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चीन की अल्पसंख्यक जाति

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सांस्कृतिक जीवन
(GMT+08:00) 2003-12-06 20:19:49    
चीन की थु जाति

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चीन की थु जाति देश की 55 अल्प संख्या जातियों में से कम जन संख्या वाली जाति है , इस समय उस की आबादी एक लाख अस्सी हजार है । वे मुख्यतः उत्तर पश्चिम चीन के छिन हाई प्रांत के उत्तर पूर्व भाग में स्थित थु जातीय स्वायत्त काउंटी में रहते हैं ।

थु जाति चीन की एक काफी प्राचीन जाति रही है , प्राचीन काल में इस जाति का नाम श्यानबे था , जो आज के उत्तर पूर्व चीन तथा उत्तर चीन के भीतरी मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश की जगह रहती थी । आज से एक हजार सात सौ साल पहले श्यान बे जाति के लोग अपने पूर्वक स्थान से चीन के उत्तर पश्चिम भाग की पीली नदी व होंगश्वे नदी के बीच उर्वर वादी में स्थानांतरित हो गए और इस सुन्दर स्थान में बस गए । उन्हों ने यहां पे-वी , पे-छी और पेचो नाम की कई शक्तिशाली राज्य सत्ता कायम की , लेकिन तीन सौ साल के शासन के बाद चीन की दूसरी जाति ने उसे खत्म कर दिया और श्यान बे जाति का पतन भी हुआ , कालांतर में उस के देश की अन्य जातियों के साथ विलय से एक नई संस्कृति व रितिरावाज वाली जाति संपन्न हुई , जो थु जाति के नाम से आज तक मशहूर होती चली आई ।

आज थु जाति के लोग छिन हाई प्रांत के जिस स्थान में रहते हैं , वह एक बहुत सुन्दर जगह है , नाम है हु-चु थु जातीय स्वायत्त काउंटी । स्वच्छ पानी वाली नदी काउंटी की विशाल भूमि को सिंचित करती है , अपार घास मैदान पर बकरी -गायों के झुंड झुंड दूर चरते नजर आए , थु चरवाहों की आवाज में मधुर गीत हवा में सुनाई देती है और उन के रंगबिरंगे तंबूओं से घी चाय की महक फैल रहा है । दूर की पहाड़ी वादी में लामा मंदिर हरे भरे पेड़ों के बीच झांकते है ।

रंगबिरंगे फुलों की जगह पले बढ़े थु जाति के लोग रंगीन वस्त्र पसंद करते हैं । विशेष कर थु जाति की युवती चमकीले रंगीन वस्त्रों के दिवाने हैं , उन के वस्त्र लाल , पीले , नीले , हरे तथा सफेद रंगों के कपड़ों से सी बुन कर बनाए गए हैं । युवतियों के शरीर पर पहने इस प्रकार के वस्त्र देखने में यो लगता है कि आकाश में इंद्रधुनष उभरे हो । इसी के कारण थु जाति की यह काउंटी इंद्रधनुष लोक के नाम से भी प्रसिद्ध हो गयी ।

थु जाति के लोग स्वभाव में खुले और मेहमाननवाज हैं , जो कोई भी उन के घर आए , परिचित हो या अजनबी , सबों का जोशीला स्वागत किया जाता है । उन की मान्यता है कि मेहमान मंगल सूचक है , वो थु जाति को शकुन लाते हैं । जब हम वहां गए , मेजबान परिवार की लड़की ने बड़े उत्साह के साथ हमारा स्वागत किया , उस ने थु जाति की भाषा में हमें तसरीफ फरमाया ।

आप लोग आदरणीय मेहमान हैं , थु जाति के घर में आप का हार्दिक स्वागत , यहां अपना घर समझ कर ठहरिए , हमारे घर में आप लोगों का थु जाति के स्वादिष्ट भोजन , सुगंधित मदिरा तथा मधुर गीत से सत्कार होगा । आशा है कि इस सुनहरे वक्त की याद हमेशा आप के साथ रहेगी ।

थु जाति के लोग संख्या तीन को शुभसूचक मानते हैं , जौ का मदिरा सर्वश्रेष्ठ पेय जल समझते हैं तथा गीत गाने से अपना भाव प्रकट करते हैं । मेहमान के स्वागत में वे दरवाजे के आगे तीन प्याला जौ का मदिरा पेश करते हैं , घर के अन्दर आने पर फिर तीन प्याला शुभसूचक मदिरा पेश , मेहमान की बिदाई के वक्त उन्हें कुशल सफर के पुनः तीन प्याला मदिरा का पेश । मदिरा पेश के साथ मेजबान गीत गाते हुए शुभकामना भी देते हैं ।

थु जाति एक गाना नाचना पसंद अल्प संख्यक जाति है , उस के आंचाओ व लुंचीछो नाम का नृत्यगान बहुत लोकप्रिय है । गर्मियों के दिन हो अथवा सर्दियों के , जब कभी खुशी का अवसर आया , तो थु जाति के लोग नाचना गाना कतई नहीं भूल जाते ।

प्रचूर प्राकृतिक संसाधन व गाढ़ा धार्मिक वातावरण एवं अनोखी रिति रिवाज मौजूद होने के फलस्वरूप थु जाति की हु चु काउंटी में पर्यटन उद्योग का तेज विकास हुआ है । काउंटी के उप प्रधान श्री वांग हाई ते ने कहा,हमारे यहां पर्यटन उद्योग के विकास के लिए तीन श्रेष्ठ स्थिति मिलती है , एक काउंटी में बहुत से प्राकृतिक सौंदर्य उपलब्ध है , यहां का पे शान पहाड़ी क्षेत्र एक लाख दस हजार हैक्टर की भूमि पर है , जहां घनी आदिम जंगल और खूबसूरत झील नदियां मिलने के कारण जल वाय दक्षिण चीन के अर्ध उष्ण कटिबद्ध प्रदेश का सरीख होता है , जिस से दक्षिण चीन की प्राकृतिक सौंदर्य का समां बनता है । दूसरी है , हमारी थु जाति की रिति रिवाज लोगों को बहुत आकर्षित करती है और तीसरी , धार्मिक संस्कृति बेहतर सुरक्षित है , यहां यो निन मंदिर , पंचपर्वत मठ तथा सुङ फान मंदिर काफी मशहूर है ।

हु चु काउंटी में हम ने शहर के उतरी उप नगरी क्षेत्र में स्थित पे शान राष्ट्रीय वन्य उद्यान का दौरा किया , इस वन्य उद्यान में देवदार पेड़ों की घनी जंगल , विविध आकृतियों में अनोखी चट्टानें देखने को उपलब्ध है , पहाड़ों और वन्यों के बीच चश्मे और नदियां कलकल करते हुए बहती है , जो लोगों को शांति और सौंदर्य बौध दिला देती है । यह वन्य पार्क देश के विश्वविख्यात हुंग शान पर्वत तथा अमे पर्वत के बराबर जगप्रसिद्ध है तथा चार ए श्रेणी का पर्यटन स्थल तय किया गया है । जल वायु और समुद्र सतह से ऊंची ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां के वन्य स्पष्टतः नीचे से ऊपर तक कई किस्मों के होते है . यह छिनहाई प्रांत में सब से अच्छे संरक्षित प्राकृतिक वन्य क्षेत्र है , जिस में नाना नस्लों के जंगली जानवर पाये जाते हैं ।

थु जाति के लोग तिब्बती बौध धर्म के अनुयायी हैं , उन के आबाद क्षेत्र में बड़ी संख्या में निर्मित लामा मंदिर इस पवित्र भूमि को और अधिक आकर्षित कर देते है । साथ ही उस ने इस के श्रेष्ठ पर्यटन उद्योग में चार चांद लगाये है । काउंटी में सुरक्षित यो निन मठ एक हजार तीन सौ साल पुराना एक मशहूर मंदिर है , इस के अलावा पंच पर्वत मंदिर , थ्येन मन मंदिर तथा पाई मा मंदिर विभिन्न विशेष वास्तु शैली में बनाए गए है , जो देखते बनते है ।

थु जाति की संस्कृति व परम्परागत प्रथा को दिखाने के लिए हु चु काउंटी में स्थानीय रिति रिवाजों पर पर्यटन सेवा , थु जातीय कसीदारी के वस्त्रों की प्रदर्शनी तथा थु जातीय नाच गान की प्रस्तुति जैसे कार्यक्रमों का विकास किया गया । इस प्रकार का पर्यटन उद्योग स्थानीय पर्यटन सेवा के विकास का सर्वश्रेष्ठ काम है , जो पूरे प्रांत में नामी है ।इस पर्यटन उद्योग के विकास से स्थानीय किसानों को अपनी आमदनी बढ़ाने का एक खासा अच्छा उपाय हासिल हुआ है . तुंग शि मिन नाम के एक थु जातीय किसान से हमें मुलाकात हुई , मिडिल स्कूल के बाद वह खेतीबाड़ी का काम करता आया है , लेकिन खेतीबाड़ी से अवकाश में वह वहां के थु जातीय रीति रिवाज प्रदर्शन पार्क में भी काम करता है , इस से उसे काफी पैसा मिलता है । वह कहती है,थु जातीय रीति रिवीज पार्क में काम करने से मुझे तीन चार य्वान की राशि मिलती है , जो खेतीबाड़ी से मिलने वाली आय से ज्यादा है । दोनों प्रकार की आय से हमारा जीवन काफी सुधर गया , हमारा रहन सहन और आवास की स्थिति पहले से कहीं अधिक बेहतर हो गई है ।

यह मधुर धुन थु जाति का एक परम्परागत लोक गीत है , इस के लहरते सुरीली लय के साथ हम मुक्त भाव से जौ का महक मदिरा पीते , थु जाति की जनता के उत्साह से प्रेरित हो कर नाचने गाने को उठे , थु जाति के इंद्रधनुषी रंगबिरंगे वस्त्रों के बीच थरकते बहते अपने को जब भूले , तो भूलते ही गए ।