मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव अमेरिकी समाज में एक लाइलाज बीमारी है

2021-07-18 16:17:40

अमेरिका ने हमेशा खुद को "स्वतंत्रता व लोकतंत्र का विश्व प्रकाशस्तंभ" और "मानव अधिकारों का वैश्विक संरक्षक" माना है, लेकिन इसने लंबे समय से घरेलू मुसलमानों के भेदभाव व अनुचित व्यवहार की वास्तविकता को नजरअंदाज किया है, और आर्थिक अवसरों में सुधार व धार्मिक विश्वास की स्वतंत्रता पर मुसलमानों की मांग को नजरअंदाज किया है।

21वीं सदी की शुरुआत के बाद से समय-समय पर "इस्लामोफोबिया" हुआ है। डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टियां भी मुसलमानों को राजनीतिक वोट हासिल करने के लिए एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करती हैं। अमेरिकी मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि के रूप में, बॉक्सिंग चैंपियन अली ने एक बार कहा था, "अपने सपने को साकार करने का सबसे अच्छा तरीका जागना है।"

साल 2001 में "11 सितंबर" की घटना अमेरिका में मुस्लिम समुदाय के लिए एक वाटरशेड थी। ज्यादातर अमेरिकी नागरिकों ने धीरे-धीरे मुसलमानों के प्रति भय, अविश्वास और यहां तक ​​कि गहरी नफरत महसूस की। साथ ही, अमेरिकी संघीय सरकार और सेना ने भी सार्वजनिक रूप से मुसलमानों के प्रति अत्यधिक अविश्वास व्यक्त किया है।

20 वर्षों तक अमेरिकी समाज में मुस्लिम विरोधी भावना का अध्ययन करने वाले एक विद्वान ने निष्कर्ष निकाला कि चुनाव के दौरान तथाकथित "इस्लामोफोबिया" रिपब्लिकन के बीच अपने चरम पर पहुंच जाएगा, जबकि अमेरिका द्वारा इस्लामी देशों के खिलाफ एक विदेशी युद्ध शुरू करने की पूर्वसंध्या पर डेमोक्रेट इस डर को बढ़ावा देते हैं।

अंजली

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