कोरोना वायरस अमेरिकी राजनीतिक हमले का साधन बन गया है- ब्रिटिश विद्वान

अमेरिका में जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के आंकड़ों के अनुसार, स्थानीय समयानुसार 9 अगस्त को अमेरिका में नए कोरोना वायरस निमोनिया के 3.59 करोड़ से अधिक पुष्ट मामले सामने आए हैं, 24 घंटे में 1.48 लाख नए मामलों की पुष्टि की गई है। ऐसी स्थिति में कुछ अमेरिकी मीडिया ने खुले आम अमेरिका को तथाकथित "दुनिया में महामारी के विरोध में नंबर एक" रेट किया है।
इसकी चर्चा करते हुए ब्रिटिश विद्वान मार्टिन जैक्स ने हाल ही में कहा कि महामारी के खिलाफ़ लड़ाई में अमेरिका का नंबर एक बेहद हास्यास्पद है। अमेरिका महामारी से लड़ने में अपनी विफलता पर जनता का ध्यान भटकाने के लिए चीन को बदनाम करने में प्रयासरत है।
चीनी जन विश्वविद्यालय में छोंगयांग इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंस, थाई-ह थिंक टैंक और हाईक्वो थूची अनुसंधान संस्थान ने 9 अगस्त को संयुक्त रूप से पेइचिंग में“‘अमेरिका नंबर एक’?! अमेरिका में महामारी की सच्चाई”शीर्षक रिपोर्ट रिलीज और संगोष्ठी बैठक बुलाई। ब्रिटिश कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के पूर्व वरिष्ठ शोधकर्ता मार्टिन जैक्स ने संगोष्ठी में भाग लिया।

ब्रिटिश कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के पूर्व वरिष्ठ शोधकर्ता मार्टिन जैक्स
अमेरिका की आबादी दुनिया की आबादी का केवल 4 प्रतिशत है, लेकिन कोविड-19 मामलों की संख्या वैश्विक कुल संख्या का 18 प्रतिशत है। यह स्पष्ट रूप से एक "महामारी के खिलाफ लड़ाई में विफल देश" है, लेकिन वह बेशर्मी से खुद को "महामारी के खिलाफ लड़ाई में नंबर एक" कहता है। मार्टिन जैक्स मानते हैं कि कई पहलुओं में पश्चिमी सरकारों और मीडिया ने महामारी को हराने में चीन की सफलता को जनता के सामने छुपाया है। शुरू से ही अमेरिका ने चीन पर हमला करने के लिए महामारी का पूरी तरह से इस्तेमाल किया।
उन्होंने कहा कि कुछ अमेरिकी राजनीतिज्ञों द्वारा गढ़े गए तथाकथित "प्रयोगशाला रिसाव सिद्धांत" का उद्देश्य महामारी के खिलाफ अमेरिका की अप्रभावी लड़ाई से जनता का ध्यान हटाने के लिए चीन को कलंकित करना है। उनके विचार में कोरोना महामारी को अमेरिका द्वारा "शीत युद्ध" बयानबाजी, भाषा और "शीत युद्ध" हमलों का राजनीतिक रंग दिया गया है, और इस तरह की स्थिति जारी रहेगी।
(श्याओ थांग)


