05 नवंबर 2020

2020-11-05 14:33:52 CRI

अनिलः नीदरलैंड में उस समय बड़ा हादसा होते हुए टल गया जब एक मेट्रो ट्रेन अनियंत्रित होकर बैरियर तोड़ते हुए स्टेशन से बाहर निकल कर एक विशाल व्हेल मछली की मूर्ति पर लटक गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोंगटे खड़े कर देने वाले इस हादसे में ट्रेन का अंडरकैरेज बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया और ट्रेन की पिछली खिड़कियां भी टूट गईं। हालांकि, राहत की बात ये है कि किसी यात्री को चोट तक नहीं आई। इसे एक तरह का चमत्कार ही कहा जा सकता है।

दरअसल, नीदरलैंड के स्पिजेनकिसे शहर के एक मेट्रो स्टेशन पर यह हादसा हुआ। ट्रेन ने अचानक से अपना नियंत्रण खो दिया और ट्रैक के अंत तक जाकर आगे हवा में लटक गई तस्वीरों को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि हादसा कितना भयानक हो सकता था। इस खतरनाक हादसे में व्हेल मछली की पूंछ ने बड़ी अहम भूमिका निभाई। व्हेल मछली की पूंछ ने ट्रेन को आगे जाने से रोक लिया।

नीलमः हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय सुरक्षा प्राधिकारण ने विशेषज्ञ की एक टीम गठित की। घटना के बारे में पता लगाने के लिए अधिकारी इस मेट्रो ट्रेन के ड्राइवर से पूछताछ कर रहे हैं। वहीं राहत बचाव दल के द्वारा यात्रियों को मेट्रो से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है और ट्रेन को भी स्पॉट से हटाने की कोशिश हो रही है।

रिजेनमंड क्षेत्रीय सुरक्षा प्राधिकरण के कार्ली ग्रेटर ने एएफपी को बताया कि मेट्रो ट्रेन ट्रैक से आगे निकल गई और यह स्मारक व्हेल मछली की पूंछ पर जाकर हवा में रूक गई। इस हादसे के बाद ट्रेन ड्राइवर से गहन पूछताछ की गई। सुरक्षा प्राधिकरण के मुताबिक, दुर्घटना के कारणों की जांच अभी भी की जा रही है।

अनिलः वहीं ऑस्ट्रेलिया बेस्ड एक मल्टीनेशनल डिजिटल फर्म के मालिक आमिर कुतुब, अभी महज 31 साल के हैं। आमिर के बिजनेस का टर्नओवर दस करोड़ है। इनकी कंपनी की मौजदूगी कुल चार देशों में है। एक समय ऐसा भी था जब आमिर एयरपोर्ट पर सफाई का काम किया करते थे। इतना ही नहीं आमिर ने घरों तक अखबार पहुंचाने का काम भी किया। लेकिन उन्हें खुद का व्यवसाय करने का जुनून इस कदर उन पर छाया था कि कोई भी चुनौती डिगा नहीं सकी।

आमिर कुतुब अलीगढ़ की एक मिडिल क्लास फैमिली से ताल्लुक रखते हैं। इनके पिताजी सरकारी नौकरी में और मां हाउस वाइफ हैं। आमिर के पिता की ख्वाहिश थी कि बेटा बड़ा होकर डॉक्टर या इंजीनियर बने। इसके लिए उनके पिता ने 12वीं के बाद बीटेक में बीटेक में एडमिशन करवा दिया। लेकिन आमिर को पढ़ाई में बिल्कुल दिलचस्पी नहीं थी।

बीटेक के कोर्स के दौरान सेकंड ईयर में आमिर को सोशल नेटवर्किंग ऐप बनाने का विचार आया। उनके इस विचार को सुन दोस्तों ने मजाक उड़ाते हुए बोला कि मैकेनिकल ब्रांच का होकर ऐप बनाने की बात कर रहे हो। लेकिन आमिर इसके लिए कोडिंग सीखनी शुरू कर दी। कुछ दिनों तक कोडिंग सीखने के बाद आमिर एक दोस्त के साथ मिलकर एक सोशल नेटवर्किंग ऐप बनाई और उसे लॉन्च कर दिया। हफ्तेभर में ही दस हजार स्टूडेंट्स ने इस एप को ज्वॉइन कर लिया।

नीलमः इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद आमिर को दिल्ली में होंडा कंपनी में जॉब मिल गई। होंडा में काम करते हुए उन्होंने मैन्युअल काम को बदलकर ऑनलाइन कर दिया। इस काम से कंपनी के जीएम काफी खुश हुए और उनके ऑनलाइन सिस्टम को कई जगह लागू कर दिया। हालांकि, अपना बिजनेस करने के जुनून में एक साल बाद उन्होंने होंडा कंपनी की जॉब छोड़ दी।

काफी सोच-विचार करने के बाद जब आमिर को कोई बिजनेस नहीं समझ में आया, तो उन्होंने वेबसाइट डिजाइनिंग का फ्रीलांसिंग काम करना शुरू कर दिया। फ्रीलांसिंग के दौरान ही आमिर को ऑस्ट्रेलिया, यूएस, यूके के क्लाइंट मिले। उन्हीं में से कुछ ने सलाह दी कि तुम विदेश जाकर अपना बिजनेस सेट क्यों नहीं कर रहे? क्लाइंट की सलाह को मानकर आमिर स्टूडेंट वीजा पर ऑस्ट्रेलिया पहुंचे और वहां के एक एमबीए कॉलेज में एडमिशन लिया।

अनिलः एमबीए करने के लिए फर्स्ट सेमेस्टर के लिए कुछ स्कॉलरिशप मिल गई थी। कुछ पैसा घर से मिल गया था। लेकिन ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के बाद दूसरे सेमेस्टर की फीस चुनौती बन गई। ऐसे में आमिर जॉब की तलाश में लग गए। उन्होंने करीब सौ से डेढ़ सौ कंपनियों में अप्लाय किया लेकिन कहीं भी नौकरी नहीं मिली। क्योंकि वो लोग भारत के एक्सपीरियंस को मान नहीं रहे थे। तीन महीने की कोशिश के बाद आमिर को एयरपोर्ट पर क्लीनिंग का काम मिला। इस काम के लिए उन्हें 20 डॉलर प्रतिघंटा मिलता था। दिन का जॉब होने के कारण उन्हें पढ़ने का समय नहीं मिल पा रहा था। इसके बाद उन्होंने क्लीनिंग का काम छोड़ रात 3 बजे से सुबह 7 बजे तक घरों में अखबार डालने का काम करना शुरू किया।

नीलमः अब एक और जानकारी। चीन में एक आदमी के आंखों से डॉक्टर ने 20 जीवित कीड़े निकाले हैं। बताया जाता है कि इस व्यक्ति को काफी दिनों से आंखों में जलन, दर्द के साथ-साथ कुछ अजीब महसूस हो रहा था। लेकिन वो इन सब चीजों को ये सोचकर नजरअंदाज करता रहा कि ऐसा थकान के कारण हो रहा होगा। बता दें कि इस शख्स के आंखों में ये कीड़े करीब सालभर से पल रहे थे। तकलीफ बढ़ने के बाद ये शख्स डॉक्टर से मिला।

वान नामक इस शख्स की उम्र 60 साल है। आंखों में दर्द की शिकायत मिलने पर वह डॉक्टर से मिला, जहां सर्जरी के दौरान ही उसकी आंख की पलक से कीड़ों का गुच्छा निकाला गया। ये कीड़े जिंदा थे, जिसे देख डॉक्टर भी चौंक गए। चीनी मीडिया में सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, मरीज की आंख में करीब 12 महीने से कीड़े पल रहे थे। मरीज को जब आंखों में अजीब सा महसूस हुआ तो वह डॉक्टर के पास पहुंचा। डॉक्टर ने आंखों की जांच के दौरान देखा कि मरीज की दाईं पलक के नीचे कीड़े पल रहे थे। कीड़े गुच्छे के रूप में मौजूद थे।

उस व्यक्ति को स्पोर्ट्स एक्टविटी का काफी शौक है। सर्जरी कर डॉक्टर्स ने उपनाम की आंखों से कीड़ों को निकाल दिया। डॉक्टर्स का कहना है कि जो कीड़े पलकों में मिले, उनमें लार्वा भी मौजूद था। उनका मानना है कि ये कीड़े मरीज की आंखों में आउटडोर वर्कआउट के दौरान पहुंचे। उपनाम को शुरू में उसे हल्की तकलीफ महसूस होती थी। लेकिन तकलीफ बढ़ने के बाद वो पूर्वी चीन के सूचोउ म्यूनिसिपल अस्पताल पहुंचा। उसने अस्पताल में डॉक्टर को बताया कि उसे पिछले करीब एक साल से आंखों में कुछ अटका हुआ अजीब सा महसूस हो रहा है। मरीज का इलाज करने वाले डॉ. शी के मुताबिक, मरीज को शायद मक्खियों ने काटा होगा और मक्खियों के जरिए ही ये कीड़े आंखों तक पहुंचे होंगे। डॉक्टर्स के अनुसार, मरीज की आंखों में पाए गए कीड़े थेलेजिया कैलीपेडा प्रजाति के हैं, जो आंखों में संक्रमण फैलाने के लिए जाने जाते हैं। आमतौर पर ये परजीवी बिल्लियों और कुत्ते में पाए जाते हैं। फिलहाल मरीज की सर्जरी सफल रही है और कीड़े निकालने के बाद मरीज अब रिकवर हो रहा है।

अनिलः अब भारत की चाय से जुड़ी जानकारी। दोस्तो, इंडिया में लगभग हर घर में सुबह-सुबह चाय बनने की महक से ही लोगों नींद खुलती है। चाय हम सभी को ताजगी भरा अहसास दिलाती है। भारत में असम की चाय के तो कहने ही क्या। असम के बगानों में चाय की कई प्रजातियों की खेती होती है। हाल ही में असम में दुर्लभ प्रजाति वाली चायपत्ती ने खास रिकॉर्ड बनाया है। इस चायपत्ती को नीलामी केंद्र पर 75 हजार रुपए प्रति किलो की कीमत पर बेचा गया है।

बता दें कि मनोहारी गोल्ड टी खास तरह की दुर्लभ चायपत्ती है। इस चाय को गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र पर 75 हजार रुपए प्रति किलो की कीमत पर बेचा गया है। मनोहारी गोल्ड टी असम में इस साल दर्ज चाय की सबसे ऊंची कीमत है। इस खास चायपत्ती की खेती करने वाले मनोहारी टी स्टेट का कहना है कि इस साल इसकी केवल 2.5 किलो पैदावार हुई। कुल पैदावार में से 1.2 किलो चायपत्ती की नीलामी हुई है।

मनोहारी टी स्टेट के डायरेक्टर राजन लोहिया के मुताबिक, ये खास तरह की चायपत्ती होती है, जिसे सुबह 4 से 6 बजे के बीच सूरज की किरणें जमीन पर पड़ने से पहले तोड़ा जाता है। इस चायपत्ती का रंग हल्का मटमैला पीला होता है। इतना ही नहीं ये चायपत्ती अपनी खास तरह की खुशबू के लिए भी मशहूर है।

नीलमः असम में इस दुर्लभ चायपत्ती की खेती 30 एकड़ में की जाती है। इस चायपत्ती के पौधों से पत्तियों के साथ कलियों को तोड़ा जाता है, फिर इन्हें फर्मेंटेशन की प्रोसेस से गुजारा जाता है। फर्मेंटेशन के दौरान इस चायपत्ती का रंग हरा से बदलकर भूरा हो जाता है। इसके बाद सुखाने पर ये चायपत्ती सुनहरे रंग की हो जाती है।

डेक्कन हेराल्ड न्यूज पेपर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लॉकडाउन, मानसून और बाढ़ का सीधा असर भी असम के चाय बगानों पर पड़ा है। चायपत्ती उद्योग इस साल 1 हजार करोड़ के घाटे से जूझ रही है। लेकिन हाल ही में हुए मनोहारी गोल्ड टी की नीलामी ने कुछ राहत पहुंचाई है।

अनिलः इसी जानकारी के साथ जानकारी देने का सिलसिला यहीं संपन्न होता है। अब समय हो गया है श्रोताओं की टिप्पणी का।

पहला पत्र हमें आया है पंतनगर, उत्तराखंड से वीरेंद्र मेहता का। लिखते हैं, वैसे तो हम सभी जानते हैं अर्थ में रहने वाले सभी प्राणियों की एक निश्चित अवधि तो है ही, पर किसी की ज्यादा तो किसी की कम उम्र की अवधि रहती है। वहीं आज के टी टाइम प्रोग्राम के अंक में आपने कुत्तों की जिंदा रहने की अवधि के बारे में बताया पर कुछ जीव-जंतुओं की बहुत ही कम तो कुछ की कि बहुत ज्यादा उम्र होती है । और यह उम्र उनकी अलग-अलग नस्लों पर भी निर्भर करती है जैसा कि आपने बताया ।और वही फर्टिलिटी इंटेक्स के बारे में संक्षिप्त संक्षिप्त में बताया गया जानकारी अच्छी लगी । उदाहरण के लिए ले लीजिए फ्लाइ की उम्र लगभग 24 घंटे से भी कम की होती है । मादा मच्छर की एक महीने, ड्रैगनफ्लाई की 4 महीने , चूहे की 1 साल , कबूतर की 4 साल , मधुमक्खी की 5 साल , मुर्गी की 9 साल , टाइगर 15 साल , बिल्ली 16 , गाय की 20 साल , रानी चींटी की 20 से 30 साल , जाइंट पांडा की 35 साल ,घोड़े की 40, साल ब्लू व्हेल की 90 साल ,कछुए की लगभग 50 से150 साल और कोरल रीफ की 400 साल तक की उम्र होती है । और वही उम्र की कालानुक्रमिक व जैविक परिभाषा का मतलब भी समझा । अर्थात हमें भी अपनी जैविक गुणवत्ता पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए स्वस्थ जीवन के लिए । वही नीलम जी द्वारा संक्षिप्त में बताया गया कि पौधे वातावरण के लिए किस तरह फेफड़ों का कार्य करते हैं । हमें भी कम से कम अपने आसपास के वातावरण में हरियाली को लेकर जागरूक रहना चाहिए । हरियाली में हमारा मन प्रसन्न चित्त ही नहीं बल्कि एक प्राकृतिक सौंदर्य और प्राकृतिक आनंद भी मिलता है । वही कामरान के बारे में सुना जिन्होंने 50 हजार किलोमीटर साइकिल चलाकर 43 देशों की यात्रा की सचमुच उनकी इस हिम्मत , जज्बे और इस अनोखे शौक को सलाम करता हूं। जबकि मध्यप्रदेश के रतलाम में मां दुर्गा के मंदिर में अनोखे पत्थर के बारे में सुना। जानकारी रोचक लगी। सुंदर प्रोग्राम की प्रस्तुति के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद !!

वीरेंद्र मेहता आपने कई जीव-जंतुओं के लाइफ स्पेन के बारे में हमारे साथ जानकारी साझा की, इसके लिए शुक्रिया। साथ ही पत्र भेजने और प्रोग्राम के बारे में टिप्पणी करने के लिए धन्यवाद।

नीलमः अब पेश है खंडवा मध्य प्रदेश से दुर्गेश नागनपुरे का पत्र। लिखते हैं, आपको हमारा सादर प्रणाम और शुभ संध्या। हमें पिछला टी टाइम प्रोग्राम बहुत पसंद आया। जिसमें आपने कई रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारियां हम तक पहुंचाई। हमें क्रमानुसार कुत्ते की उम्र, पेड़-पौधों,50 हजार किलोमीटर साइकिल चलाकर 43 देशों की यात्रा करने वाले शख्स कामरान जी और हमारे मध्यप्रदेश राज्य के रतलाम में मां दुर्गा के मंदिर में स्थित एक अनोखे पत्थर के बारे में बहुत ही विस्तार से जानने को मिला। वहीं कार्यक्रम में हिन्दी गीत, श्रोताओं की प्रतिक्रियाएं और मजेदार जोक्स बहुत ही मनोरंजक लगे । धन्यवाद। दुर्गेश जी हमें पत्र भेजने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

अनिलः अब पेश है अगला पत्र। जिसे भेजा है खुर्जा यूपी से तिलक राज अरोड़ा ने। लिखते हैं कि हमें टी टाइम कार्यक्रम सुनकर गर्व की अनुभूति होती है। लिखते हैं 29 अक्टूबर का टी-टाइम सुना और पसंद आया। कार्यक्रम में जानवरों और इंसानों की उम्र के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी सुनवायी, जो कि काबिले तारीफ लगी। वहीं प्रदूषण को समाप्त करने के लिये पेड़-पौधों की क्या भूमिका है, इस विषय पर जानकारी सही लगी।

कामरान ने 43 देशों की यात्रा साईकिल से 50 हजार किलोमीटर का सफर तय किया, यह जानकर बहुत ही खुशी हुई। कामरान की इस हिम्मत के लिए हम दिल से शुक्रिया अदा करते हैं।

वहीं रतलाम शहर के बेरछा गांव मे अम्बे माता के मंदिर से कुछ दूर पर रखे पत्थर को पत्थर मारने से घंटी की तरह आवाज सुनायी देती है। यह घटना किसी चमत्कार से कम नही है। मौका मिला तो इस अम्बे माता के मंदिर दर्शन करने जरूर जाएंगे।

इसके साथ ही कार्यक्रम में फिल्मी गीतों ने भरपूर मनोरंजन किया। श्रोता बंधुओं के विचार पत्रों के माध्यम से सुने और पसंद आये। हालांकि कार्यक्रम का समय केवल पच्चीस मिनट का है, फिर भी कार्यक्रम सुनने का आनंद घंटों तक महसूस होता है।

बेहतरीन कार्यक्रम की प्रस्तुति के लिए आप बधाई के पात्र हैं। तिलक राज जी हमें पत्र भेजने और प्रोग्राम के बारे में टिप्पणी करने के लिए शुक्रिया।

नीलमः दोस्तो, अब अगला पत्र। जिसे भेजा है, केसिंगा, उड़ीसा से सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं साप्ताहिक "टी टाइम" का ताज़ा अंक भी पूरे मनोयोग से सुना, जिसमें दी गयी तमाम जानकारी महत्वपूर्ण लगी।

इंसान, जानवर एवं पेड़-पौधों की उम्र से संबंधित कालानुक्रमिक परिभाषा पर दी गयी शोधपूर्ण एवं विस्तृत जानकारी अत्यन्त महत्वपूर्ण लगी।पेड़-पौधे वातावरण के लिए फेफड़ों का काम करते हैं, परन्तु सभी पेड़ या पौधे एक समान स्तर पर प्रदूषण खत्म नहीं करते, यह जाानकारी भी काफी विज्ञानसम्मत एवं ज्ञानवर्ध्दक लगी। जानकारियों के क्रम में पिछले नौ वर्षों में साइकिल के ज़रिये पचास हज़ार किलोमीटर का फासला तय कर 43 देशों की यात्रा कर चुके कामरान की दास्तां भी जीवटता से परिपूर्ण लगी। हम उनके प्रति अपने मक़सद में सफल होने की कामना करते हैं।

वहीं मध्यप्रदेश में रतलाम के समीप ग्राम बेरछा के पास प्राचीन पहाड़ी पर माता दुर्गा के मंदिर में स्थित एक ऐसे पत्थर के बारे में दी गयी जानकारी विस्मयकारी लगी कि उस पत्थर से किसी अन्य पत्थर के टकराने पर धातु पीटने जैसी आवाज़ निकलती है। वास्तव में, क़ुदरत के रहस्यों को जानना आसान नहीं है।

कार्यक्रम में पेश श्रोता-मित्रों की राय एवं चुटकुले काफी मनभावन लगे। जुटाई गयी इस तमाम जानकारी के लिये आपका हृदयतल से साधुवाद।

अनिलः सुरेश जी पत्र भेजने और टिप्पणी करने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। इसके साथ ही उन्होंने ये कुछ मज़ेदार लाइनें भेजी हैं।

साइकिलिंग किसी भी अर्थव्यवस्था (GDP) के लिए, हानिकारक है....! ये हास्यास्पद लगता है परन्तु सत्य है।

एक साइकिल चलाने वाला,

देश के लिए बहुत बड़ी आपदा है,

क्योंकि -

वो गाड़ी नहीं खरीदता

वो लोन नहीं लेता

वो गाड़ी का बीमा नहीं करवाता

वो तेल नहीं खरीदता

वो गाड़ी की सर्विसिंग नहीं करवाता

वो पैसे देकर गाड़ी पार्किंग नहीं करता

वो मोटा (मोटापा) नहीं होता

जी हां .....यह सत्य है कि स्वस्थ व्यक्ति अर्थव्यवस्था के लिए सही नहीं है, क्योकि -

वो दवाईयां नहीं खरीदता

वो अस्पताल व चिकित्सक के पास नहीं जाता

वो राष्ट्र की GDP में कोई योगदान नहीं देता।

इसके विपरित एक Fast Food की दुकान 30 नौकरी पैदा करती है-

10 हृदय चिकित्सक

10 दंत चिकित्सक

10 वजन घटाने वाले

बुद्धिमत्तापूर्वक चुनाव करें ।_

*नोट :-*

*पैदल चलना इससे भी खतरनाक है, क्योंकि पैदल चलने वाला तो साइकिल भी नहीं खरीदता।*

बहुत-बहुत शुक्रिया सुरेश जी....

इसी के साथ श्रोताओं की टिप्पणी यही संपन्न होती है। अब समय हो गया है जोक्स का।

पहला जोक

बीवी ने पति को मैसेज किया-

आपको पड़ोसन कैसी लगती है..?

बीवी को खुश करने के लिए पति ने रिप्लाई किया -

एकदम बंदरिया जैसी...!

.बीवी - ठीक है तो आते समय मेरे लिए दो साड़ी लेते आना,

नहीं तो ये मैसेज पड़ोसन को दिखा दूंगी...!!!

दूसरा जोक..

आज का ज्ञान

दुख क्या है..?

.सात बजे नींद खुले और पता चले अब वापस नहीं सोना..!

.खुशी क्या है..?

.रात को दो बजे नींद खुले और पता चले कि

अभी पांच घंटे और सोना है..!

.डबल खुशी क्या है..?

.रात को नींद खुले और पता चले

कल तो छुट्टी है...!!!

तीसरा जोक

टीसी - ये विकलांग लोगों का डिब्बा है,

इसमें क्यों सफर कर रहे हो..?

.यात्री - जी सर मेरे साथ ये है..!

.टीसी - ये तो आम है..!

.यात्री - जी हां, लेकिन ये लंगड़ा आम है...!!

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