चरवाहों के साथ सद्भावना से रहने वाले तिब्बती मृग

तिब्बती पंचांग के नव वर्ष के दिन, जब अन्य लोग स्प्रिंग फेस्टिवल के माहौल में डूबे हुए थे, तिब्बती पठार के घास के मैदान पर वन्यजीव रक्षक, त्सीचेंन ताइछिन , अपनी मोटरसाइकिल पर सवार होकर राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व क्षेत्र में गश्त करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा, "नए साल के दौरान पटाखे करने वाले बहुत से लोग हैं, इसलिए घास के मैदान में आग की रोकथाम पर ध्यान देना पड़ेगा। इसके अलावा, सर्दियों में तिब्बती मृगों के अस्तित्व पर भी विशेष ध्यान देना होगा। इसलिए हमें कभी कभी बाहर नव वर्ष बिताना पड़ा है।”सेलिनसुओ नेचर रिजर्व क्षेत्र, जहां त्सीचेंन ताइछिन कार्यरत हैं, उत्तरी तिब्बत के घास के मैदान में स्थित है। इस क्षेत्र की औसत ऊंचाई 4700 मीटर से अधिक है। कठोर प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण, इसे "मानव जीवन के लिए निषिद्ध क्षेत्र" कहा जाता है, लेकिन वह जंगली जानवरों के लिए स्वर्ग बन गया है।
वन्यजीव रक्षक त्सीचेंन ताइछिन ने कहा, "सर्दियों में तिब्बती मृगों का संभोग काल होता है। तिब्बती मृग अक्सर सहवास के अधिकार के लिए लड़ते हैं। जब घायल तिब्बती मृग पता चला है, तो हम इसकी मदद करेंगे और इसे बचाव स्टेशन पर लेकर इलाज कराने के बाद छोड़ेंगे। आम तौर पर, हम एक दिन में बाहर सात आठ घंटे गश्त करते हैं और जब जंगली जानवरों का इलाज और बचाव करने की आवश्यकता है, तो हम रात को टेंट में रहते हैं या बचाव स्टेशन जाते हैं। कभी-कभी हमें एक दिन 400 किलोमीटर से अधिक दूरी चलना है।”33 वर्षीय वन्यजीव रक्षक त्सीचेंन ताइछिन अपनी ड्यूटी पर 12 साल के लिए काम कर चुका है। तिब्बत के नाछू शहर की शेनत्ज़ा काउंटी में उन के जैसे कुल 42 वन्यजीव रक्षक कार्यरत हैं। वन्यजीवों की बेहतर सुरक्षा के लिए, तिब्बत स्वायत्त प्रदेश ने 2015 में छ्यांगथांग राष्ट्रीय प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र में प्रबंधन प्रणाली और तंत्र में सुधार शुरू किया। इसमें चार-स्तरीय प्रबंधन प्रणाली शामिल है। और 2 प्रबंधन विभाग, 73 प्रबंधन स्टेशन स्थापित किये गये हैं जिनमें कुल 780 चरवाहों को वन्यजीव रक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में लगभग 50% क्षेत्रों को पारिस्थितिक संरक्षण लाल रेखा के भीतर रेखांकित है, और स्वायत्त प्रदेश के क्षेत्र में दुर्लभ जंगली जानवरों की संख्या को काफी हद तक बढ़ाया गया है। अब तक, तिब्बती मृग की संख्या 50,000 से बढ़कर दो लाख तक हो गई है और तिब्बती जंगली गधों, भालू, भेड़ियों, और लोमड़ियों जैसे जंगली जानवरों की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई है।
तिब्बती चरवाहों की आंखों में तिब्बती मृग एक शुभ जानवर है। यह 135 सेमी लंबा, 80 सेमी ऊंचा और 45-60 किलोग्राम वजन का है। तिब्बती मृग आम तौर पर 3700-5500 मीटर की ऊंचाई के घास के मैदान में निवास करते हैं, और उन के हजारों का बड़ा समूह बन सकता है। गर्मियों में तिब्बती मृग निश्चित मार्ग से उत्तर की ओर पलायन करते हैं। यह जानवर मुख्य रूप से चीन के छिंगहाई-तिब्बत पठार और शिनच्यांग प्रदेश में निवास करता है, पर लद्दाख में भी इस जानवर की एक छोटी राशि मिल सकती है।
तिब्बती मृग कभी पर्यावरण के बिगड़ने और अवैध शिकार के कारण लुप्तप्राय जानवर बना था। 1999 में तिब्बती मृग संरक्षण और व्यापार नियंत्रण पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी चीन के शीआन शहर में आयोजित की गई। चीन, फ्रांस, भारत, इटली, नेपाल और ब्रिटेन सहित कई देशों के प्रतिनिधियों ने औपचारिक रूप से तिब्बती मृग संरक्षण के बारे में एक रिपोर्ट जारी की। इससे तिब्बती मृगों के अवैध शिकार और इससे जुड़े उत्पादों के अवैध व्यापार को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का प्रारंभिक संगठन संपन्न होने लगा, जो तिब्बती मृग के संरक्षण के लिए कारगर साबित है।
तिब्बती मृग को 2008 पेइचिंग ओलंपियाड के शुभंकरों में से एक के रूप में चुना गया था। तिब्बती मृग और अन्य दुर्लभ जानवरों की रक्षा करने के लिए, चीन सरकार ने 1983 में अल्चीन पर्वत राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण क्षेत्र, 1992 में छ्यांगथांग प्रकृति संरक्षण क्षेत्र, और 1995 में ख-ख शीली प्रदेशीय संरक्षण क्षेत्र और 2000 में सैनच्यांगयुवान संरक्षण क्षेत्र की स्थापना की। 1990 के दशक की शुरुआत में, तिब्बती मृग की रक्षा करने के लिए, तिब्बत स्वायत्त प्रदेश ने प्रकृति संरक्षण क्षेत्र के रूप में तिब्बती मृग के मुख्य निवास स्थान छ्यांगथांग घास मैदान में दुनिया में सबसे बड़े जंगली वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र स्थापित किया। वर्ष 2000 में इसे राष्ट्र स्तरीय संरक्षण क्षेत्र बनाया गया, जिसने तिब्बती मृग के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
चीनी सरकार तिब्बती मृगों के संरक्षण को बहुत महत्व देती है। 1981 में, चीन ने वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन में हिस्सा लिया। चीनी सरकार ने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कई प्रकृति संरक्षण क्षेत्र भी स्थापित किए हैं जहां तिब्बती मृग वितरित हैं, और नियमित संचालन के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंधन विभागों की स्थापना की है। आजकल, जब पर्यटक तिब्बत में छ्यांगथांग संरक्षण क्षेत्र गुजरते हैं, तो वे कभी कभार तिब्बती मृगों, तिब्बती जंगली गधों, और जंगली याकों से भी मिल सकते हैं। वन्यजीव रक्षक त्सीचेंन ताइछिन ने कहा, "संरक्षण अब बहुत मजबूत है, और जंगली जानवरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। मनुष्य और जंगली जानवर घास के मैदान पर सामंजस्यपूर्ण रूप से रहते हैं।"


