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    टी टाइम 140520 (अनिल और ललिता)
    2014-05-21 08:53:26 cri

    अनिलः टी-टाइम के नए अंक के साथ हम फिर आ गए हैं आपका मनोरंजन करने। जी हां ... आपके साथ चटपटी बातें करेंगे और चाय की चुस्कियों के साथ लेंगे गानों का मजा, 35 मिनट के इस प्रोग्राम में। इसके साथ ही प्रोग्राम में श्रोताओं की प्रतिक्रियाएं भी होंगी शामिल। हां भूलिएगा नहीं, पूछे जाएंगे सवाल भी, तो जल्दी से हो जाइए तैयार।...

    अनिलः दोस्तो वैसे एक सप्ताह में सात दिन होते हैं, लेकिन हमें आपके लिए प्रोग्राम पेश करने का बड़ा इंतजार रहता है। तो क्या कर रहे हैं आप लोग, रेडियो सेट ऑन किया कि नहीं, अगर नहीं तो जल्दी कीजिए। क्योंकि टी-टाइम प्रोग्राम हो चुका है शुरू।

    अनिलः बताया जाता है कि सूरज पर होने वाली गतिविधियों की वज़ह से धरती पर बिजली गिरती है। जी हां, एक नए शोध में यह बात सामने आई है। वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया है कि तेज गति के सौर कणों का झोंका जब वायुमंडल में प्रवेश करता है तो बिजली बोल्ट की संख्या बढ़ जाती है।

    अब जब कि सूरज पर होने वाली गतिविधियों पर सैटेलाइट के द्वारा बारीकी से नज़र रखी जाती है इसलिए यह संभव है कि सौर कणों की ख़तरनाक आंधी के धरती के वायुमंडल से टकराए जाने का पूर्वानुमान लगाया जा सके। यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के प्रमुख शोधकर्ता डॉ क्रिस स्कॉट ने कहा, " बिजली काफ़ी ख़तरनाक होती है। हर साल 24 हज़ार लोग बिजली के आघात से मारे जाते हैं। इसलिए सौर कणों की आंधी की कोई भी पूर्व चेतावनी काफ़ी उपयोगी साबित हो सकती है। "

    सौर कणों की आंधी के धरती के वातावरण में प्रवेश करने के साथ ही उत्तरी ध्रुव पर प्रकाश फैल सकता है, लेकिन शोध बताता है कि कैसे ये मौसम को प्रभावित भी कर सकता है। सौर आंधी लगातार एक जैसी नहीं रहती, यह तेज़ और धीमी होती रहती है। क्योंकि सूरज घूमता रहता है इसलिए ये धाराएँ एक दूसरे का पीछा करती रहती है। वहीं वैज्ञानिकों ने पाया कि जब सौर कणों की आंधी की गति और प्रबलता बढ़ती है तो बिजली गिरने की दर भी बढ़ जाती है।

    ललिताः शोधकर्ता दल ने कहा कि सौर कणों के धरती के वातावरण से टकराने के बाद एक महीने तक मौसम अशांत रह सकता है। शोधकर्ताओं ने उत्तरी यूरोप के आकड़ों का इस्तेमाल करके यह पाया कि 400 दिनों में 321 बिजली गिरने की घटना की तुलना में तेज़ गति वाले सौर आंधी के बाद 400 दिनों में औसतन 422 बिजली गिरने की घटना हुई। डॉ स्कॉट के मुताबिक, यह चौंकाने वाला परिणाम था क्योंकि पहले यह सोचा गया था कि सौर आंधी में बढ़ोत्तरी का उल्टा असर होगा।

    हालांकि इसकी प्रक्रिया से संबंधी सवालों के जवाब अभी भी अधूरे हैं। लेकिन सौर कणों के पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करने से संबंधी बहुत सी जानकारियां मौजूद हैं जो सौर आंधी की भविष्यवाणी करने में मदद कर सकती हैं।

    अध्ययन के आंकड़े यूरोप में इकट्ठे किए गए हैं लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि इसका प्रभाव विश्वव्यापी होगा।

    अनिलः अब दूसरी जानकारी पर बात करते हैं.....जिस तरह विकास के बढ़ते कदम ने हमें फोन जैसी सुविधा उपलब्ध कराई, उसी प्रकार इंटरनेट के हमारे जीवन में प्रवेश करने से जिंदगी बिल्कुल बदल-सी गई है या कहें कि बहुत आसान हो गई है। इंटरनेट पर हर प्रकार की सुविधा के बाद अब इसका उपयोग फोन पर अत्यधिक किया जा रहा है।

    यदि आपके फोन में इंटरनेट की सुविधा है तो आप कभी भी और कहीं भी इसका उपयोग कर सकते हैं। वहीं फोन के लिए कई सारे महत्वपूर्ण ऐप्लिकेशन भी उपलब्ध हैं जिनमें से सब से महत्वपूर्ण व प्रचलित हैं फ्री वॉयस कॉलिंग ऐप्लिकेशन। इन फ्री वॉयस कॉलिंग ऐप्लिकेशन के माध्यम से आप बिल की चिंता किए बिना कितनी भी बातें कर सकते हैं। इन में मुफ्त कॉल के अलावा अनलिमिटेड मैसेज और वीडियो चैटिंग की भी सुविधा उपलब्ध होती है। यह फ्री वॉयस ऐप्लिकेशन विंडोज, एंड्रॉयड और आईओएस सभी फोन के लिए होते हैं।

    आज उपभोक्ताओं के बीच सबसे अधिक लोकप्रिय वाइबर है जोकि मुफ्त वॉयस कॉलिंग की सुविधा देती है।

    यह ऐप्लिकेशन आईओएस और एंड्रॉयड प्लेट फॉर्म पर कार्य करने में सक्षम है। यह पूरी तरह मुफ्त है और इसे उपयोग करना भी काफी आसान है।

    इसमें कुछ खास फीचर्स जैसे स्टीकर्स, डूडल और आकर्षक इमोटिकों सदिए गए हैं जिनका उपयोग कर आप अपनी भावनाएं आसानी से व्यक्त कर सकते हैं।

    ललिताः युवाओं के बीच वॉयस टॉक करने की आज अत्यधिक प्रचलित ऐप्लिकेशन हैंगआउट है । इसके द्वारा आप साधारण मैसेज तो कर ही सकते हैं बल्कि आप वॉयस टॉक का भी मजा ले सकते हैं।

    इस ऐप्लिकेशन की खासियत है कि इसपर आप ग्रुप वॉयस टॉक भी आसानी से कर सकते हैं। एक साथ सभी दोस्तों से फेस टू फेस बात करना तो हम सभी को पसंद है लेकिन समय की कमी व व्यस्तता के कारण मिलना बहुत ही कम होता है।

    लेकिन इस ऐप्लिकेशन का उपयोग कर आप अपने सभी दोस्तों से जब चाहें तब बात कर सकते हैं। बस जरूरी है कि आपके फोन में यह ऐप्लिकेशन डाउनलोड होनी चाहिए।

    अनिलः लेकिन दोस्तो, मोबाइल का बढ़ता इस्तेमाल हमारे स्वास्थ्य के लिए तमाम खतरे भी लेकर आया है। अगर आप दिन भर मोबाइल फोन से चिपके रहते हैं तो यह आपके दिमाग के लिए खतरे की घंटी हो सकती है।

    हाल में हुए शोध की मानें तो दिन भर में 15 घंटे से अधिक का समय मोबाइल फोन पर बिताने वाले लोगों को ब्रेन ट्यूमर का रिस्क तीन गुना अधिक होता है। फ्रांस की बोर्डेक्स यूनिवर्सिटी ने अपने शोध में माना है कि सेल्स और बिजनेस के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों से लेकर घंटों फोन पर बाते करने वाले युवाओं तक, दिमाग से जुड़े इस खतरे का रिस्क अधिक होता है।

    ललिताः शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि ब्रेन ट्यूमर के शिकार अधिकतर लोग महीने में औसतन 15 घंटों से अधिक समय मोबाइल फोन पर बात करके काटते हैं।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर कैंस ररिसर्च ने भी मोबाइल फोन से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों को कार्सिनोजेनिक होने की आशंका जताई है। हालांकि शोधकर्ता अपने इस अध्ययन को बेहद शुरुआती दौर में मान रहे हैं।

    अनिलः दोस्तो, इंसान को एक बार जिंदगी मिलती है और बचपन, जवानी आदि भी एक बार। बढ़ती उम्र के साथ-साथ हर किसी को चिंता सताने लगती है। हर कोई जवान बने रहना चाहता है। इसी से जुड़ी एक खोज सामने आई है।

    अमरीका में शोधकर्ताओं का कहना है कि संभवतः उन्होंने यह खोज की है कि बढ़ती उम्र का मुकाबला कैसे किया जाए और यहाँ तक कि बढ़ती उम्र की कुछ प्रक्रियाओं को कैसे पलटा जाए, कम से कम चूहों में तो ऐसा संभव हो सका है।

    एक अध्ययन में यह बात सामने आई कि बड़े चूहों में छोटे चूहों का रक्त इंजेक्शन द्वारा देने से उनकी मस्तिष्क क्षमता में वृद्धि हुई।

    अमरीका में स्टैनफ़र्ड विश्वविद्याल के वैज्ञानिक इस उम्मीद के साथ लोगों पर इस के परीक्षण की योजना बना रहे हैं कि इससे बुजुर्ग लोगों में मनोभ्रंस (डिमेंशिया) की बीमारी का नया उपचार खोजा जा सकेगा। ब्रिटेन में डिमेंशिया पर शोध करने वाली एक संस्था का कहना है कि इस अध्ययन से इंसानों को होने वाले लाभों के बारे में जानकारी नहीं है।

    नेचरमेडिसिन में प्रकाशित शोध के मुताबिक़ 18 महीने के चूहों को तीन महीने के चूहों से लिए गए रक्त के अंश (प्लाज्मा) के इंजेक्शन दिए गए।

    ललिताः इस के बाद चूहों का स्मृति परीक्षण किया गया। अध्ययन में यह बात सामने आई कि जिन चूहों को इंजेक्शन दिए गए थे, स्मृति परीक्षण में उन का प्रदर्शन उन के हम उम्र के अन्य चूहों से बेहतर पाया गया। शोधकर्ता कहते हैं कि युवा चूहों के रक्त में ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो बड़े चूहों के मस्तिष्क को फिर से ऊर्जावान बनाने की क्षमता रखते हैं ताकि यह भी युवा मस्तिष्क की तरह ही काम कर सके।

    उन्होंने अध्ययन के बारे में कहा कि हम काफ़ी गहराई से काम कर रहे हैं ताकि पता लगा सकें कि ऐसा होने के संभावित कारण क्या हैं और ठीक उसी प्रक्रिया से ऊतकों का निर्माण कर सकें।

    भविष्य में इंसानों पर इसके सीमित क्लीनिक्ल ट्रायल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इंसानों के बारे में भी यह सच है, ऐसी कोई जानकारी नहीं है, लेकिन इंसानों पर इसके सीमित क्लीनकल ट्रायल की योजना बन रही थी।

    अनिलः अल्ज़ाइमर रिसर्च का कहना है कि इस उपचार ने चूहों में सीखने और याद दाश्त के कुछ पहलुओं को फिर से नौजवान कर दिया है। लेकिन इंसानों में इस के महत्व की कोई जानकारी नहीं है।

    चैरिटी में शोध के निदेशक डॉक्टर एरिक कॉरेन कहते हैं, "हालांकि यह शोध काफ़ी रोचक है, लेकिन यह उस दुर्बलता की पड़ताल नहीं करता जो अल्ज़ाइमर के दौरान देखी जाती है, जो बढ़ती उम्र का एक अनिवार्य कारण नहीं है।"

    इस बीच, एक अन्य दल ने अपने शोध में बड़े चूहों को छोटे चूहों के रक्त से होने वाले फ़ायदों पर और रौशनी डाली गई है। बड़े चूहों की रक्त नलिका में सक्रियता देखी गई।

    एक शोध के दौरान बड़े चूहों की रक्त नलिका में सक्रियता देखी गई।

    ललिताः हार्वर्ड विश्वविद्यालय के एक दल मुताबिक चूहों के रक्त में मौजूद एक तत्व ने पहले हृद्य की पेशियों पर बढ़ती उम्र के असर के विपरीत लक्षण प्रदर्शित किए और मस्तिष्क की कोशिकाओं में वृद्धि की।

    साइंस में प्रकाशित शोध में पाया गया कि रक्त के तत्वों ने बड़े चूहों में मस्तिष्क कोशिकाओं की वृद्धि को प्रोत्साहित किया औऱ उनके सूंघने की शक्ति को फिर से सक्रिय बना दिया।इस शोध में यह भी पता चला कि इसी रसायन से बड़े चूहों की मांसपेशियों में मजूबती आई।

    अनिलः अब बात करते हैं कि भारतीय सेना और सेनाध्यक्ष की। जैसा कि आप जानते हैं कि भारत के ऩए सेनाध्यक्ष के नाम का ऐलान कर दिया गया है। पिछले दिनों सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह को अगला सेनाध्यक्ष नियुक्त करने की घोषणा की. दलबीर सिंह एक अगस्त से अपना कार्यभार संभालेंगे। वर्तमान सेनाध्यक्ष बिक्रम सिंह 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होंगे।

    59 वर्षीय लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह भारतीय सेना के सबसे वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल हैं। वो हरियाणा के झज्जर जिले के बिशन गांव के रहने वाले हैं।

    दलबीर सिंह रोजाना 10 किलोमीटर तक दौड़ते हैं और उन्हें घुड़सवारी का शौक है.दलबीर सिंह 1974 में गोरखा राइफल्स में शामिल हुए थे। उन्हें जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में चरमपंथ विरोधी अभियान का लंबा अनुभव रहा है।

    वो श्रीलंका में भारतीय शांति रक्षक बल के अभियान का भी हिस्सा रहे हैं।

    उनके 40 वर्षों के सेवाकाल में श्रीलंका में भारतीय शांति रक्षक बल में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है.श्रीलंका में 1987 में जब उनकी यूनिट को तैनात किया गया था तो इस यूनिट को कमांडिंग अफ़सर समेत 20 जवानों की क्षति हुई थी।

    उस समय देहरादून के सैन्य अकादमी में प्रशिक्षक के रूप में तैनात दलबीर सिंह ने स्वेच्छा से श्रीलंका जाने का प्रस्ताव दिया और 24 घंटे के अंदर वो अपनी यूनिट में पहुंच गए थे।

    गत जनवरी में लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह को वाइस चीफ़ ऑफ़ आर्मी के पद पर पदोन्नत किया गया था। मई 2012 में तत्कालीन सेनाध्यक्ष वीके सिंह ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए अपने कार्यकाल के ख़त्म होने के कुछ दिन पहले ही दलबीर सिंह की प्रोन्नति पर प्रतिबंध लगा दिया था. उनपर अपनी 'जिम्मेदारियां न पूरा करने' का आरोप था।

    हालांकि जनरल बिक्रम सिंह ने सेनाध्यक्ष बनने के एक सप्ताह के भीतर ही उन पर लगे प्रतिबंध को निरस्त कर दिया था।

    ...दोस्तो अब वक्त हो गया है लिस्नर्स के कमेंट शामिल करने का।

    टी-टाइम प्रोग्राम में पहला खत हमें भेजा है, पश्चिम बंगाल से देबशंकर चक्रवर्ती ने। लिखते हैं कि पिछला प्रोग्राम सुनते समय मैंने सबसे पहले जो गाना गुनगुनाया वह है -" खोया खोया चाँद, खुला आसमान/आँखों में सारी रात जायेगी/तुम को भी कैसे नींद आयेगी"? मुझे लगता है यह टी टाइम प्रोग्राम सिर्फ मनोरंजन का प्रोग्राम नहीं है क्योंकि आप दोनों हर प्रोग्राम में अलग-अलग टॉपिक पर जिस तरीके से हम लोगों को जानकारियां देते हैं उसकी तारीफ करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। आज की भाग-दौड़ भरी लाइफ स्टाइल में हमारे लिए नींद कितनी प्यारी,कितना मीठी होती है - इस साधारण विषय को लेकर आप दोनों ने एक असाधारण चर्चा की। हमारे बेहतर स्वास्थ्य के लिए कम से कम सात-आठ घंटे नींद कितनी अहम है, यह आपने बताया। हमारे दिमाग को तरो-ताजा करने के लिए 7-8 घंटे नींद की जरूरत होती है। हम लोग यह जानकर भी इस बारे में ध्यान नहीं देते हैं। मेरे बारे में मैं यह कहना चाहता हूं कि कभी कभी अधिक काम के चलते घर देर से लौटता हूं। और मेरा 3 साल का बेटा मेरे लौटने का इंतज़ार करता है। लेकिन इस प्रोग्राम को सुनने के बाद मैं कोशिश करूंगा हर दिन टाइम पर घर वापस लौटू। ताकि हम सभी का स्वास्थ्य अच्छा हो।

    नेक्स्ट लैटर हमें आया है, सऊदी अरब से सादिक आजमी का। लिखते हैं कि

    13 मई का" टी टाइम" सुना। इसमें शामिल सभी विषय लाजवाब थे। चाहे वह नीद की हमारे शरीर पर डालते प्रभाव की बात हो ,संसार के सबसे बड़े जीव डायनासोर , ध्रुवीय भालू या विश्व के दस मुस्लिम पर्यटक स्थलों का जिक्र । शानदार प्रस्तुति के लिए धन्यवाद। नींद की विशेषता और इसके प्रभावों पर विशेषज्ञों की राय और निष्कर्ष से यही प्रेरणा मिली की अगर तनाव मुक्त और रोग मुक्त जीवन चाहिये तो अच्छी नींद लेनी होगी।

    ध्रुवीय भालू के जीवन पर जानकारी भी रोचक थी शोधकर्ताओं की आशाएं पूरी हों और इस भालू के जीवन से सम्बन्धित हृदय रोग के लाभकारी बिन्दु पर सफल परीक्षण कर मनुष्य के इलाज मे सफलता मिले। ऐसी कामना करते हैं। वहीं मुस्लिम पर्यटक स्थलों पर दी गई जानकारी भी अच्छी लगी।

    हंसगुल्लों में अनिल जी ने प्याज़ के महत्व को फ़िल्मी डायलाग मे बोलकर हमको इतना हंसाया कि पेट मे दर्द होने लगा ।

    नेक्स्ट खत हमें भेजा है, जमशेदपुर झारखंड से एस.बी.शर्मा ने। लिखते हैं कि टाइम प्रोग्राम में एक बार फिर अनिल जी और वेइतुंग जी ने बहुत अच्छी ज्ञानवर्धक और स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां दी। वहीं अमेरिकी शोध के अनुसार चेरी का जूस पीने से अच्छी नींद आती है, यह पता लगा। वहीं यह जानकर अति दुःख हुआ की आपसी बहस से मृत्यु दर बढ़ रही है। इस भौतिकवादी युग में अपनी बात कहने अपनी बातें मनवाने के लिए और समझाने के लिए लोग बात-बात पर बहस कर बैठते है जो की ठीक नहीं है। पर आज सहनशीलता नहीं रह गई है जिसके फलस्वरूप आपसी बहस लाजमी है। जो मौत का कारण बन रहा है। तमाम जानकारी के लिए फिर एक बार धन्यवाद।

    वहीं पश्चिम बंगाल से बिधान चंद्र सान्याल ने भी मेल भेजा है, उन्होंने एक शायरी भेजी है, जिसे हम शामिल कर रहे हैं।

    शायरी इस प्रकार :- तुझमे मेरा रिश्ता क्या है मालूम तो नही मगर

    , / तेरे लिए दुआ मांगना , अच्छा लगता है / मेरे कितने पास कितने दूर है

    तू / क्या पता मगर , / मुझे तुझे धड़कनो मेँ / बसाना अच्छा लगता है / तू

    कितना अपना कितना गैर है / क्या पता मुझे ऐ अजनबी / मगर तेरा मुझसे /

    रिश्ता पूछना अच्छा लगता है / प्यार है या नफरत ये जानूं कैसे सामने /

    झगड़ना तुझसे , / फिर तुझे ही मनाना मुझे / अच्छा लगता है / तेरे उजालो को

    देख खुश होना / तेरे अंधेरॉ मेँ हाथ ना छोड़ना , मुझे / अच्छा लगता है ।

    धन्यवाद।

    दोस्तो, अब बारी है आज के प्रोग्राम में जोक्स की, हंसी मजाक या हंसगुल्ले नहीं हुए तो बात ही क्या। तो आज भी हम लेकर आए हैं आपको हंसाने के लिए कुछ हंसगुल्ले।

    पहला जोक है.......दरोगा और डाकू से जुड़ा।

    दरोगा - तुमने इतनी जल्दी आत्मसमर्पण क्यों कर दिया ?

    डाकू - क्योंकि सरदार मुझे जान से मारने पर तुला है। वह आता ही होगा। अब आप मुझे जल्दी से गिरफ्तार कर लों।

    दूसरा हंसगुल्ला कुछ इस तरह है.......एक तोता एक कार से टकरा गया, तो उस कार वाले ने उसे उठआ कर पिन्जरा मे डल दिया /दूसरे दिन जब तोते को होश आया, वह बोला,आईला! जेल,कार वाला मर गया क़्या।

    तीसरा जोक है.......जज और नौजवान

    जज - अच्छा तो इस व्यक्ति ने तुमे कैसी गालियां दी।

    नौजवान -हजूर वह सब गालिया शरीफों के सामने बयान करने योग्य नही है।

    वकील -अच्छा तो हम सब यहा से चले जाते है। तुम जज साहब को अकेले सुना दो।

    दोस्तो, अगर आपके पास भी कुछ जोक्स या शायरी तो हमें भेज सकते हैं..........अब सवाल-जवाब की बारी है। दोस्तो हमने पिछले सप्ताह दो सवाल पूछे थे, पहला सवाल था, नींद न आने वाले लोगों के लिए किस फल का जूस पीना फायदेमंद हो सकता है। सही जवाब है चेरी का जूस..

    दूसरा सवाल था- नई शोध के मुताबिक पतले आकार के डायनासोर संभवतह किसके पूर्वज हो सकते हैं। सही जवाब है, पक्षियों के।

    इन दोनों सवालों का सही जवाब लिखकर हमें भेजा है, केसिंगा उड़ीसा से सुरेश अग्रवाल, पश्चिम बंगाल से बिधान चंद्र सान्याल, देवाशीष गोप और देबशंकर चक्रवर्ती। जमशेदपुर झारखंड से एस.बी.शर्मा और सऊदी अरब से मो. सादिक आजमी।

    आप सभी को बधाई---- आगे भी हमारे सवाल सुनते रहिए। .....

    अनिलःअब आज के सवालों की बारी है, पहला सवाल है- बढ़ती उम्र का मुकाबला कैसे किया जाए और यहाँ तक कि बढ़ती उम्र की कुछ प्रक्रियाओं को कैसे पलटा जाए, ऐसा संभव हो सकता है, किस देश के वैज्ञानिकों की यह खोज है, और किस जन्तु या जानवर पर की गई है।

    दूसरा सवाल है- भारत के अगले सेनाध्यक्ष का क्या नाम है.

    अगर आपको इनका जवाब पता है तो जल्दी हमें ई-मेल कीजिए या खत लिखिए।.....हमारा ईमेल है.. hindi@cri.com.cn, हमारी वेबसाइट का पता है...hindi.cri.cn.

    अपने जवाब के साथ, टी-टाइम लिखना न भूलें।

    अनिलः टी-टाइम में आज के लिए इतना ही ...अगले हफ्ते फिर मिलेंगे.....चाय के वक्त......तब तक आप चाय पीते रहिए और सीआरआई के साथ जुड़े रहिए। नमस्ते, बाय-बाय, शब्बा खैर,चाइ च्यान.....

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