हाल ही में छिंगहाई पुलिस ने सफलता के साथ नवंबर 2012 से छिंगहाई प्रांत के ह्वांग नान तिब्बती जातीय प्रिफेक्चर में हुई आत्मदाह संबंधी घटनाओं का पता लगाया। विभिन्न अपराधों से जुड़े 70 संदिग्ध व्यक्तियों को पकड़ा गया, 52 लोगों पर अभियोग तय हुआ, और उनमें से 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
छिंगहाई सार्वजनिक सुरक्षा ब्यूरो के उपाध्यक्ष ल्यू बेन छेन ने बताया कि संबंधि आत्मदाह की घटनाएं विदेश में स्थित दलाईलामा गुट के राष्ट्र पृथकतावाद की साजिश के चलते हुई। दलाईलामा आत्मदाह करने वालों के लिये सूत्र पढ़ने के तरीके से खूब पैसे कमाते हैं। और विदेश में तिब्बती स्वतंत्रता के समर्थकों ने इसे भुनाकर आत्मदाह करने वालों को हीरो साबित करने की कोशिश की। वास्तव में आत्मदाह करने वाले तिब्बती स्वतंत्रता विचार व उग्रवादी राष्ट्रीय विचार के भ्रम में फंस गए हैं। इसके अलावा पड़ोसी क्षेत्र स्छ्वान व कानसू प्रांत में भी आत्मदाह की घटनाएं हुई। इसलिये उन्होंने अपनी उग्रवादी कार्रवाई से प्रोत्साहन पाकर आत्मदाह किया।
फूह्वा नामक एक व्यक्ति ने इन्टरव्यू देते समय कहा कि वर्ष 2005 में उन्होंने गैरकानूनी से भारत में प्रवेश किया। और दलाईलामा गुट के स्कूल में तिब्बती स्वतंत्रता से जुड़ा विशेष प्रशिक्षण भी लिया। जुलाई 2011 में उन्होंने छिंगहाई के ह्वांग नान प्रिफेक्चर में वापस जाकर बर्फ़ीले क्षेत्र की परंपरागत संस्कृति सेवा संघ नामक एक गैरकानूनी संगठन में भाग लिया। और कई बार इस संगठन की ओर से आत्मदाह करने वाले व्यक्तियों के अंतिम संस्कार में भाषण देकर तिब्बती स्वतंत्रता के लिए उकसाया।
वर्तमान में फूह्वा तथा उनके साथियों को जानबूझकर हत्या, सार्वजनिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने आदि आरोपों के चलते गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कहा कि इन मामलों पर जोर देकर कानून के अनुसार संबंधित अपराधियों को कड़ी सज़ा दी जाएगी।
चंद्रिमा





