शांति, विकास, सहयोग व साझी जीत चीन के आसपास की परिस्थिति की मुख्यधारा है

2021-04-22 15:48:15

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पड़ोसी देशों के साथ संबंध चीन के विकास और कूटनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। कोविड-19 महामारी के प्रसार की पृष्ठभूमि में चीन और पड़ोसी देशों के बीच सुरक्षा सहयोग, आर्थिक सहयोग तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान में क्या विशेषताएं हैं?, क्या चुनौतियां हैं?, चीन और पड़ोसी देशों के संबंधों का रूझान कैसा होगा? चीनी सामाजिक विज्ञान अकादमी ने हाल ही में संबंधित अध्ययन रिपोर्ट जारी की। 

चीनी सामाजिक विज्ञान अकादमी ने हाल ही में पेइचिंग में चीन के पड़ोसी संबंधों पर नीला पत्र---- चीन और पड़ोसी देशों के संबंधों के विकास की रिपोर्ट (2021) जारी की। इसमें कहा गया कि वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के विश्व भर में फैलने से सौ सालों में अभूतपूर्व परिस्थिति का परिवर्तन तेज हो गया है। विश्व डांवांडोल व परिवर्तित काल में दाखिल हो गया है और चीन की पड़ोसी स्थिति में भी बदलाव आ रहा है, लेकिन शांति, विकास, सहयोग और साझी जीत मुख्य धारा बनी रहेगी। चीन और पड़ोसी देशों के संबंधों का निर्माण नये चरण में दाखिल हो रहा है।

वर्ष 2020 में चीन और आसियान एक दूसरा का सबसे बड़ा व्यापार साझेदार बन गये हैं। नीले पत्र में कहा गया कि शांति व समृद्धि के उन्मुख चीन-आसियान रणनीतिक साझेदारी नये युग में प्रवेश कर रही है। चीनी सामाजिक अकादमी की विश्व अर्थव्यवस्था व राजनीति अध्ययन संस्थान के विश्व आर्थिक इतिहास केंद्र की उप निदेशक न्यू युएछु ने बताया कि चीन-आसियान मुक्त व्यापार क्षेत्र के ढांचे में चीन और आसियान का आर्थिक व व्यापारिक सहयोग स्वर्ण युग में दाखिल हो चुका है। उन्होंने बताया ,मुक्त व्यापार क्षेत्र के ढांचे के तहत चीन-आसियान का एकीकरण निरंतर गहरा हो रहा है। चीन-आसियान आर्थिक व व्यापारिक संबंध ने ऐतिहासिक छलांग लगायी है। आसियान के प्रति चीन का प्रत्यक्ष निवेश एक नयी मंजिल पर पहुंच गया है। दोनों पक्ष ने कृषि विनिर्माण उद्योग, वित्तीय सूचना तकनीक उद्योग के अलावा मझौले व छोटे उद्यमों और उप-क्षेत्रीय सहयोग समेत व्यापक क्षेत्रों में कई सहयोग किये हैं। उन्होंने आगे कहा ,चीन और आसियान को भविष्य में मुक्त व्यापार क्षेत्र का बहुआयामी नेटवर्क स्थापित करना चाहिए, जिसका अंतिम लक्ष्य क्षेत्रीय व्यापार और निवेश का मुक्तिकरण है। इस नेटवर्क का केंद्र चीन-आसियान मुक्त व्यापार क्षेत्र है और उसके दो बाजू एक पट्टी एक मार्ग का निर्माण और आरसीईपी है।

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नीले पत्र में कहा गया कि वर्ष 2020 में चीन और पश्चिमी एशियाई देशों के संबंध कोविड-19 महामारी और बाहरी हस्तक्षेप के चुनौती की कसौटी पर खरे उतरे हैं। दोनों पक्षों के सहयोग का आधार अधिक मजबूत हुआ है और नये सहयोग उभरे हैं। चीनी सामाजिक विज्ञान अकादमी के चीन-अफ्रीका अध्ययन संस्थान के उपनिदेशक वांग लीछुन ने बताया कि ई-बिजनस मंच और उपग्रह नेवेगेशन दोनों पक्षों के सहयोग का नया बिंदु है। उन्होंने बताया ,चीन ने यूएई, ओमान, बहरीन, सउदी अरब समेत खाड़ी के 6 देशों के साथ ई-बिजनस मंच और कृत्रिम बुद्धिमता का अच्छा सहयोग किया है। उल्लेखनीय बात है कि दोनों पक्षों ने पेइतो उपग्रह नेवेगेशन में नया कदम उठाया है। गतवर्ष दूसरा चीन-अरब देश पेइतो सहयोग मंच आयोजित हुआ। वास्तव में वर्ष 2012 से चीन ने पश्चिमी एशियाई देशों के लिए पेइतो के उपयोग में कई प्रतिभाओं को प्रशिक्षित किया है।

नीले पत्र में कहा गया कि भविष्य में चीन और पश्चिमी एशिया बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, व्यापार, नाभिकीय ऊर्जा, उपग्रह और नवीन ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के साथ डिजिटल अर्थव्यवस्था, ई-बिजनस, एआई जैसे नये क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करेंगे। लेकिन दोनों पक्षों के संबंधों के सामने परंपरागत और गैर-परंपरागत सुरक्षा चुनौती मौजूद हैं।

नीले पत्र में कहा गया कि वर्ष 2020 में चीन-रूस सहयोग में बड़ी प्रगति हासिल हुई है। चीनी सामाजिक अकादमी के रूस, पूर्वी यूरोप तथा मध्य एशिया अध्ययन संस्थान के अध्ययनकर्ता ल्यू फंग हुआ ने बताया ,वर्ष 2020 में चीन-रूस व्यापार 1 खरब 7 अरब 77 करोड़ अमेरिकी डॉलर रहा, जो महामारी के बीच आसान नहीं था।     

नीले पत्र में कहा गया कि वर्ष 2021 में चीन और रूस चौतरफा तौर पर कई क्षेत्रों में पारस्परिक सहयोग को बढ़ाते रहेंगे और अधिक घनिष्ठ पारस्परिक निर्भरता वाले संबंध स्थापित करेंगे। चीन और रूस बड़े देशों की भूमिका निभाकर साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय बहुध्रुवीकरण और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लोकतांत्रिकरण बढ़ाएंगे और नये किस्म वाले अंतरराष्ट्रीय संबंधों और मानव समुदाय के साझे भविष्य का निर्माण करेंगे ।

नीले पत्र में कहा गया है कि चीन-भारत सीमा क्षेत्र की स्थिति में और शैथिल्य आने की संभावना है और द्विपक्षीय संबंधों के सुधार का आसार नजर आ रहा है। आर्थिक व व्यापारिक सहयोग में नयी प्रगति प्राप्त करने की संभावना होगी।

चीनी सामाजिक विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष श्ये फूचेन ने बताया कि पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को महत्व देना चीन के उच्चस्तरीय खुलेपन और नये विकास की आंतरिक मांग है और बेहतर पड़ोसी वातावरण से समान विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया ,पड़ोसी देश चीन के खुलेपन, विकास व स्थिरता के लिए खास महत्व रखते हैं। शांति, विकास, सहयोग व समान जीत चीन की पड़ोसी स्थिति की मुख्य धारा बनी रहेगी, लेकिन स्थिरता को बर्बाद करने के तत्व मौजूद हैं। हमें पड़ोसी देशों के साथ संबंध निरंतर गहराने चाहिए। (वेइतुंग)

 

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