"गलत सूचना देने वाला दुनिया का नंबर एक देश" अपने स्वयं के बुरे परिणाम भुगतता है

2021-08-18 18:41:55

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"फेक न्यूज" (झूठा समाचार), यह अमेरिका के पूर्व नेता का एक रूढ़ वाक्य था, लेकिन दुर्भाग्यवश यह आज अमेरिकी समाज का चित्रण बन गया है। नए कोरोना वायरस निमोनिया महामारी के फैलने के बाद से अमेरिका में महामारी के बारे में झूठी जानकारियां पूरे वातावरण में फैल रही हैं, जिन्होंने महामारी से लड़ने के लिए आवश्यक वैज्ञानिक सामान्य ज्ञान और तर्कसंगत भावना को अभिभूत कर दिया है। हाल ही में तीन चीनी थिंक टैंक द्वारा संयुक्त रूप से जारी "’अमेरिका नंबर एक?" ! अमेरिका की महामारी-रोधी सच्चाई" शीर्षक रिपोर्ट में अमेरिका को "गलत सूचना देने वाला दुनिया का नंबर एक देश" कहा गया, जाहिर है कि यह निष्कर्ष सही है। 

महामारी के प्रकोप की शुरुआत में, व्हाइट हाउस के निर्णय निर्माताओं ने सभी प्रारंभिक चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया और महामारी की रोकथाम और नियंत्रण के लिए सबसे अच्छी खिड़की से चूक गए। वायरस के प्रसार को रोकने में असमर्थता की तुलना में अमेरिकी राजनीतिज्ञ महामारी के बारे में गलत जानकारी फैलाने में बेहतर हैं। तत्कालीन अमेरिकी नेता जो अक्सर "फेक न्यूज" पर फटकार लगाते थे, ने महामारी को "बड़ा फ्लू" कहा और "मौसम के गर्म होते ही गायब हो जाएगा" कहते थे। इसके साथ ही वो "हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और अन्य दवाएं नए कोरोना वायरस निमोनिया का इलाज कर सकती हैं" और "निस्संक्रामक का इंजेक्शन वायरस को मार सकता है" जैसे छद्म वैज्ञानिक बयान कहने में भी उत्सुक हैं। कुछ अज्ञात अमेरिकियों की मृत्यु उनकी इस प्रकार के कथन पर आसानी से विश्वास करने के कारण हुई।

इसके साथ ही पश्चिमी मुख्यधारा के सोशल मीडिया के तथाकथित "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता" के नाम से झूठी सूचनाओं का प्रसार हुआ है। अमेरिकी कॉर्नेल विश्वविद्यालय विज्ञान गठबंधन द्वारा जारी एक शोध आंकड़ों के मुताबिक, गत वर्ष जनवरी की शुरु से मई के अंत तक, दुनिया भर में अंग्रेजी भाषा की मीडिया में प्रकाशित नए कोरोना वायरस महामारी के बारे में 3.8 करोड़ से अधिक लेखों में से 11 लाख से ज्यादा में झूठी जानकारी थी। इन लेखों को विभिन्न सोशल मीडिया पर 3.6 करोड़ से अधिक बार रीपोस्ट किया गया है, जिनमें से तीन चौथाई रीपोस्ट फेसबुक पर हुए हैं।

वर्तमान में, अमेरिका में कोविड-19 के पुष्ट मामलों की संचयी संख्या 3.7 करोड़ से अधिक है, और मृतकों की संचयी संख्या 6.2 लाख से ज्यादा है, दोनों दुनिया में सबसे अधिक हैं। तथ्यों से जाहिर है कि अमेरिका में महामारी के खिलाफ़ लड़ाई पूरी तरह से विफल हो चुकी है। "गलत सूचना देने वाला दुनिया का नंबर एक देश" अपने स्वयं के बुरे परिणाम भुगत रहा है। अमेरिकी राजनीतिज्ञ राजनीतिक स्वार्थ लाभ और जिम्मेदार दूसरों पर थोपने के उद्देश्य के लिए झूठ गढ़ते हैं, इसने न केवल अमेरिकी लोगों को अंधा कर दिया है, बल्कि महामारी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को भी बाधित करता है। गलत सूचना फैलाने वालों और दुर्भावनापूर्ण प्रसारकों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

(श्याओ थांग)

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