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13-12-02:खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है।
2014-01-02 18:07:45

न्यूशिंग स्पेशल में मैं हेमा कृपलानी करती हूँ आप सब का हार्दिक स्वागत। खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है। कामयाब इंसान खुश रहे न रहे, खुश रहने वाला इंसान जरुर कामयाब होता है। इस नेक विचार के साथ आज मैं आपको एक ऐसी चीनी महिला की दर्दभरी कहानी बताना चाहूँगी। जिसे सुन आपको भी विश्वास हो जाएगा कि ईश्वर अगर एक द्वार बंद करने से पहले हमारे लिए दूसरा द्वार पहले खोलता है।

किसी भी इंसान के साथ इससे बुरा क्या हो सकता है कि वह मलबे के नीचे जिंदा दबा रहे। जिंदा दफन रहे। भगवान कभी किसी के साथ ऐसा न करें और हममें से किसी को भी ऐसी स्थिति का सामना कभी न करना पड़े। लेकिन 28 वर्षीय लियाओ झ के लिए 26 घंटे जीवन के ऐसे थे जहाँ वे जिंदा दफन थी, मलबे के नीचे। दक्षिण पश्चिमी चीन के स्छवान प्रांत के मिंजू शहर के हंवांग कस्बे से आने वाली लियाओ झ वर्ष 2008 मई में स्छवान में रिक्टर स्केल पर 8 तीव्रता वाले भूकंप में मलबे के नीचे जिंदा दबी पड़ी थी। सुनने में ही कितना भयावह लगता है। दुर्भाग्यवश लियाओ झ के लिए उसके दुखों का अंत मलबे से बाहर जिंदा निकलने तक सीमित नहीं था। उसे उसकी भारी कीमत अपनी दोनों टाँगें, अपनी सास और दस महीने की बेटी को गंवाकर चुकानी पड़ी। स्छवान में आए भूकंप ने अन्य लोगों की तरह लियाओ झ की भी जिंदगी में भूकंप ला उसे पूरी तरह बदल दिया। भूकंप ने कई लोगों की जिंदगियों को तितर-बितर कर रख दिया। उसके घाव अभी पूरी तरह भरे भी नहीं थे कि उसके पति ने भी उसे तलाक दे दिया। अपना और अपनों को खो देने के बाद लियाओ झ की जगह कोई भी होता तो बुरी तरह टूट जाता। लेकिन मज़बूत इच्छाशक्ति रखने वाली इस महिला ने हिम्मत का साथ कभी नहीं छोड़ा। पूरी तरह से तहस-नहस, तितर-बितर हुए जीवन के तारों को जोड़े रखा लियाओ ने अपने सपनों के बल पर और उसका एक ही सपना और शक्ति रह गई थी वह था उसका नृत्य के लिए प्रेम।

कभी-कभी लियाओ खुद से ही पूछती, क्या मैं समय के चक्र को फिर से घुमाकर पीछे ले जा सकती हूँ या मैं कोई दूसरा फैसला ले सकती हूँ जिससे मेरा जीवन पूरी तरह बदल जाए। हालांकि, वह इन सवालों के जवाब नहीं खोज पाती थीं। जब वह पीछे मुड़ खुद के साथ गुज़रे वक्त के जख्मों को कुरेदती है तो समझ पाती है कि दुर्भाग्य के भेष में ईश्वर ने उसके लिए सौभाग्य भेजा है। लियाओ 12 मई 2008 का वह मनहूस दिन कभी नहीं भूल सकती। जब रिक्टर स्केल पर 8 तीव्रता वाले भूकंप ने स्छवान प्रांत को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया था। लियाओ अपने घर हंवांग में थी उस समय अपनी सास और चोंगचोंग अपनी बेटी के साथ। पलक झपकने में भी जितना समय लगता है उससे भी कम में वे तीनों अपने ही घर के मलबे के नीचे दबे पड़े थे। उसकी बेटी की तत्काल मृत्यु हो गई थी। लियाओ, मलबे के नीचे दबी पड़ी थी और उसे तब एहसास हुआ कि उसकी बेटी मर चुकी है जब उसके हाथ ठंडे पड़ गए थे। उसके कुछ क्षण बाद उसकी सास ने भी भूकंप के कारण लगी गंभीर चोटों के आगे अपने घुटने टेक दिए।

लियाओ ने कहा, मुझे लगता है आपका दिमाग सबसे ज्यादा शांत तब होता है जब आपके सामने मौत खड़ी होती है। 10 घंटे से ज्यादा समय तक मलबे के नीचे दबे-फंसे होने के कारण मैं लगभग हार मान चुकी थी। मेरे पिताजी की आ रही लगातार आवाज़ों के कारण ही मैं शायद वापस जिंदा हो पाई। मेरे पिताजी भूकंप की खबर सुनने के कुछ समय बाद ही हमारे कस्बे में पहुँच गए थे। मैं उनकी आवाज़ का जवाब नहीं देना चाहती थी क्योंकि अपनी नन्ही-सी बेटी को खोने के बाद मुझ में भी कहाँ जान बची थी। बड़े झटके के कई घंटों के बाद भूकंप के आए अन्य झटकों के बाद मैं सुन सकती थी कि कोई मेरे पिताजी से वहाँ से जाने के लिए बोल रहा था। कोई कह रहा था कि यहाँ रुकने का कोई फायदा नहीं, क्योंकि मैं मर चुकी हूँ। लेकिन मेरे बूढ़े पिताजी वहाँ से नहीं हिले और मैंने उन्हें यह कहते सुना कि तुम्हें कैसे पता कि मेरी बेटी मर चुकी है। मुझे पक्का विश्वास है कि वह अब भी जिंदा है। आपको उसे मृत कहना का कोई हक नहीं बनता। अपने पिताजी के इन शब्दों को सुन मैं दुबारा होश में आई और मेरे अंदर दुबारा जीने की इच्छा को जगाया। मुझे एहसास हुआ कि मेरा कोई हक नहीं बनता कि मैं अपने माता-पिता को यह दुख पहुँचाऊँ कि उनकी इकलौती संतान उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं रही। जैसा दर्द मैं सह रही हूँ अपनी नन्ही-सी गुड़िया को खोकर। मैं मलबे के नीचे 26 घंटे दबी पड़ी थी जब तक की मुझे सुरक्षित बचाया गया। लियाओ, ने बताया कि एक मैं ही अकेली भाग्यशाली थी जिसे पूरी इमारत के मलबे के नीचे से जिंदा निकाला गया। भूकंप से पहले लियाओ एक स्थानीय स्कूल में बच्चों को नृत्य सीखाती थीं। उसे अपने काम से बेहद प्यार था और संगीत की धुन पर नाचना उसका जुनून। उसका परिवार सुखी-खुशहाल परिवार था। उसकी शादी एक ऐसे आदमी से हुई थी जो उसे दिलो-जान से चाहता था, प्रेम करता था। शादी से पहले एक साल तक उनके बीच प्रेम-प्रसंग रहा। शादी हुई और चोंगचोंग का जन्म हुआ। इस आपदा ने लियाओ का जीवन पूरी तरह से बदल कर रख दिया।

लियाओ को मलबे से बाहर निकालने के बाद अस्पताल ले जाया गया। उसकी टाँगे जो उसके घर के फर्श के टुकडों के नीचे लगभग 26 घंटे तक दबी पड़ी थी, सुन्न पड़ चुकी थी जब तक उसे अस्पताल के आपातकालीन कक्ष तक पहुँचाया गया। उसने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए जिस पर डॉक्टरों ने उसकी रजामंदी ली ताकि वे उसके दोनों पैरों को काट सकें। उसके बाद डॉक्टरों ने उससे पूछा कि क्या वह इस ऑपरेशन का मतलब समझती हैं, इसे सुनकर उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे और उसने केवल हाँ, में अपना सिर हिलाया। इस क्षण उसके मन में केवल यही विचार चल रहे थे कि अब जब मैं इस आपदा से बाहर निकल आई हूँ तो अब मुझे एक अर्थपूर्ण जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए।

लियाओ के ऑपरेशन के एक महीने बाद 58वीं चीनी मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के आयोजक भूकंप पीड़ितों से मिलने के लिए अस्पताल में आए। लियाओ से आयोजक कमेटी के एक सदस्य ने पूछा कि क्या वह मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के मंच पर नृत्य प्रदर्शन करना चाहेंगीं। लियाओ ने तुरंत हामी भरी क्योंकि वह भी मंच पर लौटने के लिए उत्सुक थीं।

अगले ही दिन आयोजक कमेटी ने तीन कोरयोग्राफर्स को लियाओ को नृत्य सीखाने के लिए भेजा। उन्होंने उसके लिए एक विशेष नृत्य कोरयोग्राफ किया था जहाँ लियाओ नृत्य करते समय एक ड्रम पर झुककर नृत्य करती है। लियाओ को पहले ही दिन अभ्यास के दौरान यह एहसास हो गया था कि उसे अपने घुटनों के बल संतुलन बनाकर नृत्य करने में कठिनाई होगी क्योंकि घुटनों के नीचे से ही उसकी टाँगें काटी गईं थीं।

लियाओ उस रात सो नहीं सकी, पूरी रात बिस्तर पर पड़े-पड़े बस यही सोचती रही कि क्या उसे यह मौका गवां देना चाहिए। लेकिन यह विचार उसकी हिम्मत और इच्छाशक्ति के आगे बहुत छोटे लग रहे थे जब उसे याद आया कि कैसे वह मलबे के नीचे दबी पड़ी थी और उस समय उसके लिए अपने शरीर को हिलाना तक नामुमकिन था। इसी विचार के साथ उसने फैसला किया कि मैं अपने जीवन में सबसे बुरा वक्त देख चुकी हूँ। जिसने मौत का सामना कर लिया हो तो वह इस नृत्य प्रदर्शन से क्या घबराएगी। और यह सोच उसने यह चुनौती लेने का फैसला कर लिया।

हर दिन अभ्यास के बाद लियाओ का पूरा शरीर बहुत दर्द करता था। लेकिन फिर भी उसने अभ्यास जारी रखा। ताकि वह प्रदर्शन कर सके जिसके लिए उसने अपनी टाँग का दूसरा ऑपरेशन तक स्थगित कर दिया।

लियाओ अपनी पीड़ा को याद करते हुए बताती हैं कि मेरे दर्द के डर ने ऑपरेशन के बाद कुछ दिन तक तो मेरी जान ले ली थी। उसके बाद एक दिन मैं हांगकांग फिल्म शामो देख रही थी। उस फिल्म का हीरो छंग दाओलियांग, बॉक्सिंग का अभ्यास करना चाहता था लेकिन अपने हाथ में लगी गंभीर चोट पर मार के डर से घबरा रहा था। तब उसके गुरु जी ने उससे कहा कि दर्द केवल एक एहसास है। यह सुन मुझे भी अचानक एहसास हुआ कि मुझे भी अपना ध्यान किसी ऐसी जगह पर लगाना चाहिए जिससे मेरे दर्द का एहसास कम हो सके।

जुलाई 14, 2008 को लियाओ ने अपनी टाँगों को गवांने के दो महीने के भीतर अपने नृत्य का प्रदर्शन किया। उसके स्टम्पस पर अब भी पट्टियाँ बंधी हुईं थीं। उसने रेशमी लाल वस्त्र पहने जिसमें वह बिल्कुल किसी ऐसे नवजात पक्षी की तरह लग रही थी जो खून से सना हुआ था।

उसके कुछ समय बाद लियाओ ने अपने प्रदर्शन में कमाए अच्छे नाम का सहारा लेकर चैरिटी परफार्मेंस का आयोजन किया ताकि वह भूकंप पीड़ितों के लिए धन राशि जुटा सकें।

तब से लेकर वह कई टी.वी शो में अपना प्रदर्शन दे चुकी है और दुनिया को अपनी कला का नमूना दिखा चुकी है। उसकी अथा इच्छाशक्ति, उत्साह, जीने की चाह दूसरों को प्रोत्साहित करती है। लेकिन लियाओ के लिए अपने जीवन में एक कदम आगे बढ़ना और दो कदम पीछे चलने जैसा था। बदकिस्मती ने लियाओ के जीवन में एक बार फिर दस्तक दी और उसके जीवन से खुशियाँ पूरी तरह छीन लेने का मानो फैसला करके आई हो।

2009 नववर्ष की पूर्व संध्या पर उसके पति ने उसके सामने तलाक के कागज़ लाकर रख दिए। उसने उन पर भी वैसी ही शांति से हस्ताक्षर कर दिए जैसे उसने एक साल पहले अपनी टाँगों के ऑपरेशन के समय हस्ताक्षर किए थे।

लियाओ ने कहा कि मुझे याद है हमारे तलाक से पहले मैं उससे कहना चाहती थी कि वह मेरा ख्याल क्यों नहीं रखता। लेकिन जब मैंने उसे फूट-फूटकर रोते हुए देखा, अपनी माँ और अपनी बेटी को खोने का गम वह बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। मैं उससे कुछ नहीं कह पाई बल्कि मैं उसके साथ मिलकर रोने लगी। लेकिन उन लम्हों को आज याद करते हुए मैं अपने पति का धन्यवाद करती हूँ क्योंकि उसी के कारण आज मैं किसी गम, दुख या संकट से नहीं घबराती। भगवान को दोष देना या लोगों को अपनी बदकिस्मती का दोष देने का कोई मतलब नहीं बनता। लियाओ, उसे अपनी किस्मत समझ आगे बढ़ती रहती है। लियाओ ने कहा केवल शिकायत करने से या निराश होने से, क्रोध करने से उसके लिए जीना और भी ज्यादा मुश्किल हो जाएगा।

वर्ष 2009 में लियाओ ने शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए अपना एक आर्ट ट्रूप स्थापित किया जिसमें करीब 10 सदस्य हैं ताकि वे सब अपना निर्वाह कर सकें। हालांकि, ट्रूप ने हर संभव प्रयास किया है लेकिन कुछ खास फायदा नहीं मिला है आज तक। प्रारंभिक मुश्किलों के बावजूद लियाओ को पूरा विश्वास है कि ट्रूप का भविष्य उज्जवल है। पिछले साल थैंक्स गिविंग डे की पूर्व संध्या पर लियाओ ने अपने माइक्रोब्लॉग पर लिखा कि, "मैं ईश्वर का धन्यवाद करती हूँ कि उन्होंने यह अमूल्य जीवन मुझे दिया। अपने पुनर्जन्म के बाद मेरे जीवन का हर आने वाला दिन लेकर आता है मेरे लिए कई सुखद आश्चर्य।"

इस साल जुलाई में चीन के सीसीटीवी चैनल द्वारा राष्ट्रीय डांस प्रतियोगिता "स्टेप अप" के लिए लियाओ को इनाम दिया गया। इस सम्मान के बाद जल्द ही चीनी टीवी चैनलों की मश्हूर एमसीस(प्रोग्राम प्रस्तुतकर्ता) छाए जिंग, सा बेइनिंग, यांग लान और छन लुयू ने लियाओ को अपने-अपने शो पर आमंत्रित किया। सबने लियाओ की तारीफ में कसीदे पढ़े। छाए ने कहा कि लियाओ की खूबसूरती और जिंदगी से अपार प्रेम और जीने की चाह देख लोगों की आँखों में आँसू भर आए। जबकि लुयू ने कहा कि लियाओ शक्ति और प्रेम की मूर्ति है। तो वहीं यांग ने कहा कि लियाओ का शांत मन से अपने दुर्भाग्य को अपनाना और उन सबको माफ कर देना जिन्होंने उसका साथ तब छोड़ा जब उसे उनकी मदद की सख्त जरुरत थी। तो सा ने कहा लियाओ ने अपने मन की सुन्दरता से सबका मन मोह लिया है।

आजकल लियाओ अपनी कुछ सहेलियों के साथ पूर्वी शांगहाई में हैं जहाँ वह विकलांग लोगों के लिए चंदा इकट्ठा कर रही है ताकि वह उनके लिए कृत्रिम पैर ले सके। लियाओ उम्मीद करती हैं कि इस मदद द्वारा कई लोग अपने पैरों पर चल सकेंगे। अपनी हाल ही में प्रकाशित किताब, जीवन का धन्यवाद में लियाओ ने बताया है कि किस तरह कृत्रिम टाँगों से उनके जीवन को नई दिशा मिली है। उन्होंने लिखा है कि जबसे मैंने कृत्रिम टाँगें लगाई हैं तबसे मेरा अपने जीवन को देखने का नज़रिया ही बदल गया है। मुझे ऐसा लगता है मानो यह मुझे शांत रहना सीखा रही हैं। चाहे लोग मेरी कितनी ही तारीफ क्यों न कर लें कि मैं कितनी मज़बूत हूँ या इतनी तकलीफों को झेलने के बावजूद आज मैं जिंदगी का सामना कैसे कर रही हूँ। ऐसा क्यों और कैसे। तो इसका जवाब यही है कि हर दिन सुबह उठने के बाद मुझे अपनी 10 किलो की नकली टाँगों का बोझ उठाकर चलना पड़ता है। यह मुझे हर पल याद दिलाती हैं कि मुझे ईश्वर के दिए इस उपहारनुमा जिंदगी की कद्र करनी चाहिए कि आज मैं खुद चल पा रही हूँ। कई सामान्य लोगों की अपेक्षा मेरे कदम बहुत संभल-संभलकर पड़ते हैं जमीन पर।

अपने जीवन की अंधेरी काल-कोठरी से निकलने में कामयाब लियाओ के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं कि वह आज मंच पर इतना सुन्दर नृत्य कर पा रही है। पिछले 5 वर्षों से लियाओ न जाने कितने लोगों की प्रेरणा का स्रोत रही है। कितने लोगों की सोच को उसकी कहानी ने बदल दिया है। अपने जीवन में आगे बढ़ते हुए लियाओ उम्मीद करती हैं कि वे एक बेहतर जीवन बिता पाएँगी।

हम सब की शुभकामनाएं आपके साथ है लियाओ। हम चाहते हैं कि आप यूँही सालों-साल नृत्य करती रहें और हम सबको हर पल यह याद दिलाती रहें कि जीवन में हम हर छोटी-बड़ी चीज़ के लिए शिकायत करते रहते हैं। लेकिन आप हमें उस ऊपर वाले का हमें यह अनमोल जीवन देने के लिए शुक्रगुज़ार करना सीखाती रहें, हर पल, हमेशा।

इसी के साथ आज्ञा दें हेमा कृपलानी को, आप से फिर मुलाकात होगी अगले मंगलवार यहीं न्यूशिंग स्पेशल पर तब तक स्वस्थ रहें-खुश रहें। नमस्कार।

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