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दरंग अस्साम के श्री शकुन्तला भटराई ने हमें लिख कर कहा कि मैं आप के पुराने तथा नियमित श्रोताओं में एक हूं . मेने लिए आप से प्रसारित होने वाले सभी कार्यक्रम रोचक और ज्ञानवर्धक है । मुझे चीन का भ्रमण करने की इच्छा है , लेकिन आर्थिक दुर्बलना के कारण नहीं यह नहीं हो पा रहा है । चीन जाने को क्या क्या करना है , विशेष कर सी .आर .आई के हिन्दी विभाग को देखने है और चीन की लम्बी दीवार देखने की इच्छी है , चीन का भ्रमण मेरे लिए सपना जैसा लग रहा है । आप मुझे सी .आर .आई का भ्रमण करना का रास्ता बताये ।
गया बिहार के जावेद खान और साथियों ने आप का पत्र मिला कार्यक्रम के लिए लिखे पत्र में कहा कि आप से चीन के अंतरिक्ष प्रशिक्षण यान पर जाने वाले यात्रियों के बारे में एक रिपोर्ट सुनी , जो ज्ञानवज्ञधक रहा और पसंद आया । चीन के अंतरिक्ष कार्य का विवरण मिला और खुशी के साथ गर्व की बात भी है कि रूस व अमरीका के बाद चीन को यह सौभाग्य मिला है और सारी दुनिया को कुछ दिखाने और कुछ करने का योग्य है । शाओ थांग को धन्यावाद देते हैं कि आप दोनों ने यह जानकारी दी है ।
बीकानेर राजस्तान के भरत सौनी ने हमें लिखे संक्षिप्त पत्र में कहा कि हम आप के द्वारा प्रसारित हिन्दी कार्यक्रम बड़े चाव से सुनते हैं , खास कर संगीत कार्यक्रम तथा यहां के लोगों के रहन सहन तथा त्यौहार मनाने के बारे में जानकारी बड़ी ही रोचक लगती है । नव वर्ष के लिए आप के सभी कार्यकर्ताओं को हमारी ओर से फिर एक बार हार्दिक बधाई हो ।
वैशाली बिहार के कुमार जय वर्धन ने हमें लिख कर कहा कि मैं चाइना रेडियो इंटरनेशनल की हिन्दी सेवा का एक नियमित श्रोता हूं , समय समय पर अपनी प्रतिक्रियाएं आप तक लिख भेजता हूं , जो आप को पता है , श्रोता वाटिका का अंक तीन आप ने जो मुझे भेजा था , वह मुझे प्राप्त हो गया । श्रोता वाटिका में मेरी तस्वीर छापने के लिए मेरे तथा मेरे श्रोता संघ के सभी सदस्यों की ओर से आप सभी को बहुत बहुत धन्यावाद । पत्रिका में शाओ थांग जी का लेख दिल्ली की याद काफी अच्छा लगा । भारत और भारतीयों के बारे में उन के दिल में जो प्यार है , उन के लिए हम सभी श्रोतागण तहेदिल से उन को धन्यावाद देते हैं । इस के अलावा राकेश वास जी का लेख चीन में रहना , चीनी नीति कथा--पौधोंको लम्बा खींचा , चीन में एस.एम .एस की सेवा तथा नीलम कुमार धनबाद का लेख पत्र मित्रता का बढ़ता शौक और दीपक कुमार दास जी की कविता --झुक नहीं सकते --काफी अच्छा लगा । प्रकाशित अन्य तस्वीर भी काफी प्रशंसनीय है । पत्रिका का अगले अंक का बेसब्री से इंतजार रहेगा ।
कांगरा हिमाचल प्रदेश के पवन कुमार ने हमें लिखे पत्र में यों कहना शुरू किया है कि सर्वप्रथम आप को बहुत बहुत धन्यावाद है , जो आप ने मेरे पत्रों के उत्तर में मुझे तीन लिफाफा प्राप्त हुए हैं , जिस में पत्रिका , श्रोता वाटिका , कलैंजर , नव वर्ष कार्ड तथा चाइना कोसल चित्र वाला कार्ड है ।
इन सब में मुझे अनमोल चीज मिली है , श्रोता वाटिका का प्रथम अंक , जिस में आप सभी प्यारी प्यारी मधुर भाषी दी दी यों तथा उतने ही प्यारे व स्पष्ट हिन्दी बोलने वाले भाइयों की मुस्कराते चित्र है और इन को देखने के बाद कार्यक्रम सुनने का अलग ही मजा है । क्योंकि जब कभी कार्यक्रम में दी दी जी या भाई जी कार्यक्रम पेश करते हैं , तो उन की फोटो चेहरा सामने आ जाता है । मैं आप का बहुत ही आभारी हूं ।
आजमगढ़ उत्तर प्रदेश के अहमद फराज ने हमें लिख कर कहा कि मुझे आप के सभी कार्यक्रम पसंद आते है , सभी कार्यक्रम को सुन कर बहुत लाभ और जानकारी मिलली है । आप का पत्र मिला कार्यक्रम रोचक कार्यक्रम है , इस के अलावा आज का तिब्बत , जीवन और समाज , खेल जगत , सवाल जवाब और आप की पसंद यह सब कार्यक्रम बहुत रोचक होते हैं ।
आजमगढ़ के मुहम्मद अजमल अजहरी ने अपने पत्र में कहा कि आप को यह जान कर अत्यन्त हर्ष होगा कि हमारा श्रोता क्लब सी .आर .आई के हिन्दी कार्यक्रमों को लोगों में पहुंचाने हेतु बहुत ही मेहनत कर रहा है । आजकल आप के श्रोता संघों की संख्या मुबारकपुर में तेजी से बढ़ रही है , यह केवल हमारे श्रोता क्लब की मेहनत का फल है ।
मुबारकपुर के फरोज अख्तर अंसारी ने भी लिख कर कहा कि वर्ष 2003 सी .आर .आई के लिए अत्यन्त प्रगतिवान रहा , श्रोताओं की संख्या में वृद्धि तो तेजी से हुई हो , सब से बढ़ कर सी .आर .आई की सभाएं दो से तीन हो गई , यह हमारे लिए अत्यन्त खुशी का अवसर है
आजमगढ़ उत्तर प्रदेश के आजम रहमानी ने हमें लिख कर कहा कि मेरे अपने वक्तव्य से की सी .आर .आई के हिन्दी विभाग ही से भारत चीन मैत्री पर आधारित रिपोर्टें , खबरें एवं साप्ताहिक कार्यक्रम इत्यादि बड़ी ही गुणकारी एवं विशाल उपलब्धियों से सुना जा सकता है । सी .आर .आई के समस्त कार्यक्रमों की जितनी प्रशंसा की जाए कम है । कार्यक्रमों के संबंध में चंद एक राय प्रस्तुत है , जो है एक प्रतियोगिता का परिणाम समय सीमा समाप्त होने के एक महीने के अन्दर कर देना चाहिए । दो , नए श्रोताओं को सदैव पूरे आत्मविश्वास से लेना चाहिए और उन के उज्जवल भविष्य के प्रति मनोबल बढ़ाना चाहिए । तीन , श्रोता वाटिका में और अधिक सफा बढ़ाएं एवं उस में चीन भारत मैत्री पर आधारित लेख भी होना चाहिए । चार लगातार तीन सभाओं में से कम से कम एक सभा सुबह प्रस्तुत करना सब से अधिक अनिवार्य है और पांच कार्यक्रम को अधिक से अधिक रोमांचक बनाने के हेतु अवश्य ही दिल्ली , मुम्बई आदि शहरों से समस्त पहलुओं पर इंटरव्य व टिप्पणियां तथा समाचार करें ।
नागौर राजस्तान के भोजराज बुगालिया ने आप का पत्र मिला के लिए पत्र लिख कर कहा कि इन दिनों आप के कार्यक्रम अच्छे जा रहे है , चीन का इतिहास , आज का तिब्बत , आप की पसंद , आप का पत्र मिला , चीनी कहानी और चीन का भ्रमण आदि लाजवाब है । बुगालिया ने आगे कहा कि चीन उत्तरोतर विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है , अर्थात वह सफलता के लक्ष्य के लिए सफलता के साथ कदम बढ़ा रहा है , चीन का विकास चरम सीमा पर है , इस के हेतु चीन सरकार , चीनी जनता तथा पूरे सी .आर .आई परिवार प्रशंसा का हकदार है । श्री बुगालिया ने अपने पत्र में हमारे कार्यक्रमों के सुधार के बारे में कई सुझाव पेश किए है , जिन में से कुछ यहां प्रस्तुत है । यानी देश भर में आप संवाददाता नहीं भेज सकते , तो वहां के अपने श्रोताओं से कहें कि वे सी .आर .आई को खबर दें और आप उन से फोन कर घटना से तुरंत अवगत हो जाए . जवाबी लिफाफा भेजना कभी बंद न करें , श्रोताओं से फोन से लगातार संपर्क करें , श्रोता संसार या अन्य नाम से ऐसा कार्यक्रम आरंभ करें , जिस में श्रोताओं की रचनाएं प्रसारित करें और उन्हें प्रमाण पत्र भेजे , आदि आदि
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