शिनच्यांग लड़की गुलमिरे अतीहान की कहानी

2021-01-14 14:59:50

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दोस्तों, शूलो काऊंटी चीन के शिनच्यांग वेवूर स्वायत्त प्रदेश के काशगर क्षेत्र के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। जहां ओएसिस का क्षेत्रफल सारी काऊंटी के कुल भूमि क्षेत्र का केवल 5.6 प्रतिशत हिस्सा है। वह चीन में एक गंभीर गरीब काऊंटी है। वर्ष 2017 में शिनच्यांग के काशगर कला कॉलेज के चीनी भाषा शिक्षक, 80वें दशक के बाद पैदा हुई वेवूर जाति की लड़की गुलमिरे अतीहान स्वायत्त प्रदेश द्वारा आयोजित“फ़ांग ह्वेई ज्यू”नामक गतिविधि का समर्थन करने के लिये शूलो गरीब काऊंटी के अधीन बेसीडोकराक गांव में आयी। और वहां वे गांव में स्थित कार्य दल की उपाध्यक्ष भी बनीं।

“फ़ांग ह्वेई ज्यू”गतिविधि का मतलब है जनता की स्थिति को जानने के लिये दौरा करना, जन जीवन को उन्नत करने के लिये लाभ देना, और जनता की शक्ति को एकजुट करना। यह वर्ष 2014 से जनता को गरीबी के पंजे से मुक्त करवाने के लिये शिनच्यांग स्वायत्त प्रदेश द्वारा लागू किया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। समूचे शिनच्यांग के विभिन्न स्तरीय विभागों से अधिकारियों का चयन कर गरीबी से ग्रस्त गांवों में सेवा देने के लिये भेजा गया। इस गतिविधि में शिनच्यांग के सभी गांवों व महत्वपूर्ण कस्बों को कवर किया गया।

जब गुलमिरे अभी अभी बेसीडोकराक गांव में आयी, तो उसी समय इस गांव में कुल 344 परिवारों के 1531 लोगों में पंजीकृत गरीब परिवारों की संख्या 67 थी, और गरीबी लोगों की संख्या 245 थी। इस को याद करते हुए गुलमिरे ने कहा कि, 80वें दशक के बाद जन्म हुई पीढ़ी के रूप में हम सुधार व खुलेपन के बाद देश में छलांग लगाने वाला विकास प्राप्त होने के दौर में रहते हैं। हमारे जीवन का हर पक्ष बहुत अच्छा है। लेकिन अगर हम दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचे, तो यह देखा गया कि दक्षिण शिनच्यांग के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले किसानों का विचार बहुत पिछड़ा था। गांव में मकान भी बहुत खराब थे, जो मिट्टी ईंट से बनाये गये थे।

किसानों के प्रेरणा और सकारात्मकता को कैसे मजबूत किया जाएगा? ताकि वे परिश्रम से अपने जीवन का परिवर्तन कर सकें। गुलमिरे ने बड़ा दबाव महसूस किया।“फ़ांग ह्वेई ज्यू”कार्य दल ने गांव की कमेटी के साथ विचार-विमर्श के बाद एकमत होकर किसानों के लिये एक रात्रि पाठशाला खोलने का फैसला किया। जिससे किसानों की विचारधारा बदल सकेगी, और गरीबी उन्मूलन की एक आध्यात्मिक खिड़की भी खोली जा सकेगी। उन के अलावा क्योंकि गांव में आम तौर पर लोग सरल मिट्टी वाले मकानों में रहते थे। गांव में सड़क पर भी गंदगी थी। गांव की छवि बहुत खराब थी, और बुनियादी सुविधाएं भी पिछड़ी थीं। इसलिये गरीबी उन्मूलन कार्य का पहला कदम तो सुन्दर गांव का निर्माण करना है। इस की चर्चा में गुलमिरे ने कहा, हमने गांव में कई बार बैठकें आयोजित की हैं, और किसानों का नेतृत्व करके घरेलू कचरा निपटान, ग्रामीण सड़क वन बेल्ट का सुधार और जीवन पर्यावरण का सुधार समेत सिलसिलेवार सुन्दर गांव का निर्माण कार्यक्रम किया है। हर हफ्ते सोमवार व बुधवार को हम किसान रात्रि पाठशाला में किसानों को “सुन्दर गांव का निर्माण कार्यक्रम” का प्रसार-प्रचार करते थे। ताकि वे इस निर्माण में भाग ले सकें। फिर हमने विभिन्न परिवारों के प्रति विभिन्न प्रस्ताव तैयार किया है, और मकानों की स्थिति के आधार पर योजना बनायी है। ताकि किसानों के घर में आवासीय क्षेत्र, आंगन प्रजनन क्षेत्र और आंगन फसल रोपण क्षेत्र विभाजित किये जा सकें। साथ ही रसोई और शौचालय का सुधार भी किया गया। ध्यान से ये काम करने के बाद केवल दो वर्षों में बेसीडोकराक गांव में हर किसान का यार्ड एक आय बढ़ाने वाला आँगन बन गया।

गौरतलब है कि वर्ष 2018 में बेसीडोकराक गांव शूलो काऊंटी में जीवन वातावरण सुधार का एक मॉडल गांव बन गया। उसी साल के अंत तक गांव में रहने वाले सभी परिवार गरीबी के पंजे से मुक्त हो गये। वर्ष 2019 के अंत तक पूरे गांव के 361 परिवारों के मकानों का सुधार किया गया है।

अब अगर आप बेसीडोकराक गांव में घूमते हैं, तो यह दृश्य देखा जा सकता है कि किसानों के मकान बहुत साफ़सुथरे और रोशनीदार हैं। आँगन में फूलों और फलों की खुशबू आती है। गांव में सभी सड़कें पक्की हैं और सड़क के दोनों किनारे सौर स्ट्रीट लाइट स्थापित की गयीं। कचरा उपचार की सुविधाएं भी इधर-उधर मिल सकती हैं। गांववासी पतिगुल अब्दुर्रहीम ने बड़ी खुशी के साथ कहा कि, पहले की अपेक्षा मेरे घर में सब से बड़ा बदलाव तो जीवन बिताने का तरीका, वातावरण और आर्थिक स्थिति का बदलाव है। पहले हम मिट्टी वाले मकान में रहते थे। कभी कभार दीवार का पेंट खराब होकर गिर पड़ा। अगर वर्षा होती है, तो छत से पानी भी टपकता था। लेकिन अब यह स्थिति बिल्कुल बदल गयी है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और सरकार ने हमारे लिये सुरक्षित मकान बनाये। यह हमारे ग्रामीण लोगों के लिये एक बहुत अच्छी नीति ही है।

अब पतिगुल का मकान प्रबलित कंक्रीट से बनाया है। घर में फ्रंट यार्ड, मध्य यार्ड और बैक यार्ड होते हैं। फ्रंट यार्ड में उन्होंने अखरोट, सेब, अंगूर और सब्जियां लगायीं। और बैक यार्ड में वे 2 गाय, 5 भेड़ें और 30 कबूतर पाल रही हैं। अब उन का घर सब्जियां खाने में आत्मनिर्भर हो गया है। अतिरिक्त सब्जियां गांव के बाजार में बेची जा सकती हैं। आँगन अर्थव्यवस्था से पतिगुल की वार्षिक आय सात हजार युआन तक पहुंच सकती है।

ग्रामीण लोगों के जीवन में इतने बड़े बदलाव देखकर“फ़ांग ह्वेई ज्यू”कार्य दल की उपाध्यक्ष गुलमिरे ने कहा, पहले किसान मिट्टी मकान में रहते थे, और मिट्टी के बिस्तर पर सोते थे। अब वे अच्छी गुणवत्ता वाले मकान में रहते हैं। घर में बिस्तर, खाने की मेज़, सोफ़ा, बच्चों के लिये पढ़ाई की मेज़ सभी उपलब्ध हैं। उन के जीवन बिताने का वातावरण सुन्दर बन गया। इसलिये उन के मन में भविष्य के बारे में नयी आशा भी पैदा हुई। साथ ही आगामी जीवन के प्रति उन की मांग भी उन्नत हो गयी। पहले किसान ज़मीन में काम करने के बाद घर वापस लौटकर बगैर कपड़े बदले बिस्तर पर बैठते थे और सोते थे। लेकिन अब घर में वातावरण बहुत साफ़सुथरा है, इसलिये वे घर पहुंचते ही जूते या कपड़े बदलकर आराम करते हैं। और हर दिन नहाने की आदत भी विकसित हो गयी। उन के जीवन बिताने का तरीका बदल गया है, और जीवन का स्तर भी बड़ी हद तक उन्नत हो गया है।

हालांकि गुलमिरे के गांव में स्थित काम करने के तीन वर्षीय कार्यकाल समाप्त हुआ है, लेकिन इसके दौरान प्राप्त अनुभव की चर्चा में गुलमिरे ने कहा, बिते समय में हमने गांव के भाई बहनों के साथ बड़ी कोशिश की। जिससे हमारे गांव में ज़मीन आसमान का बदलाव हुआ है। हमारी कोशिश से उन के विचार बदल गये। और जीवन की गुणवत्ता भी उन्नत हो गयी। साथ ही गांव में काम करने से मेरे काम करने की क्षमता भी बड़ी हद तक उन्नत हो गयी। और मेरी जानकारियां भी ज्यादा समृद्ध हो गयी।

चंद्रिमा

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