
कसांगडोगी वन रक्षा काम का परिचय देते हुए अपना वन रक्षा वस्त्र पहनने में व्यस्त हैं । उन्होंने फटाफट विशेष तौर पर तैयार वन रक्षा पोषाक पहन लिया , फिर पानी के नल को खोलकर वाटर बैग में 15 किलोग्राम पानी भर कर पीठ पर लगा लिया।
जब कसांगडोगी घर के आगन से बाहर निकलने लगे, तो उन की पत्नी ने गोद में नन्हा पोता लिये आगे आकर उन्हें एक बक्स दे दिया, इस बक्स में पूरे दिन का जरूरी भोजन रखा हुआ है। कसांगडोगी ने निद्रित नन्हें पोते को देखते हुए उस के चेहरे का चूमा लिया और पत्नी को बिदाई देने हाथ हिला दिया।
हालांकि कसांगडोगी की उम्र 50 साल से ज्यादा है, पर वे फिर भी बहुत स्वस्थ व हृष्ट पुष्ट नजर आते हैं। पर्वत चढ़ने में हम से इतने तेजी से आगे बढ़े हैं कि कभी कभी हमें पीछे छोड़ देते हैं, फिर हमारा इंतजार करने के लिये उन्होंने अपनी गति धीमी कर दी। इसी बीच वे पर्वत चढ़ने के साथ साथ अपनी नजरें चारों तरफ भी दौड़ाते हैं, चिन्ता है कि कहीं सुरक्षा जोखिम से न चूक जाये ।
कसांगडोगी का घर तिब्बत की चोना कांऊटी के लेग्पो में है। यह क्षेत्र समुद्र की सतह से कोई दो हजार नौ सौ मीटर की ऊंचाई पर अवस्थित है। पूरा क्षेत्र बड़े बड़े पर्वतों और घने जंगलों से घिरा हुआ है, चरागाहों पर हरी भरी घास भी उगी हुई नजर आती हैं। लेग्पो का जंगल वर्तमान तिब्बत में सब से अच्छी तरह सुरक्षित आदिम जगलों में एक माना जाता है, अब यहां पर कोई हजार से अधिक विस्मों वाली वनस्पति पायी जाती है।
कसांगडोगी ने कहा कि लेग्पो के स्थानीय वासी पीढ़ी दर पीढ़ी इसी आदिम जगली क्षेत्र में रहने आये हैं, वे हालांकि इस आदिम जंगल के प्रति गहरा भाव रखते हैं, लेकिन जंगल संरक्षण के बारे में उन की जागृति फिर भी बहुत कमजोर है। 20 साल से पहले इस जंगल में हुए भयंकर आग्निकांड से जंगल में आग की रोकथाम करने की लोगों की चेतना जग उठी। इस की चर्चा में कसांगडोगी ने कहा:
"उस समय एक गांववासी की नजर कमजोर थी, उस ने एक जला हुआ सिगरेड पेड़ों में फेंक दिया। बाद में मैं ने जंगल में धुआं देखकर तुरंत ही टाऊनशिप सरकार को सूचित कर दिया, टाउनशिप सरकार ने फिर उपरी स्तरीय सरकार को रिपोर्ट दी । उस समय जंगल में आग इतनी भयानक थी कि लगातार बीस दिन तक जारी रही, जिस से भारी नुकसान हुआ।"
आज तक भी जब इसी आग्निकांड की चर्चा की जाती है, तो कसांगडोगी के मन में डर के मारे एकदम कम्पन उठ जाता है। हालांकि तत्कालीन संबंधित विभागों ने आग बुझाने के लिये तुरंत ही हेलिकोप्टरों व सैकड़ों फयरमैनों को भेज दिया, लेकिन वे भभकती आग बुझाने में असमर्थ थे, इस भयानक आग्निकांड से बेहिसाब आर्थिक नुकसान पहुंच गया, व्यापक स्थानीय वासी बेहद दुखी थे। कसांगडोगी ने कहा:
"आग्निकांड घटित होने के बाद सरकार ने आग बुझाने के लिये बड़ी तादाद में मानवीय व भौतिक शक्तियों को लगायीं, इस से देश व लेग्पो को भारी नुकसान हो गया है। यह एक आदिम जंगल है, आग के बाद उस की बहाली लम्बे समय की जरुरत है, लेग्पो वासी होने के नाते मुझे बहुत दुख है।"





