"दुनिया में अत्यधिक मुद्रा जारी करने वाले नंबर एक देश" के रूप में अमेरिका दुनिया को संकट पैदा करता है

2021-08-16 19:58:12

तीन चीनी थिंक टैंक ने हाल ही में संयुक्त रूप से "’अमेरिका नंबर एक’?" ! अमेरिका की महामारी-रोधी सच्चाई" शीर्षक रिपोर्ट में कहा कि अमेरिकी सरकार के नए कोरोना महामारी की रोकथाम और नियंत्रण उपायों की विफलता के जवाब में फेडरल रिजर्व ने अत्यधिक मुद्रा जारी करने पर निर्भर रहते हुए संकट को कम कर रहा है। यदि इसे मुद्रा जारी करने के आधार पर रैंकिंग की जाए, तो अमेरिका "दुनिया में अत्यधिक मुद्रा जारी करने वाला नंबर एक देश" होने योग्य है।

कुछ समय के लिए फेडरल रिजर्व ने "अपरंपरागत" मुद्रा जारी करने के उपायों को अपनाया है। अमेरिकी सरकार और कांग्रेस ने कई बेलआउट-बिल पारित किए, उस द्वारा जारी की गई नई मुद्रा की राशि खरबों डॉलर तक पहुंच गई। वर्तमान में अमेरिका दुनिया को मुद्रास्फीति का निर्यात कर रहा है। क्योंकि अमेरिकी डॉलर दुनिया की मुख्य आरक्षित मुद्रा है, बड़ी मात्रा में अमेरिकी डॉलर दूसरे देशों में प्रवाहित होते हैं। जिससे विभिन्न देशों के पूंजी बाजारों में भारी अनिश्चितता और अस्थिरता पैदा होती है, और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार में उथल-पुथल होता है।

अमेरिका द्वारा "द्वार खोलकर बाढ़ को छोड़ने" वाले स्पिलओवर प्रभाव के मुकाबले के लिए उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों को दर्दनाक प्रतिक्रिया देनी होगी। ब्राजील, रूस, तुर्की, मैक्सिको जैसे उभरते बाजार देशों ने इस साल ब्याज दर को बढ़ा दी है, हालांकि ऐसा करने से आर्थिक सुधार में बाधा आ सकती है।

वास्तव में, अमेरिका द्वारा मुद्रा के अत्यधिक जारी करने ने भी खुद के लिए समस्याएं पैदा की हैं, जिसमें बढ़ती मुद्रास्फीति, अमीर और गरीब के बीच की खाई को चौड़ा करना शामिल है। इस समय दुनिया के तमाम देशों में लोग महामारी से पीड़ित हैं। अमेरिका की अत्यधिक मुद्रा जारी करने से दुनिया भर के देशों पर अतिरिक्त आर्थिक और सामाजिक दबाव पड़ता है, और यह दुनिया की आर्थिक सुरक्षा के लिए अधिक छिपे हुए खतरे भी पैदा करता है। "दुनिया में अत्यधिक मुद्रा जारी करने वाला नंबर एक देश" होने के नाते अमेरिका को दयनीय बनाता है। उसे वैश्विक अर्थव्यवस्था की पुनरुत्थान के लिए ज्यादा योगदान देने के लिए अधिक जिम्मेदार मौद्रिक नीति अपनानी चाहिए।

(श्याओ थांग)

रेडियो प्रोग्राम