द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय शांति का सबसे बड़ा विध्वंसक
21 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस है। 7 सितंबर 2001 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें साल 2002 से हर साल 21 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस के रूप में निर्धारित करने का निर्णय लिया गया।
लेकिन दुनिया के कई देश और क्षेत्र अभी भी वास्तव में शांति का आनंद नहीं ले पा रहे हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के 70 से अधिक वर्षों में हालांकि विश्व युद्ध फिर से नहीं छिड़ा, लेकिन युद्ध कभी खत्म भी नहीं हुआ।
द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद अमेरिका ने बार-बार विदेशों में युद्ध छेड़े हैं, जिससे निर्दोष नागरिकों को जान-माल का भारी नुकसान हुआ। यह अंतर्राष्ट्रीय शांतिपूर्ण वातावरण का सबसे बड़ा विध्वंसक है।
अपूर्ण आँकड़ों के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के अंत से 2001 तक, दुनिया में 248 सशस्त्र संघर्ष हुए, और अमेरिका ने 201 की शुरुआत की, जो 81% के लिए जिम्मेदार था।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, लगभग सभी अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने अपने कार्यकाल के दौरान विदेशी युद्ध शुरू किए या उनमें प्रवेश किया। यहां तक कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने यह स्वीकार किया कि अमेरिका को दुनिया के इतिहास में सबसे जुझारू देश कहा जा सकता है।
स्थानीय लोगों को हवाई हमलों और बमों द्वारा लाए गए प्रत्यक्ष जीवन खतरों के अलावा, अमेरिका ने कई युद्धों में घटे हुए यूरेनियम बमों का भी उपयोग किया है। घटे हुए यूरेनियम बमों से होने वाला प्रदूषण पीढ़ियों तक बना रह सकता है।


