चीन में कोयले की कमी कभी नहीं रही है

2021-01-20 10:39:17

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शीत लहर की वजह से चीन के कई क्षेत्रों में तापमान में बड़ी गिरावट आयी। पेइचिंग में इधर के दिनों तेज सर्द हवाएं चल रही है और ठंड काफी ज्यादा है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 6 जनवरी की रात को पेइचिंग में न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे 18 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा, जो वर्ष 2000 के बाद सबसे कम है।

शीत लहर सर्दियों में सामान्य बात है, लेकिन कई विदेशी मीडिया संस्थाओं ने रिपोर्ट की कि चीन में बिजली की कमी है। कारण है कि हाल में दक्षिण चीन के कुछ प्रांतों में बिजली का प्रयोग सीमित हुआ है। विदेशी मीडिया ने कयास लगाया है कि चीन ने क्यों बिजली पर सीमित करने का आदेश जारी किया, कारण है कि चीन में कोयले की किल्लत हो गई है, विशेषकर चीन ने ऑस्ट्रेलिया से कोयले का आयात कम किया। तो तथ्य क्या है? सच्चाई देखकर विदेशी मीडिया शायद निराश होंगे।

वास्तव में दक्षिण चीन के हूनान और च्यांगशी प्रांत में बिजली पर सीमित करने का कारण यह है कि सर्दियों में ठंड मौसम और तेज आर्थिक बहाली की वजह से बिजली की आपूर्ति सीमित हुई।

वहीं, चीन में कोयले की खपत में आयातित कोयले का अनुपात काफी कम है। चीनी राजकीय सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल जनवरी से नवंबर तक चीन ने 3 अरब 48 करोड़ टन कच्चे कोयले का उत्पादन किया, जबकि सिर्फ 26 करोड़ टन कोयले का आयात किया। इसमें ऑस्ट्रेलिया से सिर्फ 7 करोड़ टन कोयले का आयात शामिल है, जो चीन के कोयले की कुल खपत का सिर्फ 1.9 प्रतिशत है।

वास्तव में दुनिया में बिजली का सबसे बड़ा उत्पादक देश चीन में बिजली कभी किल्लत नहीं हुई। विश्व ऊर्जा सांख्यिकीय समीक्षा-2019 में कहा गया है कि चीन में बिजली का उत्पादन दुनिया का 26.7 प्रतिशत है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा बिजली का उत्पादन करने वाला देश है।

इसके अलावा, चीनी राजकीय विकास और सुधार आयोग ने भी कहा कि अब चीन के कोयले बाजार में आपूर्ति और मांग संतुलित है। साल 2020 की सर्दियों और साल 2021 के वसंत में कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित है।

कहा जा सकता है कि चीन में कोयले की कमी की समस्या कभी रही ही नहीं। विदेशी मीडिया के अंदाजे का कोई आधार नहीं है।

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