
जब अनिभा बीस वर्ष की थी तो माता पिता की देहांत हो गई, उन को अपने छोटे भाइयों और बहनों का ख्याल रखना पड़ता था, छोटे भाइयों और बहनों के लिए अनिभा माता की तरह थी, इस के बाद उन्होंने दस अनाथ बच्चों को गोद लिया, कहा जा सकता है कि अनिभा अपने पूरे जीवनकाल में मां बनी रही है। उन्होंने कहा:
उस समय, मेरे साथ बहुत सारे परिवार एक साथ मंगोलिया से चीन हमारी अपनी मातृभुमि में वापस आए थे, पुर्नविस्थापन के दौरान कुछ बच्चों के माता-पिता का देहांत हो गया था, इसलिए वे अनाथ बन गए थे, मैं उसी समय से अनाथ बच्चों को गोद लेना शुरू कर दी थी। इन अनाथ बच्चों ने मेरे छोटे भाइयों और बहनों के साथ जीवन बिताया था अब उनका अपना परिवार है।





