परमाणु अपशिष्ट जल को समुद्र में डालने का सभी लोग विरोध करेंगे

2021-04-14 16:21:45

जापान ने फुकुशिमा के परमाणु अपशिष्ट जल को समुद्र में डालने का फैसला किया। इस पर पूरी दुनिया का ध्यान केंद्रित है, क्योंकि यह दुनिया भर में विवाद और शंका से भरा निर्णय है। हम जानते हैं कि जापान की फुकुशिमा परमाणु दुर्घटना अब तक दुनिया में हुई सबसे गंभीर परमाणु दुर्घटना है। इससे पैदा विकिरण रिसाव की मात्रा बहुत ज्यादा है और समुद्री वातावरण, खाद्य सुरक्षा व लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ा है।

जापान का पड़ोसी देश होने के नाते चीन इस पर बहुत चिंतित है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चाओ लीच्येन ने कहा कि जापान ने अपशिष्ट जल का सुरक्षित निपटारा न करने की स्थिति में देश और विदेशों के विरोध की अनदेखी कर एकतरफा दौर पर परमाणु अपशिष्ट जल को समुद्र में डालने का फैसला किया। यह फैसला बेहद गैर-जिम्मेदाराना है, जो विश्व सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और पड़ोसी देशों के लोगों के हितों को बड़ा नुकसान पहुंचेगा।

दक्षिण कोरिया ने भी स्पष्ट रूप से जापान के फैसले का दृढ़ विरोध किया और जापान से समुद्री वातावरण को दूषित न करने की मांग की। चीन और दक्षिण कोरिया के विरोध का पर्याप्त कारण है, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों और अनुसंधान संगठनों ने सबूत दिया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने कहा परमाणु अपशिष्ट जल से वातावरण और मानवाधिकार को बड़ा नुकसान पहुंचेगा, जापान का फैसला अस्वीकार्य है। जर्मनी समुद्री विज्ञान अनुसंधान संस्थान ने कहा कि फुकुशिमा के तट पर दुनिया का सबसे मजबूत महासागरीय प्रवाह है। अपशिष्ट जल की निकासी से 57 दिनों में विकिरण रिसाव का फैलाव प्रशांत महासागर के अधिकांश क्षेत्रों तक जा पहुंचेगा और 10 साल बाद दुनिया भर के समुद्री क्षेत्र प्रभावित हो जाएंगे। विदेशी नेटिजनों ने प्रत्यक्ष रूप से कहा कि यह मानव के खिलाफ अपराध है।

हम जानते हैं कि महासागर मानव जाति की समान संपत्ति है, मानव समुदाय का साझा भविष्य है। साधारण ज्ञान हमें बताता है कि बहता हुआ समुद्री पानी परमाणु अपशिष्ट जल को दुनिया के किसी भी कोने में पहुंचा देगा। जब विकिरण रिसाव जानवरों और पौधों में घुस जाएगा, फिर खाद्य श्रृंखला से हमारे शरीर में जाएगा, तब क्या परमाणु अपशिष्ट जल को समुद्र में डालने का फैसला करने वाले लोग शांति से खाना खा सकेंगे? इसके अतिरिक्त गर्म होने पर समुद्री पानी बादलों में बदल जाता है, बादलों से बारिश होती है, फिर वर्षा का पानी नदी में गिरता है और अंततः समुद्र में जाता है। दुनिया में सब कुछ चक्कर है। जापान का फैसला मानव जाति की सुरक्षा के लिए खतरा है, सभी लोग इसका दृढ़ विरोध करेंगे।

(ललिता)

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