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(GMT+08:00) 2004-05-11 15:08:06    
चीन की तुंग जाति के नाच-गान का शौक

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          चीन की तुंग जाति के लोगों में अब तक अपनी पुरानी परम्पराएं और प्रथाएं बनी रही है , खास कर दक्षिण पश्चिम चीन के क्वु चो प्रांत के सीमांत क्षेत्र में बसे तुंग जाति के ग्रामीण लोग अपने स्थानों की पारिस्थितिकी और जीवन के विशेष तौर तरीका बनाए रखने में मशहूर है ।

तुंग जाति के लोग नाच गान के प्रेमी है , उन के मधुर गाना ने हमें गांव के एक दो मंजिला मकान के पास खींचा , यहां जातीय पोशाक पहने तुंग युवा युवती गीत गाते हुए जातीय विशेष की शिल्प वस्तुओं की बुनाई में मस्त हैं । बताया गया है कि उन में से बहुत से लोग तुंग जाति की परम्परागत शिल्प कला सीखने के लिए दूसरे गांवों से आए हैं । यांग शङ च्वुन नाम की एक लड़की ने हमें बताया कि हम अपनी जाति की विशेष कला सीखना चाहते हैं , खास कर हम लड़कियां गाना और कसीदारी का काम सीखना चाहती है । अब हमारे गांव की कुछ लकड़ियां भी शहरों में नौकरी करने जाती हैं । बाहर जाने से पहले हम ज्यादा से ज्यागा तुंग जाति के गीत सीखेंगी । हमारे शिक्षकों ने हमें कुछ सीखाये है , पर वह काफी नहीं है , हम और कुछ सीखने की कोशिश करेंगी ।

सुश्री यांग ने हमें बताया कि उसे तांग आन गांव में आए दो साल हो चुके है , इस दौरान बहुत से लोक गीत सीखे हैं , साथ ही थुंग जाति की परम्परागत शिल्प कला भी सीख ली है । उस की योजना है कि अपने गांव लौट कर वह गांव वासियों को लोक गीत और शिल्प कला सीखाएगी , ताकि तुंग जाति की संस्कृति पीढ़ी दर पीढ़ी विकसित हो जाए ।

दुरगम पहाड़ में स्थित होने के कारण तांग आन गांव एक गरीब गांव माना जाता है । गांव वासियों में जातीय संस्कृति की रक्षा करने की भावना उजागर करने तथा उन की गरीबी को मिटाने के लिए स्थानीय सरकार ने पर्यटन उद्योग का विकास करने का आह्वान किया। 

हमारी जङ बिंग नाम के एक पर्यटन ऐजेंसी के मेनेजर से मुलाकात हुई , इस समय वह तांग आन गांव में पारिस्थितिकी संबंधी पर्यटन उद्योग के विकास में जुटे हुए है । उन के विचार में तांग आन पारिस्थितिकी संरक्षण संबंधी पर्यटन सेवा का विकास करने वाला एक बेहतर स्थान है । वे कहते है कि

पारिस्थितिकी संबंधी पर्यटन उद्योग का तात्पर्य है यहां की मानवी संस्कृति का पर्यटन के रूप में विकास करना । अर्थात हम न केवल यहां ते प्राकृतिक सौंदर्य दिखाते है , बल्कि लोगों को एक जाति विशेष , एक विशेष जातीय संस्कृति की उत्पति , उस के विकासक्रम तथा उस की वर्तमान स्थिति से अवगत कराते हैं , साथ ही हम मानवी संसाधनों और प्राकृतिक संसाधनों के बीच उचित उपस्थिति व समन्वित विकास की खोज करेंगे । हम लोगों को यह बताना चाहते हैं कि किसी एक जाति की परम्परागत संस्कृति किस तरह बरकरार होती है और विकसित होती है ।

श्री जङ ने कहा कि तांग आन गांव की तुंग जातीय संस्कृति का संरक्षण करने के ख्याल से यहां सैर सपाट के लिए अधिक संख्या में लोगों को ले आना लाभदायी नहीं है , यहां उच्च कोटि के पर्यटन मुद्दों का विकास करना चाहिए , उदाहरण के लिए देश विदेश से जातीय संस्कृति के अध्ययन में लगे विशेषज्ञों , फोटोग्राफियों तथा चित्रकारों को बुलाया जाए ।

बेशक , तांग आन पारिस्थितिकी संग्रहालय के विकास के फलस्वरूप गांव वासियों का जीवन स्तर भी बड़ा सुधर गया और उन की आय उल्लेखनीय रूप से उन्नत हो गई । 50वर्षीय गांव वासी फान फा आन ने हमें बताया कि वर्षों पहले जब कुछ विदेशी लोग गांव का दौरा करने आए थे , लेकिन उस के परिवार के लोग घर के भीतर छिप गए , क्यों कि उन के पास अच्छे वस्त्र नहीं थे , इसलिए बाहर से आए लोगों से मिलना नहीं चाहते । लेकिन अब की स्थिति बिलकुल बदल गई है , पारिस्थितिकी संरक्षण कार्य के विकास से गांव वासियों की आय काफी बढ़ी है और उन का जीवन भी सुधरता जा रहा है । उन का कहना है कि अब उस का घर पशुपालन का काम करता है , इस से घर की आमदनी बढ़ गई है । हम ने जापानी मेहमानों का स्वागत सत्कार किया थी , उन्हें तुंग जाति का भोजन खिलाया , उन्हें बड़ा मजा आया । हम गांव वासी भी बाह्य दुनिया से परिचित हो गए , हमारी मानसिक स्थिति विकसित हो गई और हमेशा खुशी खुशी में रहते हैं और गाने का जी चाहता है ।