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बेत्तिया बिहार के मैहती हसन द्वारा भेजी गई एक अखबार की कटिंग , नुसखा एक है बेकार की उधेड़ बुन में न पड़े ।
कुछ लोग फैसला लेने में जरा भी नहीं हिचकिचाते हैं , तो कुछ लोग किसी तरह का फैसला लेने में बहुत परेशान हो उठते हैं और इसी उधेड़ बुन में अपना दिमाग खाली कर डालते हैं । परफेक्शानिस्ट और अनिश्चित लोग इसी कैटेगरी में आते हैं । ऐसे लोग कुछ भी फैसला करें , वे अपने फैसलों से संतुष्ट नहीं होते । एगर आप को मुश्किल से मुश्किल फैसला भी लेना हो , तो परेशान न हों , बल्कि सुकून से सोचें और ज्यादा से ज्यादा 15 मिनट में फैसला सुना डालें । अगर मामला ज्यादा गंभीर हो , तो दूसरों से सलाह मशविरा करने के लिए भले ही ज्यादा समय ले लें , पर अपना दिमाग को किसी भी सूरत में न खाली करें ।
नुस्खा दोः दिल का बोझ हल्का करे ।
हो सकता है, आप बरसों पुरानी किसी भावनात्मक घटना को अब भी अपने दिल का बोझ बनाए घूम रहे हों । पर अब वक्त आ गया है कि अपने दिल का बोझ हल्का कर लें । लोग अपने दिल का बोझ हल्का करने से डरते हैं कि इस से उन्हें तकलीफ होगी । पर रोज रोज की तकलीफ उठाने से तो बेहतर है कि एक बार तकलीफ उठा कर हमेशा के लिए समस्या से फुर्सत पा ली जाए । क्योंकि किसी तकलीफ देने वाली बात को दिल में रखने पर बहुत ज्यादा एनर्जी बरबाद होती है । इसलिए बीती बातें भूल जाइए और खुश रहिए ।
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