भारत के सर्दियों में प्रदूषण के गंभीर होने से कोविड-19 के प्रसार को तेज किया जाएगा

2020-11-11 12:00:01 CRI

भारत के सर्दियों में प्रदूषण के गंभीर होने से कोविड-19 के प्रसार को तेज किया जाएगा

मानसून के खत्म होने और ग्रामीण इलाकों में पराली जलाने की चरम सीमा आने के साथ भारत धीरे धीरे सब से गंभीर प्रदूषित होने वाले सर्दियों के मौसम में प्रवेश करने वाला है। विशेषज्ञों ने कहा कि भारत के सर्दियों में प्रदूषण के गंभीर होने से कोविड-19 के प्रसार को तेज किया जाएगा।

इंडिया टडे के साथ एक साक्षात्कार में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईएमएस) के प्रभारी रणदीप गुलेरिया ने कहा कि आम तौर पर भारत के सर्दियों के मौसम में वायु प्रदूषण और गंभीर है। चीन और यूरोप के अनुसंधान से साबित है कि चाहे पीएम 2.5 में थोड़ा-सी बढ़ोतरी आने की स्थिति में कोविड-19 के पुष्ट मामलों में कम से कम 8-9 प्रतिशत का इजाफा होगा।

वायु प्रदूषण आसानी से फेफड़ों की सूजन का कारण बन सकता है, और नए कोरोनावायरस भी मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है। गंगा मैदान में प्रदूषण की स्थिति और गंभीर है, तो संभवतः गंभीर कोविड-19 के संक्रमित मामले नजर आएगी।

22 सितंबर को पत्रिका 'द लांसेट' ने चीन और यूरोप में कोविड-19 के लॉकडाउन से वायु प्रदूषण की गिरावट से स्वास्थ्य पर अल्पकालीन और दीर्घकालीन प्रभाव संबंधी एक अनुसंधान रिपोर्ट जारी की। जिस में कहा गया कि वायु गुणवत्ता के निरंतर सुधार होने से कोविड-19 की मृत्यु दर को कम किया जा सकेगा। चूंकि खराब वायु गुणवत्ता होते समय लोग श्वसन रोगों या फेफड़ों के रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, जिससे वे संभवतः और आसानी से कोविड-19 से संक्रमित हो सकेंगे।

अनुसंधान के मुताबिक महामारी के लॉकडाउन के दौरान चीन ने वायु प्रदूषण से 24.2 हजार की मौत से बचाया, जबकि यूरोप में वायु प्रदूषण से 2190 की मौत कम की गयी है। अनुमान है कि 2020 के अंत तक चीन में वायु प्रदूषण से मरने वाले लोगों की संख्या में 76.4 हजार कम की जाएगी, जबकि यूरोप में यह संख्या 13.6 होगी।

वैज्ञानिक पत्रिका वातावरण प्रदूषण पर जारी एक अध्ययन ने भी समान विचार प्रकट किया। डेनमार्क के दो चिकित्सक प्रोफेसरों के अध्ययन से पता चला है कि इटली में महामारी से उच्च मृत्यु दर स्थानीय वायु प्रदूषण से संबंधित होगी। कारण यह है कि उत्तरी इटली भारी उद्योग क्षेत्र है। जैसे कि ट्यूरिन वाहन विनिर्माण उद्योग का एकत्र क्षेत्र है, जहां का बहुत गंभीर वायु प्रदूषण है। जबकि मध्यम और दक्षिण इटली के सिसिली और सार्डिनिया में हल्का उद्योग और कृषि प्राथमिकता है, इसलिए वायु प्रदूषण भी अपेक्षाकृत कम है। आंकड़े बताते हैं कि उत्तरी इटली में कोविड-19 की मृत्यु दर 12 प्रतिशत तक पहुंची, जबकि अन्य क्षेत्रों में मृत्यु दर केवल 4.5 प्रतिशत है।

इधर के वर्षों में भारत में वायु प्रदूषण की स्थिति आशावान नहीं है। 2019 विश्व वायु गुणवत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व के 30 सबसे गंभीर वायु प्रदूषण होने वाले शहरों में 21 भारत में हैं और 6 भारतीय शहर पहले दस में शामिल हैं। भारत में हर लाख मृत लोगों में 14.7 फिसदी लोग वायु प्रदूषण से संबंधित रोगों से मरते हैं।

भारत में वायु प्रदूषण के अनेक कारण है। ग्रामीण इलाकों में पुआल जलाने से पैदा हुआ कोहरा, शहरों में वाहनों की निकासी, सॉट, कंस्ट्रक्शन डस्ट और फैक्ट्री एग्जॉस्ट प्रदूषण के सभी स्रोत हैं। सर्दियों के मौसम में प्रदूषण सामग्रियों की निकासी के बढ़ने, नीचे तापमान और बगैर हवा मौसम भी वायु प्रसार के लिए अनुकूल नहीं है।

नयी दिल्ली में वायु प्रदूषण का निपटारा करने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हाल में वातावरण के संरक्षण के लिए एक नयी गतिविधि शुरू की और ड्राइवरों के ट्रैफिक लाइट का इंतजार करते हुए कार को बंद करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन के मुताबिक नयी दिल्ली में कुल 1 करोड़ पंजीकृत वाहन हैं। चाहे सिर्फ 10 लाख लोग इस गतिविधि में शामिल करते, तो हर साल कम से कम 1.5 टन के पीएम 10 और 0.4 टन के पीएम 2.5 की निकासी को कम किया जा सकता है। प्रदूषण की निकासी को कम करने के साथ ड्राइवरों के लिए और ज्यादा ईंधन तेल की किफायत भी की जा सकती है।

आंकड़े से जाहिर है कि सामान्य स्थिति में एक गाड़ी रोज 15 से 20 मिनटों के लिए ट्रैफिक लाइट का इंतजार करती है, जो कम से कम 200 मिलीलीटर इंधन की खपत करती है। हर साल में इस का खर्च करीब 7 हजार रुपये हैं।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अनेक सालों में पराली जलाने से नयी दिल्ली का वायु प्रदूषण अति गंभीर है। दिल्ली हरसंभव कदम उठाकर इसका निपटारा करने की कोशिश कर रहा है।

दिल्ली वातावरण मंत्री गोपल राई ने कहा कि स्थानीय सरकार ने 2500 पर्यावरण कानून प्रवर्तन अधिकारियों के एक गतिविधि में भाग लेने के लिए चुने हैं। 21 अक्तूबर से 15 नवम्बर तक उन्हें दिल्ली के 100 क्रॉस रोड में तैनात करवाया जाएगा।

गोपल राई ने कहा कि इस गतिविधि का मकसद पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है। उन के मुताबिक अब इन अधिकारियों का पूरा प्रशिक्षण किया जा चुका है। सब लोग एक ही पोशाक में इवेंट प्लेकार्ड उठाते हुए क्रॉसरोड पर खड़ें रहेंगे और इस गतिविधि में भाग लेने वाले ड्राइवरों को रोज भेंट करेंगे।

गोपल राई ने कहा कि दिल्ली का वायु प्रदूषण सब लोगों को नुकसान पहुंचाता है। सब लोगों को इस मसस्या का हल करने का कर्तव्य निभाना चाहिए और प्रदूषण पर नियंत्रित कर वातावरण की रक्षा करनी चाहिए।

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