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पठार के गुर्दे के रक्षक
2013-02-25 19:46:59

काहाई झील लुछ्यु कांउटी के चरवाहों का पालन करती है। स्थानीय लोग उसे "पठार की पवित्र झील"मानते हैं। थ्यान रेइछुन के अलावा बहुत ज्यादा स्थानीय वासी सक्रिय रूप से अपनी जान के स्रोत के संरक्षण में लगे हुए हैं। काहाई जिले के शोवा गांव वासी तिब्बती चरवाहे शी होताओ पक्षियों के संरक्षण के कारण आसपास बहुत मशहूर है।

इस वर्ष 60 वर्षीय शी होताओ काहाई झील से जुड़ी झील"जंगली हंस झील"के तट पर रहते हैं। हर वर्ष अप्रैल और मई महीने में हज़ारों मौसमी पक्षी स्पोनिंग और प्रजनन के लिए यहां आते हैं। शी होताओ कभी कभार रात भर गश्त लगाते हैं। डरते हैं कि कोई व्यक्ति या जानवर पक्षियों के अंडों को नष्ट न कर दे। घायल मौसमी पक्षी को देखने पर वे उसे गोद में लेकर घर वापस लाते हैं और धैर्य के साथ उसकी देखभाल करते हैं। पक्षियों के ठीक होने के बाद वे उसे झील तक वापस भेजते हैं। अगर कोई पक्षी-शिकारी आता है, तो वे शीघ्र ही उनके सामने जाकर उसे रोकते हैं।

पक्षी-रक्षा का अनुभव बताते हुए तिब्बती चरवाहे शी होताओ ने कहा:"प्राकृतिक संरक्षण केंद्र की स्थापना से पहले कई शिकारी यहां आते थे। मैं उन्हें रोकने के लिए कभी कभार उनके साथ झगड़ा करते थे। एक बार चार शिकारी पक्षियों का शिकार करने जंगली हंस झील आए, मैंने उनके साथ लड़ाई की थी।"

शिकारियों की संख्या चार थी और शी होताओ अकेले थे। लेकिन अंत में वे इन शिकारियों को जंगली हंस झील से हटाने में कामयाब रहे। पक्षियों का संरक्षण करने के बाद शी होताओ बहुत खुश हैं। आम समय में वे कभी कभार काहाई संरक्षण केंद्र के कर्मचारियों के साथ गपशप करते हैं। यहां वे उनके साथ पक्षी संरक्षण से संबंधित अनुभवों का आदान प्रदान करते हैं और उनसे संबंधित जानकारी सीखते हैं। शी होताओ काहाई झील के तीन बार सूखने के भी प्रत्यक्ष साक्षी हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय चरवाहे इस क्षेत्र की दलदल भूमि के संरक्षण को महत्व देते हैं। संरक्षण केंद्र स्थापित होने के बाद यहां की पारिस्थितिकी स्थिति धीरे-धीरे बदल रही है और लोगों के जीवन में भी दिन ब दिन सुधार आया है। इसकी चर्चा में उन्होंने कहा:"वर्ष 2000 में काहाई झील बिलकुल सूख गई थी। मात्र झील के केंद्र में बहुत कम पानी था। गायों व भेड़-बकरों, यहां तक कि स्थानीय लोगों के लिए पीने का पानी नहीं मिल पाता था। हमें पानी लेने के लिए दूर तक जाना पड़ता था, कभी कभार दस से ज्यादा किलोमीटर दूर जाकर पानी को पीठ पर लादकर घर वापस आना पड़ता था। प्राकृतिक संरक्षण केंद्र स्थापित किए जाने के बाद इस क्षेत्र के वनस्पति और जल स्रोत पहले से कहीं बेहतर हुए हैं।"

आजकल हर दिन शी होताओ घर के दो मंजिले मकान पर जंगली हंस झील का निरीक्षण करते हैं। गांव में अपरिचित व्यक्ति के आने पर वे उन पर विशेष ध्यान देते हैं, पक्षी का शिकार करने वालों का पता लगाने के बाद वे उनका विरोध करते हैं। पक्षी संरक्षण के वक्त शी होताओ का रूख बहुत कड़ा होता है और कुछ लोग उन्हें"बुरा बूढ़ा"भी कहते हैं। इसकी चर्चा में शी होताओ ने कहा:"अब कई लोग मुझसे डरते हैं और वे यहां पक्षियों को नहीं मारते। जब मैं किसी व्यक्ति को कार या मोटर साइकिल चलाते हुए पक्षी को परेशान करते हुए देखता हूं, तो मैं उसके सामने जाता हूं। इस तरह वे मुझसे नाराज होते हैं"

वर्ष 2009 में शी होताओ को अंतरराष्ट्रीय"सुबरू जंगली जानवर संरक्षण पुरस्कार"से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि वे खुद पक्षियों को पसंद करते हैं। पक्षी संरक्षण पारिस्थितिकी संरक्षण ही है। सिर्फ़ यहां की पारिस्थितिकी अच्छी होने के बाद स्थानीय किसानों व चरवाहों का जीवन बेहतर होगा। शी होताओ ने कहा:"आज चरवाहे स्वच्छ पानी पीने लगे हैं। लेकिन पशु, गाय व भेड़-बकरे काहाई झील पर निर्भर रहते हैं। यह एक साधारण झील के बजाए हमारे दिल में 'पवित्र झील' है। संरक्षण केंद्र हमारे यहां की पारिस्थिति का संरक्षण करता है। इस पर मुझे और यहां रहने वाले सभी लोगों को बहुत खुशी है। वर्तमान में झील बड़ी हो रही है और हमें सच्चे माईने में अच्छा लगता है।"

कानसू प्रांत के कान्ना तिब्बती प्रिफैक्चर के काहाई चेछा संरक्षण केंद्र के उप प्रधान छङ योशुन ने कहा कि सरकार और स्थानीय चरवाहों की समान कोशिश के जरिए काहाई झील क्षेत्र की स्थिति लगातार बेहतर हो रही है। झील के पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है। झील के आसपास के क्षेत्रों में 60 प्रतिशत सूखे पहाड़ी स्प्रिंग में पानी फिर भर गया है। आर्द्रभूमि का क्षेत्रफल गत 90 दशक के 480 हैक्टेयर से वर्तमान के 2170 हैक्टेयर तक बढ़ चुका है। काहाई झील क्षेत्र में दलदल भूमि का क्षेत्रफल 12 हज़ार हैक्टेयर बहाल हो चुका है। इस तरह स्थानीय जलवायु विनिमय की क्षमता बड़ी हद तक उन्नत हुई है। अक्तूबर 2011 तक काहाई क्षेत्र को औपचारिक तौर पर अंतरराष्ट्रीय महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि की सूची में शामिल किया जा चुका है।

छिंगहाई तिब्बत के विशाल घास के मैदान में नीले आसमान में सफेद बादल के नीचे पक्षी हरी झील पर उड़ रहे हैं। आसपास के पहाड़ों के तलहटी में याक, भेड़ बकरियां घास चरते कभी देखे जाते हैं और कभी नहीं। सुन्दर प्राकृतिक दृश्य में काहाई झील क्षेत्र मानो मानव जगत का स्वर्ग लग रहा हो।


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