विश्व को आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है चीन

2020-11-19 18:24:59

विश्व को आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है चीन

कोविड-19 महामारी के खतरे के बावजूद चीन दूसरे देशों के साथ सहयोग बढ़ाने व नए विचार पेश करने में पीछे नहीं रहा है। इतना ही नहीं वैश्विक बाज़ार की अवधारणा को चुनौती वाले देने वाली ताकतें भी चीन व संबंधित सहयोगियों को रोकने में नाकाम रही हैं। ऐसे माहौल में चीनी राष्ट्रपति ने दो दिन के भीतर लगातार दो प्रमुख मंचों को संबोधित किया। पहला ब्रिक्स देशों की बैठक और दूसरा एपेक के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की समिट में भाषण दिया। इन दोनों ही बैठकों में चीन ने विश्व को एक स्पष्ट संकेत देने का काम किया है। बात चाहे खुलेपन की हो, सहयोग की या फिर जरूरतमंद देशों को मदद देने की। चीन ने इन क्षेत्रों में तत्परता दिखाई है।

ब्रिक्स व एपेक की बैठक में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने यह बताने की कोशिश की है कि कुछ देशों की संरक्षणवाद की मुहिम के बावजूद चीन का अभियान रुका नहीं है। एक ऐसा अभियान जिसमें चीन विभिन्न राष्ट्रों को एक-साथ लेकर आगे बढ़ने और विकास पर ज़ोर देता रहा है।

चीनी नेता ने ब्रिक्स देशों की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पाँच प्रमुख आह्वान किए। जिसमें बहुपक्षवाद के साथ चलते हुए वैश्विक शांति व स्थिरता कायम करने की बात बेहद महत्वपूर्ण है। शी का यह विचार कोविड-19 महामारी से लड़ने की दिशा में भी कारगर साबित हो सकता है। क्योंकि यह एक ऐसा स्वास्थ्य संकट है, जो एकतरफावाद की मुहिम से हल नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन को लेकर चीन द्वारा की जा रही कोशिशों की भी तारीफ करनी होगी।

एपेक की सीईओ समिट में चीनी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि खुलापन देश की प्रगति का पूर्व-शर्त है। इसके जरिए उन्होंने विश्व को यह संदेश देने की कोशिश की है, चीन ने जो खुले द्वार की नीति करीब चार दशक पहले लागू की थी, उसे बंद करने का उसका कोई इरादा नहीं है। बल्कि चीनी बाज़ार अन्य देशों और निवेशकों के लिए और चौड़ा होगा। चीनी नेता ने यह भी समझाने की कोशिश की है कि अमेरिका जैसे देशों की संरक्षणवाद की कोशिश ज्यादा लंबे समय तक नहीं चलने वाली है। सहयोग और बहुपक्षवाद ही दुनिया को सही दिशा में आगे ले जा सकते हैं। 

उधर हाल में संपन्न हुए आरसीईपी समझौते में भी ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड व जापान जैसे देशों का साथ चीन को मिलना अहम कहा जा सकता है।

उम्मीद की जानी चाहिए कि इस तरह के समझौतों व बैठकों के आयोजन से विश्व में खुले बाज़ार की मुहिम ज़ोर पकड़ेगी और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कायम होगी।   

अनिल पांडेय  

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