हमने लिन तुंग के साथ एक कमरे में जाकर देखा कि कमरे की चार दीवारें और छत सब के सब बांसों से बुनी हुई हैं। कमरे में दो पलंग और लकड़ी से तैयार सोफा सेट और चाय मेज रखी हुई है, सोफा सेट पर नकली जानवर फर कंबल बिछा हुआ है, दीवार पर गाय सिर आदि बनावटें भी लगी हुई हैं, हर जगह पर विशेष जातीय रहन सहन का आभास दिखाय़ी देता है। वर्तमान लिन तुंग के इस घरेलू होटल में कुल 10 इसी रुपी वाले कमरे रखे हुए हैं। जब साल के जून से सितम्बर तक के व्यस्त पर्यटन मौसम में यह घरेलू होटल नानईको के दौरे पर वाले पर्यटकों से खचाखच भर देता है, काफी चहल पहल नजर आती है।
लिन तुंग ने कहा कि अपने घरेलू होटल में पर्यटक न सिर्फ स्वयं लोपा जाति की वास्तविक जीवन स्थिति को महसूस करते हैं, बल्कि बर्तन चिकन, भुने हुए काली स्वर मिट आदि लोपा जाति के विशेष स्वादिष्ट फूट भी चखने को मिलते हैं। इस के अलावा लोपा जाति और तिब्बती जाति लम्बे अर्से से रहने की वजह से एक दूसरे को प्रभावित कर लेती हैं। लिन तुंग के घरेलू होटल में पर्यटकों के लिये विशेष तौर पर कुछ तिब्बती स्वादिष्ट पकवान भी तैयार किये जाते हैं। इतना ही नहीं, मेहनती लिन तुंग ने यहांतक कि पर्यटकों को आकर्षित करने के लिये लोपा जाति और तिब्बती जाति की आहार विशेषताओं को साथ मिलाकर कुछ नयी स्वादिष्ट तरकारियां भी आविष्कृत कर दी हैं। रात को लिन तुंग पर्यटकों के लिये मैदान पर विशेष तौर पर अलाव लगाकर लोपा जाति के परम्परागत नृत्य गान प्रस्तुत कर लेते हैं। इसका परिचय देते हुए लिन तुंग ने कहा:"हम पर्यटकों के लिये चाइन नामक लोपा जातीय परम्परागत लोक गीत सुनाते हैं, साथ ही अलाव को चक्कर लगाकर लोपा जाति के पाल्की नाम वाला छूरी नाच भी नाचते हैं, तत्कालीन वातावरण बहुत जोशपूर्ण है, पर्यटक भी बेहद संतुष्ट हुए हैं।"
कहते कहते लिन तुंग ने हमें वह लोपा जातीय लोक गीत सुना दिया, जो उन्होंने अकसर पर्यटकों के लिये सुनाया।
लिन तुंग के आंगन में एक करीब सौ वर्गमीटर विशाल मकान भी है। इस मकान का एक भाग केंटिंग का काम देता है, दूसरा भाग लोपा जाति के परम्परागत बांस तीर , लम्बे तलवारे और अन्य प्रकार वाले उत्पादन औजारों, चुल्हे, पौषाकों व आभूषणों से सुसजित हुआ है। दीवारों पर लोपा जाति के इतिहास को प्रतिबिम्बित करने वाले पुराने फोटो लगे हुए हैं, देखने में एक लघु म्युजियम जान पड़ता हो। लिन तुंग ने कहा कि पर्यटक एक तरफ यहां पर खाना खाते हैं, दूसरी तरफ लोपा जाति के इतिहास व जीवन में हुए परिवर्तन भी देख पाते हैं। उन्होंने कहा:"हम चाहते हैं कि यह लघु म्युजियम पर्यटकों पर सुंदर छाप छोड दे। दीवारों पर जो पुराने फोटो लगे हुए हैं, वे मुख्यतः पिछले 50 सालों में हमारे लोपा जाति के स्वर्गीय बुजुर्गों के हैं। कुछ फोटो में हमारी लोपा जाति का शिकार करने का दृश्य भी दिखाई देता है, इस के अलावा हमारी लोपा जाति की पौषाके और परम्परागत चुल्हे आदि पुरानी चीजें भी प्रदर्शित हुई हैं। पर्यटक इन वस्तुओं को देखने से हमारी रहस्यपूर्ण लोपा जातीय संस्कृति को धीरे धीरे समझ सकते हैं।"

लिन तुंग की जन्मभूमि नानइको तिब्बत के लिनची प्रिफेक्चर की मिनलीन कांऊटी में अवस्थित है। यहां की ऊंचाई समुद्र की सतह से कोई दो हजार पांच सौ मीटर है, पारिस्थितिकी वातावरण अच्छी तरह सुरक्षित हुआ है, नद नदियां एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं, घने आदिम जंगल उगे हुए हैं, प्राकृतिक दृश्य अत्यंत मनोहर है। यह स्थल चीन में ऐसे क्षेत्रों में से एक भी है, जहां चीनी कम अल्पजनसंख्या वाली लोपा जाति बसी हुई है। 1951 में तिब्बत की शांतिपूर्ण मुक्ति से पहले लोपा जाति गहरे पर्वतों में रहती थी और आदिम कबिलाई जीवन बिताती थी। आज हालांकि लोपा जाति आधुनिक जीवन बिताने लगी है, पर उन की कुछ विशेष जातीय संस्कृति और रीति रिवाज फिर भी बड़े ढंग से रखे हुए हैं। लिन तुंग ने अपनी जन्मभूमि के इसी प्रकार वाले विशेष पर्यटन व जातीय सांस्कृतिक साधन को ध्यान में रखकर वर्ष 2011 में यह घरेलू होटल उद्घाटित कर दिया। उनका कहना है:"हमारे छुनलिन गांव में लोपा जाति 99 प्रतिशत भाग बनती है, और तो और हमारे नानइको का पर्यटन विकास जोरों पर है, मेरा विचार है यह एक बहुत अच्छा मौका है, इस मौके का फायदा उठाकर हमारी लोपा जाति को खुशहाली पर ले जाना चाहता हूं। इसलिये मैं ने अपने रिश्तेदारों व दोस्तों से पैसे उधार कर चार पांच लाख य्वान जुटाकर इसी घरेलू होटल का उद्घाटन कर दिया।"
इस घरेलू होटल चलाने से लिन तुंग ने पर्यटन उद्योग से खुशहाली की आशा देख ली है। पहले लिन तुंग ल्हासा शहर की एक कम्पनी में ड्राइवर का काम करते थे, सालाना आय केवल 6 हजार थी। अब इस घरेलू होटल को खोले हुए मात्र एक साल से ज्यादा समय था, पर वार्षीक आय दो लाख य्वान तक पहुंच गयी।
बेशक, यह आमदनी इस घरेलू होटल की स्थापना में लगायी गयी 8 लाख से अधिक पूंजी की तुलना में कुछ भी नहीं है, पर लिन तुंग को इस पर कोई चिन्ता नहीं है, क्योंकि अपने इस घरेलू होटल के माध्यम से बहुत ज्यादा पर्यटक लोपा जाति से परिचित हो गये हैं, वे इस पर बेहद संतुष्ट हैं। लिन तुंग ने कहा:"मेरे इस घरेलू होटल खोले हुए एक साल से अधिक समय हो गया है, इसे लगाने के लिये पहली बार चार पांच लाख य्वान लगाये हुए हैं, चालू वर्ष में दूसरी बार फिर चार लाख य्वान जुटा दिये हैं, अभी तक कुल 8 लाख से अधिक य्वान लगे हुए हैं, मैं इस घरेलू होटल को विस्तृत करने के लिये लाभ प्राप्त 2 लाख य्वान भी लगाने को तैयार हूं, हालांकि ज्यादा लाभ नहीं हुआ है, पर अपनी जाति के लिये थोड़ा बहुत योगदान देने पर मैं बहुत संतुष्ट हूं, लागत में लाभ हासिल न हो पाने पर भी मुझे कोई पछतावा नहीं है।"
वास्तव में लिन तुंग अपने घरेलू होटल पर इसीलिये आशाप्रद हैं, क्योंकि उन्होंने देखा है कि तिब्बत के पर्यटन उद्योग के विकास के चलते अधिकाधिक पर्यटक नानइको के दौरे पर आने लगे हैं। साथ ही नानइको में पर्यटन उद्योग के विकास को महत्व देने के चलते कुछ सहायक पर्यटन संस्थापन भी निर्मित हुए हैं, लिन तुंग अपने बेहतर व्यापार पर आशावान हैं। अब उन्होंने अगवानी क्षमता को बढाने के लिए अपने घरेलू होटल का विस्तार कर दिया है। उनका कहना है:"मेरे ख्याल से अपने घरेलू होटल की संभावाना बेहत विशाल है। स्थानीय सरकार के विभिन्न विभागों, खासकर पर्यटन ब्यूरो ने नानइको के पर्यटन उद्योग के विकास को बहुत महत्व दिया है, हालांकि मुझे यह होटल खोले हुए एक साल से अधिक समय हो गया है, पर मुझे पक्का विश्वास है कि निकट भविष्य में और ज्यादा धन कमाये जायेंगे। मैं होटल के पैमाने का विस्तार कर रहा हूं, सर्दियों में पूरा विस्तृत काम पूरा होगा, उसी समय चालीस से अधिक पर्यटकों की अगवानी करने में सक्षम होगा। मैं केंटिंग का विस्तार करना चाहता हूं, प्रदर्शित सांस्कृतिक विषय वस्तुएं और ज्यादा जोड़ी जायेंगी, ताकि पर्यटक और अच्छी तरह लोपा जातीय संस्कृति को महसूस कर सकें, साथ ही पर्यटक यहां पर ठहरने के साथ साथ हमारी लोपा जाति की आहार संस्कृति को अनुभव करते हुए लोपा जाति की जन्मभूमि के रमणीय सौंदर्य का लुत्फ भी उठा लेते हैं।"
वर्तमान लिन तुंग की एक यह छोटी सी आशा है कि अपने घरेलू होटल को चलाने में सफल करने के बाद अपने खुशहाल अनुभव को गांववासियों को सीखा देंगे, ताकि समूचे गांववासी उन की ही तरह खुशहाली के पथ पर निकल सके।















