शिक्षा का समान मौका मिलना मानवाधिकार की गारंटी है

12 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा स्थापित अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस है। युवा पूरे समाज में सबसे सकारात्मक व सबसे जीवंत शक्ति है। वे अपने देश की आशा के साथ राष्ट्र का भविष्य भी हैं। जब हम युवा की चर्चा करते हैं, तो युवा की शिक्षा की बात ज़रूर की जानी चाहिए। क्योंकि शिक्षा का समान मौका मिलना मानवाधिकार की गारंटी है। इस रिपोर्ट में हम विश्व के सबसे बड़े विकासशील देश चीन में युवाओं की शिक्षा स्थिति देखेंगे।
जैसा कि हम सभी जानते हैं, शैक्षिक समानता सामाजिक समानता का विस्तार है। शिक्षा में मौजूद असमानता सामाजिक निष्पक्षता और न्याय को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी। यह कहा जा सकता है कि शिक्षा समाज की निष्पक्षता को प्राप्त करने का सबसे महान उपकरण है। यदि समाज के निचले पायदान पर पैदा हुए बच्चे अपने प्रयासों से उच्च वर्ग के समाज में प्रवेश करना चाहते हैं, तो उनके लिए निष्पक्ष शिक्षा प्राप्त करना ही एकमात्र रास्ता है।
चीन सरकार निरंतर रूप से शिक्षा की निष्पक्षता के लिये कोशिश कर रही है। पहला, चीन ने कानून व प्रणाली के स्तर पर गैर-भेदभावपूर्ण शिक्षा नीति बनायी है, ताकि हर बच्चे को शिक्षा लेने का समान मौका मिल सके। उदाहरण के लिये चीन के संविधान, शिक्षा कानून और अनिवार्य शिक्षा कानून तथा उच्च शिक्षा कानून आदि में संबंधित विषय शामिल हुए हैं।
दूसरा, क्षेत्रों, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों और समूहों के बीच शिक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए, चीन सरकार ने हाल के वर्षों में नीति और वित्त में महत्वपूर्ण निवेश किया है। मध्य और पश्चिमी क्षेत्रों के पिछड़े क्षेत्रों में अनिवार्य शिक्षा के विकास के लिए मुआवजा तंत्र की एक श्रृंखला की स्थापना के माध्यम से, पिछड़े क्षेत्रों में अनिवार्य शिक्षा के विकास में काफी बदलाव आया है।
उनके अलावा चीन ने बड़े शहरों में स्कूल डिस्ट्रिक्ट हाउसिंग को खत्म करने और ऑफ-कैंपस प्रशिक्षण संस्थानों पर नकेल कसने जैसी नीतियों को लागू किया है, जिससे भविष्य में मां-बाप को बच्चों की शिक्षा के लिये ज्यादा पैसे देने की ज़रूरी नहीं है, और सभी बच्चों को स्कूलों में निष्पक्ष शिक्षा मिल सकेगी। प्रतिभाशाली बच्चों को स्वाभाविक रूप से अलग दिखने दें। साथ ही, चीन ने व्यावसायिक शिक्षा का प्रोत्साहन भी दिया ताकि अधिक से अधिक सामान्य बच्चे अपने कौशल की खोज करके समाज के लिये योगदान दे सकें।
संयुक्त राष्ट्र संघ के विश्व मानवाधिकार घोषणा पत्र में यह लिखा हुआ है कि सभी को शिक्षा का अधिकार है, और शिक्षा मुफ्त होनी चाहिए, कम से कम प्रारंभिक और बुनियादी शिक्षा में। बुनियादी शिक्षा अनिवार्य शिक्षा होनी चाहिये। तकनीकी शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा को लोगों को इसका व्यापक रूप से उपयोग करने की अनुमति देनी चाहिए और उच्च शिक्षा भी योग्यता के आधार पर सबके लिए समान रूप से खुली होनी चाहिए।
चीन वास्तविक कार्रवाई से विश्व मानवाधिकार घोषणा पत्र का पालन कर रहा है, और बच्चों को शिक्षा पाने का समान मौका दे रहा है। जिससे बच्चे अपने भविष्य का निर्णय कर सकते हैं, ज्यादा से ज्यादा मध्यम वर्गीय परिवार पैदा होंगे, और अंत में देश भर व्यापक समृद्धि प्राप्त होगी।
चंद्रिमा


