वर्ष 2013 के शुरूआत में ही चीन के भीतरी मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश ने पांच सालों तक चलने वाली महाकाव्य गेसार के बचाव और संरक्षण परियोजना को सर्वांगीर्ण तौर पर शुरू की।
भीतरी मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश के अल्पसंख्यक प्राचीन ग्रंथ और गेसार संग्रहण व अनुसंधान कार्यालय के प्रधान सूया लाथू ने जानकारी देते हुए कहा कि महाकाव्य गेसार के बचाव और संरक्षण परियोजना में संबंधित बुनियादी सामग्रियों का संग्रहण करना, महाकाव्य के सांस्कृतिक एवं पारिस्थितिक पर्यावरण के बचाव एवं संरक्षण करना, गेसार से संबंधित श्रृंखलाबद्ध पुस्तकें लिखना और संबंधी टेडा बेस की स्थपाना तथा सांस्कृतिक संरक्षण व अनुसंधान अड्डे का निर्माण करना आदि कार्य शामिल हैं।
गेसार चीन में मंगोल, तिब्बती और थू जातियों का महाकाव्य है, जिस के विषय में इतिहास, धर्म, जाति और कला आदि शामिल है। वर्ष 2009 में युनेस्को ने इसे मानव जाति के गैर-भौतिक सांस्कृतिक अवशेष की सूची में शामिल किया था।
(श्याओ थांग)





