कर वांग लो बिंग ने समूचे चीन में लोकप्रिय बनाया। तो आगे सुनते हैं उनके द्वारा सुधारा गया एक और गीत। नाम है"फूल और यौवन" । इस गीत का एक नाम "चार ऋतुएं" भी है। गीत में चार ऋतुओं के दृश्यों के माध्यम से एक लड़की की सच्चे प्रेम की जिज्ञासा व्यक्त की गयी है।
गीत का भावार्थ कुछ इस प्रकार है
वसंत में खिलता है डेफोडिल
खोज रही है लड़की अपने प्रेमी को
गर्मी में खिलता है अमरूद
कर रही है प्रेमी का इन्तजार
शरद में खिलता है सुगंधित ओस्मांथस
प्रेमी की गोद में धड़क रहा है लड़की का दिल
सर्दी में खिलता है बर्फीला फूल
देखिए
सफ़ेद बर्फ़ से भी ज्यादा पवित्र है लड़की का प्यार
"ता बान शहर की लड़कियां" नामक गीत से शायद आप परिचित हैं। इस कार्यक्रम में आप इसे सुन भी चुके हैं। यह गीत भी वांग लो बिन की रचना है। इस में चीन के शिंगच्यांग स्वायत्त प्रदेश के एक उइगुर लड़के की प्रेम भावना व्यक्त हुई है। पुराने जमाने में वहां शादी की विशेष रीति प्रचलित थी। इस में दुल्हन दहेज के साथ पति के घर आती थी औऱ वर और वधू दोनों पक्षों की सहमति पर एक ही परिवार की बड़ी और छोटी बहनें एक ही पुरुष के साथ शादी कर सकती थीं। यह गीत चीन में इतना मशहूर है कि लगभग सभी लोग इसे गा सकते हैं । यह वांग लो बिन का चीनी भाषा का प्रथम गीत है जो उन्होंने किसी उइगुर गीत से प्रेरित होकर रचा। वर्ष 1939 में शिंग च्यांग में आयोजित एक समारोह में वांग लो बिन ने एक उइगुर ड्राइवर से यह गाना सुना जो उन्हें बहुत अच्छा लगा । उन्होंने गीत की धुन याद कर ली और अपने उइगुर दोस्त से उस का अर्थ पूछा। इस तरह उस "ता बान शहर की लड़कियां" नामक गीत की रचना हुई जो दशकों से चीनी लोगों की जुबान पर है।
गीत कहता है
बहुत समतल है
ता बान शहर का रास्ता
फल हैं मीठे रसीले
ता बान की लड़कियां है अति सुन्दर
आंखें हैं कितनी बड़ी
ऐ लड़कियो
जब तुम्हारा मन हो शादी करने का
तो किसी दूसरे से नहीं
मेरे साथ शादी करना
दहेज के साथ अपनी बहन को लेकर आना
गाती हुई मेरे पास
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