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चीन की अल्पसंख्यक जाति

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(GMT+08:00) 2004-05-12 09:19:25    
चीन की मान जाति का इतिहास व रितिरिवाज

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        चीन की अल्प संख्यक जातियों में से एक मान जाति देश की एक काफी पुरानी जाति रही है , उस के पूर्वख न्यु चन कहलाते थे । मान जाति का शानदार इतिहास रहा है , वर्ष 1616 में मान जाति के महान नेता नुरहाछी ने विभिन्न न्यु चन शाखाओं का एकीकरण कर दिया और न्यु चन की शक्तिशाली सत्ता कायम की थी , नुरहाछी के पुत्र हुङथाईची ने गद्दी पर बैठने के बाद न्यु चन का नाम बदल कर मानजु रख दिया वर्ष 1636 में उस का नाम फिर बदल कर छिंग राज्य वश रखा गया , वर्ष 1644 में छिंग राज्य ने देश के मिन राज्य वंश का तख्ता पलट कर पूरे देश पर विजय किया और पेइचिंग में अपनी राजधानी स्थापित की , यही छिंग राज्य वंश चीन का अंतिम सामंती राज्य रहा था और वह देश पर दो सौ से अधिक सालों कर शासन करते हुए वर्ष 1911 में उलटा गया, छिंग राज्य वंश के पतन के साथ साथ चीन का सामंती राज्य काल भी पूरी तरह समाप्त हो गया ।

        मान जाति के लोग मुख्यतः देश के ल्याओ निन , हैलुंचांग , चिलिन व हपै प्रांतों में रहते हैं , इस के अलावा वे पेइचिंग , छङ तु , शीआन व हुहहोठ आदि शहरों में भी रहते हैं , उस की जन संख्या कोई 98 लाख है , इस संख्या का आधा भाग उत्तर पूर्व चीन के ल्याओनिन प्रांत में होता है , ल्याओनिन मान जाति की उत्पति का स्थान है , वहां से विकसित हो कर मान जाति कालांतर में देश के अन्य स्थानों में फैली थी ।

        मान जाति चीन की अन्य अल्पसंख्यक जातियों की भांति चीनी राष्ट्र के महा परिवार के एक सम्मानित सदस्य है , उस के संस्कृति और रिति रिवाज का अच्छी तरह संरक्षण रहा है । आगे हम आप को मान जाति के एक जन्म स्थल उत्तर पूर्वी चीन के ल्याओ निन प्रांत के सिनछङ का दौरा करने ले जाएंगे और वहां के मान जाति के कुछ रिति रिवाजों से अवगत कराएंगे ।

        सिनछङ गांव में बसे दर्जनों परिवार सभी मान जाति के हैं , यो यह एक बहुत छोटा गांव है , पर इस का इतिहास बहुत शानदार था । आज से चार सौ साल पहले छिंग राज्यवंश के संस्थापक सम्राट नुरहाछी ने शुरू में इसी स्थान को राज्य की राजधानी बनायी और वही पर छिंग राज्य का शासन शुरू किया । आज भी गांव के दक्षिण भाग में विशाल द्वार की एक ऊंची दीवार सुरक्षित खड़ी है , जिस पर पूर्वी राजधानी का अक्षर अंकित है । हां , कालांतर में सिनछङ शहर की दीवारें ढह कर खंडहर बन गई हैं , शहर का वह ऊंचा द्वार भी खस्ता हालत में है , लेकिन इस से छिंग राज्य वंश के शुरूआती इतिहास की झलक मिल सकती है । गांव में रह रहे अधिकांश निवासी तत्कालीन नगर रक्षक सेना के सैनिकों की संतानें हैं , कई सदियां गुजर चुकी है , पर उन में मान जाति की बहुत सी परम्पराएं बरकरार हो गई । उन के मकान उसी प्राचीन मानजातीय शैली में निर्मित है । गांववासी कुंग ते शान मुझे बताया कि

        मान घर के आंगन के मुख्य द्वार के सामने प्रायः दो मीटर ऊंचा एक लकड़ी का डंडा खड़ा हुआ है , जो तीन पत्थरों से बने एक शिलाधार पर लगाया गया है । यह लकड़ी का स्तंभ दिव्य माना जाता है , परम्परागत प्रथा के अनुसार इस के आगे मान जाति के महान पूरख नुरहाछी की पूजा की जाती है , कहते है कि नुरहाछी ने अपनी जिन्दगी के आरंभिक काल में जीविका के लिए रेनसन यानी एक किस्म की मूल्यवान चीनी जड़ी बूटी खोदने का काम भी किया था , इस काम में वे लकड़ी के डंडे का इस्तेमाल करते थे और खाना पकाने के लिए पत्थरों का चूल्हा भी बनाया था । उन के सम्मान में मान जाति में दिव्य डंडा खड़ा करने की परम्परा चली ।

        मान जाति में रिहाइशी मकान के आम तौर पर तीन कमरे होते हैं । पश्चिम के कमरे में घर के मालिक रहता है , पूर्वी भाग के कमरे में मेहमान बिठाए जाते है , बीच का कमरा रसोईघर है । मानजाति की संस्कृति के अनुसार पश्चिमी भाग सम्मानीय है , कमरों में मिट्टी के मचान बनाए गए हैं , जो सोने के पलंग के रूप में होते हैं , मेहमान मालिक के पश्चिमी मचान पर बैठ नहीं सकते हैं , क्योंकि वहां एक पूजनीय पवित्र काष्ट तख्ता रखी गई है , जिस पर वंश के पूरखों के नाम अंकित हैं ।

        चीन की अन्य जातियों की ही तरह मान जाति के लोग भी देश के वसंत त्यौहार के दौरान पटाखा और आतिशबाजी छोड़ते हैं , लेकिन पटाखा व आतिशबाजी छोड़ने का तरीका हान जाति से भिन्न होता है , वे पटाखों को आंगन के अन्दर खड़े एक डंडे पर बांध देते हैं और पूरखों और देवता की पूजा प्रार्थना करते हैं , पूजा का पूरा रस्म संपन्न होने पर पटाखे छोड़े जाते हैं । पटाखे छोड़े जाने के बाद चावल और सुअर मांस के टुकड़े डंडे पर रखे गए बिना ढक्कन वाले बकसे में छोड़े जाते है , उसे कौवा और मैगपाई को खिलाया जाता है , मान जाति की मान्यता के अनुसार कौवा और मैगपाई दोनों दिव्य पक्षी हैं । वे दोनों देवता की परी होती है , इसलिए मान जाति के लोग उन से बहुत प्यार करते हैं और उन का संरक्षण करते हैं ।

        अतीत में मान जाति सामान नामक धर्म मानती थी , जिस के अनुसार प्रकृति की चीजों जैसे सुर्य , चांद , पर्वत , जल , आग और पेड़ सबों में आत्मा मौजूद है , इसलिए मान जाति के लोगों में पर्यावरण और जीव जंतु की रक्षा करने की भावना है । हां आधुनिक युग में मान जाति सा मान धर्म में आस्था नहीं रखती है , पर प्रकृति से प्यार की परम्परा अब तक मान जाति में बनी रही है ।

        मान जाति की परम्परागत प्रथा के अनुसार वसंत त्यौहार की खुशी मनाने के लिए हर घर की खिड़कियों पर कागज कटाई से बनाए गए चीनी परम्परागत शैली के चित्र लगाए जाते हैं , नव वर्ष से पहले पांच दिन के अन्दर चाकू कैंची के सभी काम बन्द किए जाते है , मान जाति मानती है कि इस से साल भर शांति बनी रहेगी ,इसलिए नव वर्ष से पूर्व पांच दिल पहले ही खाने की चीजें बना कर तैयार की जाती है , उन के स्वादिष्ट खाने में पकवान ज्यो-ची , पके पकाए मांस के टुकड़े , चिकनी चावल से बनाए गए पकवान आदि शामिल है । उत्तर पूर्व चीन की सर्दियों के दिन कड़ाके का ठंड होता है , तापमान आम तौर पर शून्य से नीचे बीस डिग्री होता है , इसलिए खाने की चीजें आसानी से सुरक्षित हो सकती है ।

        त्यौहार के दौरान पूरखों की पूजा मान जाति का एक परम्परागत अनुष्ठान है , इस के अनुसार नव वर्ष की पूर्व संध्या में परिवार के सभी लोग बड़े से छोटे तक के क्रम में बारी बारी से पूरखों के स्मारक के आगे नत को जमीन पर टेक कर सलाम देते हैं , इस के बाद स्मारक पर चिटके पूरखों के नाम लिखे पुराने लाल कागज को हटा कर नया लाल कागज लगाया जाता है । हटाए गए पुराना कागज आंगन में जलाया जाता है । पूरखों की पूजा करने के समय एक विशेष किस्म का नाच प्रस्तुत किया जाता है , जिस का नाम मानसा नृत्य होता है । मान जाति की मान्यता है की मान सा नाच के माध्यम से पूरखों की आत्मा से बातचीत संभव होती है और पूरख उन की संतानों को मंगलमय और खुशहाल बना दे सकते हैं । अब पुराने ढ़ंग के मान सा नाच की जगह गांव वासियों के मिलन समारोह ले लिया है ।

        वसंत त्यौहार के दौरान मान जाति के लोग मिलने पर मुबारकबाद कहते है और कम उम्र वाले व्यक्ति बड़े वृद्धों को झुक कर नमस्कार करते हैं , जब किसी घर में मेहमान आता है , उन का सब से सम्मानीय रूप से सत्कार किया जाता है । मान जाति मानती है कि नव वर्ष के समय घर में आने वाला मेहमान उन्हें खुशकिस्मत ला सकता है