चीन और युरोपीय युनियन के संबंधित अधिकारियो ने 5 जून को बेलजियम-युरोपीय युनियन द्वारा आयोजित चीन-युरोप खाद्य-पदार्थ सुरक्षा विचार मंच में उपस्थित होकर अपने विचार पेश किए । उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत कर विभिन्न देशों की जनता को स्वस्थ खाद्य पदार्थ की उपलब्धता की गारंटी देनी चाहिए।
चीन की राष्ट्रीय क्वालिटी निगरानी व संगरोध ब्यूरो के प्रधान वांग जी ने कहा कि वर्तमान वैश्विकीकरण दौर में खाद्य-पदार्थ की सुरक्षा सभी देशों का मुख्य मुद्दा है। उन्हों ने कहाः
वैश्विक अर्थतंत्र के विकास और अंतरराष्ट्रीय आवागमन तथा खाद्य-पदार्थ के अंतराराष्ट्रीय व्यापार के दिन पर दिन सक्रिय होने की स्थिति में खाद्य पदार्थों के अवैध उत्पादन, परिवहन और व्यापार पर रोक लगाना प्रत्येक सरकार की समान कार्य बन गया है। खाद्य-पदार्थों की सुरक्षा गारंटी, स्वास्थ्य की गारंटी सभी देशों के नागरिकों और सरकारों के मुख्य मुद्दा और सामना करने वाली मुख्य चुनौति बन गयी है।
वांग जी ने परिचय देते हुए कहा कि चीन ने पहले ही राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा जोखिम निरीक्षण और मूल्यांकन पद्धति की स्थापना की है। जो कि खाद्य पदार्थ रोग, प्रदूषण और खाद्य पदार्थ में उपस्थित गंभीर रोगाणु की जाँच करता है। चीन सरकार ने पहले ही युरोपीय युनियन के मुख्य व्यापारिक भागीदार के साथ संवाद व संपर्क पद्धति स्थापित कर ली है।
युरोपीय युनियन स्वास्थ्य और उपभोक्ता नीति संगठन के अधिकारी जॉन डाली ने भी चीन और युरोपीय युनियन के बीच खाद्य सुरक्षा को बढाने की ईच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहाः
चीन और युरोपीय युनियन के बीच खाद्य सुरक्षा क्षेत्र में अच्छा रिश्ता है साथ ही हम सभी आशा करते हैं कि इसी आधार पर चीन-युरोप खाद्य सुरक्षा सहयोग को बढावा दिया जाए। इस बात पर बल देने की यह आवश्यकता है कि हमारी कोई भी खाद्य सुरक्षा नीति आम जनता के स्वास्थ्य के हित में होना चाहिए।
इधर के कुछ सालों में, युरोप चीन का दूसरा सबसे बड़ा खाद्य निर्यात क्षेत्र है। वर्ष 2007 से 2009 तक चीन द्वारा युरोप को निर्यातित वस्तुओं का गुणवत्ता मानक 99 प्रतिशत तक बढा है।
श्रोता दोस्तो, शांगहाई विश्व मेले के परिसर में अनगिनत लोगों का आवागमन जारी है, मेला परिसर में अनेकों विदेशी पर्यटकों को देखा जा सकता है। फ्रांस के एक पर्यटक लुडोविक ने मेले का भ्रमण करने के बाद कहा कि शांगहाई विश्व मेले ने विश्व के लोगों के मेल-जोल के लिए एक विशाल मंच तैयार किया है।
विश्व मेले में कई दिनों के भ्रमण में लुडोविक ने अनेक देशों के मंडपों का अवलोकन किया। विश्व मेले के प्रभाव के बारे में बात करने पर उन्होंने बताया कि उनकी नजर में उनके उपर विश्व मेले का सबसे ज्यादा प्रभाव उसकी विविधतापूर्ण संस्कृति है।
ऐसा कहा जा सकता है कि कुछ देशों को छोङकर विश्व के सभी देशों ने इस अवसर का लाभ उठाया है। इससे यह साबित हुआ है कि अगर लोगों के पास अवसर हो तो वे एक जगह विश्व के सभी देशों की संस्कृति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आप एक ही स्थान पर एक ही समय में मिश्र और लक्जेमबर्ग की संस्कृति को देख सकते हैं साथ ही ऐसे दूसरे देशों के भी, जिनके बारे में आपने पहले कभी भी नहीं सुना था, देख सकते हैं।
लुडोविक जी ने कहा, पहले मुझे विश्व मेले में कोई दिलचस्पी नहीं थी क्योंकि उनका मानना था कि विश्व मेला सिर्फ अमीर और ताकतवर देशों का मेला है। अगर दूसरे छोटे और विकासशील देश भाग नहीं लेते हैं तो इस मेले का लक्ष्य पूरा नहीं होता है। लेकिन चीन में आयोजित शांगहाई विश्व मेला ने इस मानक को पूरा किया है।
चीन ने अफ्रीकी देशों के लिए मुफ्त में मंडपों का निर्माण किया है , इसलिए पचास से भी अधिक देशों की इस मेले में भागीदारी संभव हो सकी है जिस ने इस मेले में विविधतापूर्ण संस्कृति को बढावा दिया है। मैं कहना चाहता हूँ कि, एक विश्व मेले में अगर अफ्रीकी देशों की भागीदारी नहीं है, उनकी विविधता भरी संगीत और नृत्य नहीं हैं, साथ ही दूसरे विकासशील देशों और छोटे देशों की भागीदारी नहीं है तो विश्व मेले में एक बहुत बड़ी कमी है। इसलिए विश्व मेला एक विकसित और ताकतवर देशों के मंच से इस तरह के समान भागीदारी वाले मंच में परिवर्तन एक बहुत बड़ी उपलब्धि कहा जा सकता है।
लुडोविक जी ने कहा कि विश्व सामाजिक मंच पर इन विकासशील देशों के मंडपों नें विकासशील देशों के लोगों के जीवन को प्रदर्शित किया है। लडोविक जी के लिए, यह विश्व मेला विश्व के ढांचे में परिवर्तन का एक प्रतीक है। विकासशील देश, विश्व मंच पर और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे, यही उनकी कामना है।















