जापान की विकसित औद्योगिक विज्ञान-तकनीक संबंधी राष्ट्रीय प्रतिष्ठान के अनुसार जांच-पड़ताल से पता चला है कि फुकुशीमा दायची परमाणु संयत्र से लीक गए रेडियोधर्मी तत्व का स्थानीय भू-जल पर पड़ा प्रभाव बहुत सीमित है।
इस संयंत्र के अर्धव्यास के हिसाब से सैकड़ों मीटर की परिधि में भूमि की सतह से 5 मीटर की गहराई में ऐसी मिट्टी व रेत वाली परत होती है,जिस तक पानी आसानी से पहुंच सकता,तो भी उसके नीचे कोई 20 मीटर मोटी वह परत उपलब्ध है,जो पानीरोधी है।इसलिए संयंत्र का रेडियोधर्मी तत्व अगर बड़ी मात्रा में बारिश के साथ भूमि में घूस जाता है,तो वह उतनी गहराई तक नहीं पहुंच सकता है,जितनी लोगों को आशंका है।
इसके साथ जांच-पड़ताल से यह भी पाया गया है कि फुकुशीमा दायची परमाणु संयंत्र की चारों तरफ से 30 कि.मी की दूरी पर कुछ क्षेत्रों की मिट्टी परमाणु दूषण से प्रभावित हुई है।संभावना है कि भीतरी क्षेत्र का जलस्रोत भी प्रदूषित हो गया हो।संबंधी शोधकर्ता इस पर काम जारी रखने को तैयार है।















