वर्ष 2010 के सर्वश्रेष्ठ प्रायोगिक शहर के रूप में शांगहाई विश्व मेले ने 76 मिसालें जमा कर ली हैं जिसके द्वारा लोगों के सामने आरामदायक जीवन, नवीन और सतत विकास वाला शहर की छवि पेश की गई है। इसके मुख्य आयोजक ने 3 तारीख को कहा कि, हालांकि इन सभी मामलों में पेश की गई सामग्री एक समान नहीं है लेकिन इन सबमें तीन समान अवधारणाएं झलकती हैं यानी सामूहिक बँटवारा, उपयुक्तता और कम कार्बन।
जर्मनी के ब्रेमेन प्रायोगिक शहर के मंडप में हमारे संवाददाता को उनके द्वारा प्रदर्शित पवन ऊर्जा, बिजली गाड़ी, मौसम अनुसंधान, ऊर्जा प्रबंधन और कार शेयरिंग आदि विषयों से इस शहर के द्वारा कम ऊर्जा खपत के बारे में जानकारी मिली है। ब्रेमेन प्रायोगिक शहर के मंडप के संबंधित अधिकारी ने कहा कि उन्हों ने प्रदर्शनी में ऊर्जा के सम्मिलित प्रयोग पर जोर दिया है। इस पर उन्होंने कहाः
संसाधन हम सभी लोगों का है। इसका कैसे कम खपत किया जाए यह हमलोगों के सामने प्रश्न है। हमलोग शुद्ध ऊर्जा का उपयोग करते हैं, जैसाकि ब्रेमेन शहर एक समुद्रतटीय शहर है, इसलिए हमलोग समुद्री पवन ऊर्जा के उपयोग को बढावा देते हैं। क्योंकि, समुद्र के अंदर पवन ऊर्जा के मशीन के प्रयोग में जमीन पर कब्जा और प्रदूषण नहीं है। दूसरी तरफ, हमलोग आमतौर पर एक घंटे ही गाड़ी का प्रयोग करते हैं, तो खाली समय में क्यों गाड़ी के द्वारा जगह को घेर कर रखने दिया जाए। हमलोग क्यों नहीं इन जमीनों पर हरियाली बिछाएं, जिससे बेहतर शहर बेहतर जीवन का विचार पूरा हो सके।
दूसरी तरफ कनाडा के मॉट्रीयल प्रायोगिक शहर का रूप ब्रेमेन शहर से अलग है। उस के मंडप में मल्टीमीडिया, लेख, फोटो आदि के माध्यम से मॉंट्रीयल शहर ने लोगों के सामने CESM पर्यावरण संरक्षण केंद्र द्वारा एक गंभीर रूप से प्रदूषित जगह को कैसे एक पर्यावरण संरक्षण उद्यान के रूप में बदल देने का उदाहरण दिया है।
विश्व मेले प्रायोगिक शहर विभाग के प्रधान सुन लिएन संग जी ने कहा कि, इन सभी शहरों की विषय वस्तु अलग-अलग है लेकिन इन सभी में एक समानता भी है यानिकि सामूहिक बँटवारा, उपयुक्तता और कम कार्बन उत्सर्जन। उन्होंने कहाः
पहला सामूहिक बँटवारा । विश्व मेला एक ऐसा वैश्विक मंच है जहाँ शहरों ने अपने अनुभवों को लोगों के सामने परोस दिया है। इनका लक्ष्य है, लोगों में अपने अनुभव बाँटना, अपने नियम-कानून सीखना, अपनी तकनीकों को बाँटना, अपने परिणामों का समान उपभोग करना। इस तरह का सामूहिक बँटवारा न केवल एक प्रदर्शनी है बल्कि इसके द्वारा बेहतर प्रायोगिक शहर के विचार को भी बढावा दिया जाता है। दूसरा है आरामदायक, इन प्रायोगिक शहरों ने अच्छा-बुरा, बढिया-घटिया का विचार नहीं दिया है बल्कि उचित और अनुचित का विचार पेश किया है जिसका मतलब है कि जो उचित है वही सबसे उत्तम है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण बात कम कार्बन उत्सर्जन। इन सभी प्रायोगिक शहरों का एक मकसद कम कार्बन उत्सर्जन वाला विचार देना है। जो कि प्रकृति के नियमों का आदर करते हुए कार्बन डायऑक्साईड के कम उत्सर्जन के साथ ही शहर के जल, वायु, हरियाली, जमीन आदि में प्रदूषण को कम करना आदि विचारधारा पेश करते हैं।















