
विश्व छत के नाम से नामी छिंगहाई तिब्बत पठार पर जब लोगों को तेज भूख लग रही है, तो वे एक कप मक्खी चाय पीने से एकदम तरोताजा हो जाते हैं, जब थक जाते हैं, तो एक कप गरमागर्म चाय पीने से पूरी थकावट समाप्त हो जाती है। जब लोग कड़ाके की सर्दियों में कई कप मक्खन चाय पी लेते हैं, तो पूरा बदन तुरंत ही गर्म हो जाता है। यहां तक कि लोग किसी बीमारी से लग जाते हैं, तो एक प्याला गाढ़ी चाय पीने से बीमारी का इलाज भी किया जाता है। चाय पीना तिब्बती सामाजिक जीवन का एक अभिन्न भाग बन गया है। प्रमुख चाय उत्पादन क्षेत्र की हैसियत से युन्नान प्रांत तिब्बती चाय संस्कृति में अहम स्थान बना लेता है। युन्नान प्रांत के फूअड़ चाय संघ के महा सचिव चू ची आन ने कहा:"तिब्बती क्षेत्रों में तिब्बती जाति में लम्बे अर्से से फूअड़ चाय पीने की परम्परा बनी रही है, वे फूअड़ चाय से मक्खन चाय भी बनाने को पसंद करते हैं। 1996 में दसवें पचन अर्दनी ने विशेष तौर पर युन्नान प्रांत में फूअड़ चाय के उत्पादन, प्रोसेसिंग और बिक्रि का निरीक्षण दौरा किया, साथ ही दसियों टन फूअड़ चाय का आर्डर भी कर दिया। उन के द्वारा आर्डर फू्अड़ चाय पत्तिय़ों का आकार प्रकार मशरुम जैसा है, इसलिये इस चाय को विशेष तौर पर पंचन थो कहलाया जाता है, इस चाय का प्रयोग मुख्य रुप से धार्मिक जगत की हस्तियों की सेवा में किया जाता था। तिब्बती जाति में यह कहावत प्रचलित है कि तीन दिन में खाना खाये बिना लोग सह सकते हैं, पर दिन में चाय न पीने से रह नहीं सकते। तिब्बती जाति फूअड़ चाय अपने प्राण की तरह समझती है।"















