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    संडे की मस्ती 2014-06-29
    2014-07-02 12:32:43 cri

    अखिल- वाकई.. बहुत ही अच्छी बात बताई इस ओडियो में कि हमारा जीवन हमारी सोच पर आधारित है। मैं तो यही कहना चाहूंगा कि हमारा जीवन ख़ास तौर से हमारी सोच का ही जीवन होता है। हम जिस समय जैसा सोच लेते हैं, कम से कम कुछ समय के लिए तो हमारी जिंदगी उसी के अनुसार बन जाती है। यदि हम अच्छा सोचते हैं, तो अच्छा लगने लगता है और यदि बुरा सोचते हैं, तो बुरा लगने लगता है। दोस्तों, इस ओडियो को सुनवाने का हमारा मकसद यह बतलाना था कि आप हमेशा अपनी सोच की दिशा को सकारात्मक रखिए।

    चलिए.. मैं अब आपको एक किस्सा बताता हूं।

    पिता के मरने के बाद एक बेटा अपनी माँ को वृद्ध आश्रम यानि ओल्ड ऐज होम छोड़ के आया। कुछ सालो बाद ओल्ड ऐज होम से फ़ोन आया..तुम्हारी माँ का समय नजदीक आ गया है, वह कुछ दिनों की मेहमान है। तुम जल्दी से आ जाओ !

    बेटा माँ से मिलके भावुक होकर बोला- माँ.. तु बता मै तेरे लिए क्या करू"..?

    माँ ने बेटे से कहाः बेटा, इस कमरे में एक पंखा लगवा दे।

    बेटे ने कहा:- "इतने साल तो तुम बिना पंखे के रही, अब जब मरने वाली हो तो पंखा लगाने के लिए क्यों कह रही हो"

    माँ ने कहा:- "बेटा, मैंने तो किसी तरह गुजारा कर लिया लेकिन....जब तेरा बेटा तुझे इस कमरे में भेजेगा तो तू बिना पंखे के रह नही पायेगा...!!

    मीनू- अखिल जी.. यह वाकई टंचिंग स्टोरी है। सच में, आने वाली पीढ़ी भी वैसा करेगी जैसा आप अपने माता-पिता के साथ करते हैं। चलिए.. अभी हम सुनते हैं एक गाना..उसके बाद शुरू हो जाएगी हमारी हंसी और मस्ती की बारिश।

    (गाना-3)

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