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(GMT+08:00) 2004-06-23 17:57:57    
म्यो जाति का सुखद गांव (क्रम 2)

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ते हान गांव में म्यो जाति का परम्परागत स्वादिष्ट भोजन समाप्त होने

पर हमें उन का स्वः बनाया जलपान पेश किया गया , जिन में ले -छा नाम का चाय विशेष बताने के लायक है । म्यो जाति के परम्परागत जलपान और हलवा बनाने का लम्बा पुराना इतिहास रहा है और बनाने की कला भी उल्लेखनीय़ है , उन का जलपान स्वास्थ्य को खासा लाभ भी पहुंचा देता है । ले-छा चाय चाय के पत्तों , हल्दी तथा चावल से बनाया जाता है , पीने के समय उस में थोड़ा नमक भी डाला जाता है , जो पीने में बहुत ताजा और सुगंधित लगता है । म्यो जाति का हल्दी की मिठाई भी दूर निकट मशहूर है , तेहान गांव में श -ली दंपत्ति हल्दी की मिठाई बनाने में मशहूर है , उन की अपनी दुकान भी है। इस विशेष किस्म की मिठाई बनाने की कला पर वे कहते है कि

हलदी की मिठाई हल्दी , शुगर , मधु और पानी से बनायी गई है , खाने में वह बहुत सुगंधित और भुरभुरा लगता है , इस से जुकाम जैसे छोटी मोटी बीमारियों का चिकित्सा भी हो सकती है ।

संध्या वेला ते हान गांव का सब से उल्लास और उमंग का वक्त आया , गांव के बीच खुले स्थान पर रात्रि अलाव सभा हुई , धधकते अलाव की चारों ओर गांव के युवक युवती मधूर धुन के ताल पर नाचने लगे , उन के नाच गान में प्रेम , शानदार फसल और पूजा पाठ के विषयों की अभिव्यक्ति होती है । गांव के बुजुर्ग और बच्चे लोग भी उन का साथ देते हैं और ढोल बजारा बजाते हैं । इस उल्लासपूर्ण वातावरण से म्यो जातिके आभूषण , संगीत , नृत्य तथा रिवाजों की झलक मिलती है ।

सीधे खड़े लम्बे डंडे पर चढ़ने का खेल बहुत मजेदार है , यह म्यो जाति का एक विशेष मनोरंजन होता है । अलाव सभा में प्रदर्शन स्थल पर एक दस मीटर ऊंचा डंडा जमीन पर मजबूती से खड़ा कर दिया गया , डंडे के ऊपरी छोर को फुलों से सुसज्जित किया गया । गांव के युवक कमर में रंगीन फीता और सिर पर रूमाल बांधे दोनों हाथों पांवों से डंडे पर चढ़ता है, ऊपर के छोर पर पहुंचने के बाद वे फिर नीचे की तेज गति से सरक जाता है , कभी कभी वह म्यो जाति का लु शङ नाम का वाद्य यंत्र बजाने की विभिन्न मुद्राएं बनाते हुए कला का प्रदर्शन करता है , जो बड़ा आनंदित लगता है ।

म्यो जाति के परम्परागत वाद्य लुशङ बहुत मशहूर है । म्यो जाति का यह वाद्य यंत्र बासों के पाइपों से बनाया गया , उसे मुंह से हवा देने से बजाया जाता है , इस किस्म का वाद्य की धुन सुरीली और तरोताजा होती है । म्यो जाति के सभी युवा इसे बजाने में माहिर है ।

रात्रि अलाव सभा में सब से मजेदार कार्यक्रम प्रेम अभिव्यक्ति करने वाली गतिविधि है । म्यो जाति के लोग गीतों से अपना प्रेम जताते हैं । उन में प्रेम स्वतंत्र होता है और विवाह अपनी मर्जी से होता है । यह कहना अतियोक्ति नहीं है कि म्यो जाति के लोगों में युवक युवती का प्रेम गीत गाने से पैदा होता है । म्यो जाति के उत्सवों और समारोहों के समय युवक और युवतियां ग्रुपों में बंट कर गीत गाते हैं , वे गीतों के जरिए एक दूसरे से सवाल जवाब करते है और अपना प्रेम भाव व्यक्त करते हैं । गीत गाने की शुरूआत तो ग्रुपों में होती है , धीरे धीरे एक एक जोड़े के रूप में आ कर युवक और युवती एक दूसरे को अपना प्रेम जताते हैं और इस प्रकार अंत में वे विवाह के बंधन में बंध जाते हैं । (समाप्त)