अमेरिका को श्यांगशान मंच की आवाज़ सुननी चाहिये

2021-10-28 15:31:30

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वर्ष 2021 पेइचिंग श्यांगशान मंच 26 अक्तूबर की रात को पेइचिंग में समाप्त हुआ। दो दिनों में 20 से अधिक देशों से आए 50 से अधिक विद्वानों ने बड़े देशों के संबंधों, एशिया-प्रशांत की सुरक्षा, बहुपक्षवाद व अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था आदि मुद्दों पर गहन रूप से विचार-विमर्श किया, और वैश्विक सुरक्षा शासन  के लिये अपनी बुद्धि दी। उन की आम राय है कि बहुपक्षवाद, सहयोग व समान जीत पर कायम रहकर एक साथ विश्व शांति व स्थिरता की रक्षा करनी चाहिये।

इस बार का मंच ऐसी पृष्ठभूमि में आयोजित किया गया। एक पक्ष में कोविड-19 महामारी लगभग दो साल फैल रही है, जिसने मानव को बड़ी धमकी दी। दूसरे पक्ष में अमेरिका शीत युद्ध विचार पर कायम रहकर एकपक्षवाद का प्रसार-प्रचार करता है। अमेरिका ने एशिया व प्रशांत क्षेत्र में टकराव की शुरुआत की, बड़े देशों के बीच आपसी विश्वास को बर्बाद किया, और एशिया-प्रशांत देशों को चिंतित किया। अमेरिका-ब्रिटन-ऑस्ट्रेलिया त्रिपक्षीय सुरक्षा साझेदार संबंध (एयूकेयूएस) और परमाणु पनडुब्बी सहयोग ने हथियारों की दौड़ और परमाणु प्रसार के जोखिम को पैदा किया है।

उधर, अमेरिका और नाटो ने जल्द ही अफ़गानिस्तान से अपनी सेना हटायी। इस के बाद अफ़गानिस्तान के सामने मानवीय संकट, आतंकवाद की वापसी, और कोविड-19 महामारी का प्रकोप आदि चुनौतियां मौजूद हुई हैं। जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिये नया खतरा बन गया।

इस मंच पर उपस्थित विद्वानों ने एशिया-प्रशांत की सुरक्षा में अमेरिका के कुप्रभाव पर गहन रूप से चर्चा की, और उन मामलों के स्रोत का विश्लेषण भी किया। कुछ विद्वानों ने कहा कि विश्व में बड़े क्षेत्र में या छोटे क्षेत्र में बहुत से क्षेत्रीय मुठभेड़ अमेरिका तथा उस की गठबंधन व्यवस्था से पैदा हुई हैं। लोगों को एकपक्षवाद से क्षेत्रीय शांति को बर्बाद करने पर बड़ा ध्यान देना होगा।

कुछ विद्वानों ने बल देकर कहा कि लोगों को सहयोग व समान जीत पर कायम रहकर वैश्विक सुरक्षा शासन को मजबूत करना चाहिये। साथ ही विद्वानों ने चीन-अमेरिका संबंधों पर बड़ा ध्यान दिया।

चंद्रिमा

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