पारिस्थितिक संरक्षण के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की मजबूती के लिए चीन का प्रयास उल्लेखनीय है- नेपाली शोधकर्ता

2021-09-22 12:52:12

नेपाल से आए डंबारू बल्लब कट्टेल चीनी विज्ञान अकादमी के अधीनस्थ छिंगहाई-तिब्बत संस्थान में पहले विदेशी विद्यार्थी थे। साल 2009 से 2012 तक उन्होंने इस संस्थान में डॉक्टर की उपाधि के लिए अध्ययन किया। स्नातक होने के बाद वे क्रमशः जर्मनी और पाकिस्तान के विश्वविद्यालय में कार्यरत रहे। साल 2016 में कट्टेल फिर चीन वापस लौटे और चीनी विज्ञान अकादमी के छिंगहाई-तिब्बत संस्थान में मुख्य रूप से हाइड्रोक्लाइमेटोलॉजी अनुसंधान में संलग्न हैं।  

कट्टेल "तीसरे ध्रुव पर्यावरण" अंतर्राष्ट्रीय योजना में बढ़चढ़ कर भाग लेते हैं। यह योजना चीनी वैज्ञानिकों द्वारा शुरू किया गया एक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कार्यक्रम है और इसने छिंगहाई-तिब्बत पठार के अध्ययन के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव के विस्तार को बढ़ावा देने में उत्कृष्ट योगदान दिया है।

कट्टेल ने कहा कि "तीसरा ध्रुव क्षेत्र" कई एशियाई देशों के लिए एक महत्वपूर्ण जल स्रोत है। भारत, पाकिस्तान, नेपाल आदि आसपास के देशों के लोग एक साथ हिम नदी का पानी पीते हैं। इस क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाली चुनौतियों का मुकाबला करना किसी एक देश के प्रयासों से नहीं किया जा सकता, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने इस संबंध में चीन के प्रयासों की सराहना की।

अक्तूबर महीने में संयुक्त राष्ट्र “जैव विविधता पर कन्वेंशन” के हस्ताक्षरकर्ताओं का 15वां सम्मेलन (सीओपी15) दक्षिण पश्चिमी चीन के युन्नान प्रांत की राजधानी खुनमिंग में आयोजित होगा। कट्टेल ने कहा कि संबंधित क्षेत्र के एक विद्वान के रूप में उन्हें उम्मीद है कि यह सम्मेलन अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए हाथ मिलाने का एक अवसर होगा।

(श्याओ थांग)

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