

वर्ष 2009 में तिब्बत ने घास मैदान में पारिस्थितिकी संरक्षण प्रोत्साहन तंत्र स्थापित किया। इसके बाद से लेकर आज तक के 3 वर्षों से ज्यादा समय में तिब्बती पशुपालन क्षेत्र में बहुत परिवर्तन आया है। नाछ्यु प्रिफेक्चर की आनडो कांउटी के फाना कस्बे के चरवाहे यादा के परिवार में गायों और भेड़ों की संख्या कम हो गयी, उसके 267 हेक्टेयर वाले घास के मैदान में घास की स्थिति पहले से कहीं बेहतर हो गयी है। तिब्बती चरवाहे यादा ने कहा:"पहले मेरे घर में कुल 150 गाय, 160 भेड़ होती थीं। घास मैदान में पारिस्थितिकी संरक्षण प्रोत्साहन तंत्र लागू किये जाने के बाद हमने गायों की संख्या को 60 तक कम किया। इससे घास मैदान की स्थिति अच्छी होने लगी, साथ ही गाय अच्छी किस्म की घास खाने से स्वस्थ रहने लगीं जिससे हमारी आय भी बढ़ गई। इस तरह हम चरवाहे इस तंत्र का समर्थन करते हैं।"
पिछले 12 वर्षों में तिब्बत ने मिट्टी कटाव विरोधी और प्राकृतिक संरक्षण केंद्र की स्थापना में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। अब तक तिब्बत में प्रमुख नदियों के पानी की गुणवत्ता त्रितीय स्तर तक, आंशिक नदियों के पानी की गुणवत्ता द्वितीय स्तर तक और प्रमुख झीलों के पानी की गुणवत्ता प्रथम स्तर तक पहुंच गई। साल के 350 दिनों में राजधानी ल्हासा की वायु गुणवत्ता द्वितीय स्तरीय मापदंड पर बनी रहती है। प्रमुख शहरों और कस्बों में पर्यावरण और वायु की 95 प्रतिशत गुणवत्ता बरकरार रहती है। इसके अलावा 4 लाख हेक्टेयर वाली दलदल भूमि का संरक्षण किया गया है। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के सामाजिक विज्ञान अकादमी के विशेषज्ञ हो कांग ने जानकारी देते हुए कहा:"नवीनतम पर्यावरण विज्ञप्ति से पता चलता है कि तिब्बत के जल, वायु और मट्टी में से कुछ भी प्रदुषित नहीं हुए, जहां प्राकृतिक आदिम स्थिति बरकरार रही है और विश्व में सबसे अच्छे प्राकृतिक पर्यावरण वाले क्षेत्रों में से एक है। अब तिब्बत आर्थिक विकास और पारिस्थितिकी संरक्षण को जोड़ने वाला अनवरत विकास के रास्ते पर आगे चल रहा है।"
पिछले 12 वर्षों में तिब्बत में आए परिवर्तन की चर्चा में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की विकास और रूपांतरण समिति के अधीनस्थ पश्चिमी विकास विभाग के प्रधान चङ क्वोफिंग ने भाव विभोर होकर कहा:"पश्चिमी चीन में द्रुत गति विकास की रणनीति लागू किये जाने के पिछले 12 वर्षों में तिब्बत में भारी परिवर्तन हुआ है, बहुत तेज़ गति से विकास हुआ है। 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान हम संरक्षण के दौरान विकास करने और विकास के दौरान संरक्षण करने वाले सिद्धांत पर कायम रहेंगे, ताकि तिब्बती जनता के उत्पादन और जीवन स्थिति में वास्तविक सुधार किया जा सके और सतत विकास साकार हो सके। हम पारिस्थितिकी पर्यावरण पर जोर देते रहेंगे और समृद्ध के रास्ते पर आगे चलने पर कटिबद्ध हैं।"















