चीन-भारत संबंधों को नुकसान पहुंचाने का व्यवहार आग में घी डालने जैसा है

2021-01-27 20:03:10

दो महीने बाद चीन और भारत के बीच नौवें चरण की कमांडर स्तरीय वार्ता 24 जनवरी को आयोजित हुई, लेकिन इसके साथ ही भारतीय मीडिया ने रिपोर्ट की कि तीन दिन पहले चीन और भारत की सेनाओं के बीच सिक्किम में मुठभेड़ हुई। यहां तक कि कुछ रिपोर्टों में यह कहा गया है कि भारत की तुलना में चीन का नुकसान ज्यादा हुआ।

तो वास्तव में तथ्य क्या है? यह साफ है कि भारतीय मीडिया ने फिर एक बार अफवाह फैलाई। क्योंकि रिपोर्ट आने के बाद भारतीय सेना ने शीघ्र ही खंडन किया कि 20 जनवरी को दोनों सेनाओं के बीच बस छोटा टकराव हुआ, स्थानीय कमांडरों ने समझौते के अनुसार इसका निपटारा किया। आशा है कि मीडिया संस्थान ऐसी रिपोर्टें प्रकाशित नहीं करेंगे, जो तथ्यों के अनुरूप नहीं हैं।

अब हम पीछे देखते हैं। टकराव उसी दिन हुआ, जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का शपथ ग्रहण समारोह था। भारत ने इसी दिन सीमा क्षेत्रों में सैनिकों की संख्या बढ़ायी, जिससे जाहिर है कि यह कदम पहले से सोचा-समझा था। भारत अमेरिका को बताना चाहता है कि वह अमेरिका के साथ चीन को रोकना चाहता है।

जैसा कि हम जानते हैं कि अमेरिका के साथ चीन को रोकना भारत सरकार की मुख्य रणनीति है। नरेंद्र मोदी के भारतीय प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत-अमेरिका संबंध तेजी से अच्छे हुए हैं, जबकि चीन-भारत संबंधों में उतार-चढ़ाव आया। चीन की राष्ट्रीय क्षमता लगातार उन्नत होने के चलते चीन और भारत के बीच अंतर बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में बाहरी शक्तियों के सहारे खुद का समर्थन करना और चीन के साथ संतुलन स्थापित करना भारत का अपरिहार्य विकल्प बना।

ध्यानाकर्षक है कि पिछले जून में गलवान घाटी में संघर्ष के बाद भारत में राष्ट्रवाद की भावना तीव्र होने लगी। चीनी उद्यमों और चीनी वस्तुओं के खिलाफ कदम उठाए गए। भारतीय मीडिया के अनुसार भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ताजा सूचना जारी की है कि इस साल जून से हमेशा के लिए टिकटॉक, पाईतू, वीचेट और यूसी ब्राउज़र समेत 59 चीनी ऐप्स पर बैन लगाया जाएगा। इस तरह का व्यवहार दोनों देशों के मतभेदों को दूर नहीं कर सकता, इसके विपरीत तनाव बढ़ेगा। इससे भारत के हित को नुकसान पहुंचेगा।

भारतीय मीडिया ने भी मान लिया है कि “बायकॉट चाइना” कहने में आसान है, जबकि करने में मुश्किल। हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया और मुंबई मिरर ने क्रमशः रिपोर्ट जारी कर कहा कि “बायकॉट चाइना” से भारत को कोई लाभ नहीं पहुंचेगा।

वहीं कोविड-19 महामारी दुनिया के विभिन्न देशों के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है। भारत में महामारी की स्थिति चिंताजनक है। महामारी की रोकथाम और आर्थिक बहाली के दबाव में चीन-भारत संबंधों की स्थिरता को नुकसान पहुंचाने वाले सभी व्यवहार आग में घी का काम करेंगे।

दुनिया में दो सबसे बड़े विकासशील देश होने के नाते विकास और पुनरुत्थान चीन और भारत के लिए प्राथमिकता है। इसमें दोनों देशों के समान हित मौजूद हैं। चीन घरेलू आर्थिक चक्र को मुख्य बनाते हुए घरेलू और विदेशी आर्थिक चक्र को साथ में बढ़ा रहा है, वहीं भारत वर्ष 2025 तक 50 खरब डॉलर की आर्थिक शक्ति बनना चाहता है और मजबूत आर्थिक देश बनना चाहता है। हमारे दोनों देशों की विकास की रणनीति मिलती-जुलती है। चीन और भारत एक दूसरे के लिए खतरा नहीं, विकास के अवसर हैं। हमें सहयोग मजबूत करते हुए द्विपक्षीय संबंधों की बेहतर स्थिति बनाए रखनी चाहिए।

(ललिता)

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